37e LÉGISLATURE,
2e SESSION
HANSARD RÉVISÉ • NUMÉRO 003
TABLE DES MATIÈRES
Le mercredi 2 octobre 2002
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The Speaker |
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DÉCLARATIONS DE DÉPUTÉS
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L'environnement |
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Mme Phinney |
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Le bois d'oeuvre |
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M. Lunn |
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L'American Hellenic Educational Progressive Association |
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Mme Folco |
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Eaux Vives Harricana |
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M. St-Julien |
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Jour commémoratif national |
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M. Myers |
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La campagne Hay West |
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Mme Skelton |
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Le député de Haldimand—Norfolk—Brant |
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Mme Bulte |
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L'entreprise Caoutchouc Crosston |
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Mme Picard |
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Les aires marines de conservation |
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M. Adams |
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Les affaires autochtones |
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M. Pallister |
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Le Sri Lanka |
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M. Cotler |
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Le logement |
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Mme Davies |
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Le discours du Trône |
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M. Loubier |
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Le Mois de l'histoire des femmes |
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M. Malhi |
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La justice |
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M. MacKay |
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Le premier ministre |
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Mme Bennett |
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QUESTIONS ORALES
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L'Irak |
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M. Harper |
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M. Chrétien |
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M. Harper |
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M. Chrétien |
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M. Harper |
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M. Chrétien |
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M. Day |
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M. Graham (Toronto-Centre—Rosedale) |
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Le Président |
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M. Day |
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Le Président |
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M. Graham (Toronto-Centre—Rosedale) |
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M. Duceppe |
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M. Chrétien |
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M. Duceppe |
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M. Chrétien |
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Mme Lalonde |
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M. Chrétien |
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Mme Lalonde |
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M. Chrétien |
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Mme McDonough |
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M. Chrétien |
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Mme McDonough |
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M. Chrétien |
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Le Protocole de Kyoto |
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M. Clark |
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M. Chrétien |
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M. Herron |
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M. Chrétien |
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Les finances |
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M. Penson |
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M. Manley |
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M. Penson |
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M. Manley |
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Le Protocole de Kyoto |
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M. Bigras |
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M. Chrétien |
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M. Bigras |
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M. Chrétien |
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Les dépenses publiques |
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M. Ritz |
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M. Goodale |
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M. Ritz |
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M. Goodale |
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La gestion de l'offre |
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M. Plamondon |
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M. Pettigrew |
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M. Plamondon |
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M. Pettigrew |
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Le Protocole de Kyoto |
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M. Mills (Red Deer) |
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M. Anderson (Victoria) |
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Le Président |
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M. Anderson (Victoria) |
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M. Mills (Red Deer) |
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M. Anderson (Victoria) |
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L'Irak |
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M. Bagnell |
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M. Graham (Toronto-Centre—Rosedale) |
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Le Président |
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Le bois d'oeuvre |
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M. Masse |
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M. Pettigrew |
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Les affaires étrangères |
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M. Robinson |
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M. Graham (Toronto-Centre—Rosedale) |
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Le Président |
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Le revenu national |
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M. Casey |
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Mme Caplan |
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M. Casey |
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Mme Caplan |
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La Garde côtière |
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M. Cummins |
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M. Thibault |
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 |
M. Cummins |
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 |
M. Thibault |
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Les marchés publics |
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M. Lanctôt |
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M. Goodale |
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 |
M. Lanctôt |
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M. Goodale |
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La sécurité aérienne |
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M. Moore |
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 |
M. Manley |
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 |
M. Moore |
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 |
M. Manley |
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Les affaires étrangères |
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M. Lastewka |
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M. Knutson (Elgin—Middlesex—London) |
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La frontière canado-américaine |
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Mme Meredith |
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Mme Caplan |
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Mme Meredith |
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M. Manley |
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Les infrastructures routières |
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M. Laframboise |
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M. Collenette |
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Les affaires autochtones |
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M. Pallister |
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M. Nault |
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Le bois d'oeuvre |
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M. Bergeron |
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M. Manley |
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AFFAIRES COURANTES
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Nominations par décret |
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M. Regan |
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Réponse du gouvernement à des pétitions |
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M. Regan |
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Les délégations interparlementaires |
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M. Price |
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M. Patry |
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M. Comuzzi |
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La Loi sur la protection des droits fondamentaux des dénonciateurs |
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 |
M. Grewal |
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 |
Adoption des motions; première lecture et impression du projet de loi
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 |
Le Président |
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La Loi canadienne sur la santé |
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M. Bélanger |
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 |
Adoption des motions; première lecture et impression du projet de loi
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 |
Le Président |
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 |
Loi sur la citoyenneté |
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M. Bryden |
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 |
Adoption des motions; première lecture et impression du projet de loi
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 |
Loi sur le système de justice pénale pour les adolescents |
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 |
M. Lunn |
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 |
Adoption des motions; première lecture et impression du projet de loi
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 |
La Loi sur les textes réglementaires |
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M. Grewal |
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 |
Le Président |
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 |
Adoption des motions; première lecture et impression du projet de loi
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The Speaker |
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Pétitions |
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La justice |
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Mme Chamberlain |
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La recherche sur les cellules souches |
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M. Elley |
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La défense nationale |
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M. Robinson |
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 |
La pornographie juvénile |
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 |
M. Robinson |
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La justice |
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M. MacKay |
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La recherche sur les cellules souches |
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 |
M. Peterson |
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La pornographie juvénile |
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 |
M. Peterson |
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 |
Le projet de loi C-15B |
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M. Peterson |
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La Justice |
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M. Peterson |
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M. Telegdi |
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 |
Le Président |
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M. Telegdi |
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La Société canadienne des postes |
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M. Lunn |
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La pornographie juvénile |
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Mme Meredith |
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Mme Longfield |
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 |
La recherche sur les cellules souches |
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 |
Mme Longfield |
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 |
La pornographie juvénile |
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 |
M. Jackson |
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 |
La recherche sur les cellules souches |
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 |
M. Grewal |
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Postes Canada |
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M. Grewal |
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La justice |
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M. Doyle |
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L'Irak |
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M. Adams |
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 |
La justice |
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 |
Mme Ur |
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La pornographie juvénile |
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Mme Ur |
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 |
M. Efford (Bonavista—Trinity—Conception) |
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La Garde côtière canadienne |
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M. Cummins |
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La justice |
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M. Hearn |
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M. Peric |
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La pornographie juvénile |
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 |
M. Pickard |
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La recherche sur les cellules souches |
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 |
M. Pickard |
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 |
Les affaires autochtones |
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 |
M. Pickard |
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 |
La pornographie juvénile |
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M. Bryden |
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La recherche sur les cellules souches |
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M. Bryden |
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Questions au Feuilleton |
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M. Regan |
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Le Président |
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Demandes de documents |
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M. Regan |
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Demande de débat d'urgence |
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Recherche et sauvetage |
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Le Président |
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M. Cummins |
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Le Président |
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INITIATIVES MINISTÉRIELLES
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 |
Le discours du Trône |
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Reprise du débat sur l'Adresse en réponse |
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Le Président |
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 |
M. Thompson (Nouveau-Brunswick-Sud-Ouest) |
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 |
M. Doyle |
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 |
M. Thompson (Nouveau-Brunswick-Sud-Ouest) |
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 |
M. Karygiannis |
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 |
M. Thompson (Nouveau-Brunswick-Sud-Ouest) |
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 |
M. Coderre |
|
 |
M. Forseth |
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 |
M. Coderre |
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 |
Le président suppléant (Mme Bakopanos) |
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 |
M. Karygiannis |
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 |
M. Reid |
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 |
Le président suppléant (Mme Bakopanos) |
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 |
M. Karygiannis |
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 |
M. Coderre |
|
 |
M. Robinson |
|
 |
M. Coderre |
|
 |
M. Crête |
|
 |
M. Coderre |
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 |
Le président suppléant (Mme Bakopanos) |
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 |
M. Crête |
|
 |
Le président suppléant (Mme Bakopanos) |
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 |
M. Forseth |
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 |
M. Merrifield |
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 |
Le président suppléant (Mme Bakopanos) |
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Les travaux de la Chambre |
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M. Boudria |
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 |
Le président suppléant (Mme Bakopanos) |
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Adoption de la motion
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Le discours du Trône |
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Reprise du débat sur l'Adresse en réponse |
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Mme Yelich |
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M. Merrifield |
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 |
M. Pickard |
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 |
Le président suppléant (Mme Bakopanos) |
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 |
M. Chatters |
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 |
M. Pickard |
|
 |
M. Hearn |
|
 |
M. Pickard |
|
 |
M. Schmidt |
|
 |
M. Pickard |
|
 |
M. Karygiannis |
|
 |
M. Chatters |
|
 |
M. Karygiannis |
|
 |
M. Hearn |
|
 |
M. Karygiannis |
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 |
M. Schmidt |
|
 |
M. Bagnell |
|
 |
Mr. Schmidt |
|
 |
M. Chatters |
|
 |
M. Schmidt |
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 |
Mme Ablonczy |
|
 |
M. Moore |
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 |
Mme Ablonczy |
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M. Hearn |
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 |
Mme Ablonczy |
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M. Easter |
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M. Cummins |
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M. Easter |
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 |
M. Robinson |
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Le président suppléant (M. Bélair) |
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M. Easter |
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Le président suppléant (M. Bélair) |
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M. Mitchell |
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Le président suppléant (M. Bélair) |
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(Division 1) |
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Le Président |
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Initiatives ministérielles
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L'Irak |
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M. Knutson (Elgin—Middlesex—London) |
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M. Goldring |
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M. Knutson (Elgin—Middlesex—London) |
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M. Peric |
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Mr. Knutson (Elgin—Middlesex—London) |
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 |
M. Jaffer |
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 |
M. Knutson (Elgin—Middlesex—London) |
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M. Dubé |
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Mme Bulte |
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M. Kenney |
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Mme Bulte |
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M. MacKay |
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Mme Bulte |
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M. Kenney |
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Mme Carroll |
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 |
M. Kenney |
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M. Bagnell |
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 |
M. Kenney |
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M. Moore |
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 |
M. Kenney |
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M. Harvard |
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M. Kenney |
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M. Lincoln |
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M. Jaffer |
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M. Lincoln |
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M. MacKay |
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 |
M. Lincoln |
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M. Bergeron |
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M. MacKay |
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M. Bergeron |
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M. Rajotte |
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M. Bergeron |
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Mme Catterall |
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M. Vellacott |
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Mme Catterall |
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M. Crête |
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Mme Catterall |
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Mme Gallant |
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Le président suppléant (M. Bélair) |
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Mme Catterall |
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M. Jaffer |
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 |
M. Epp |
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M. Jaffer |
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M. Bagnell |
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M. Jaffer |
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M. McKay |
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M. Benoit |
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 |
M. McKay |
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 |
M. Vellacott |
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 |
M. McKay |
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M. Crête |
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M. Goldring |
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 |
Le président suppléant (M. Bélair) |
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 |
M. Crête |
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M. Caccia |
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 |
M. Benoit |
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 |
M. Caccia |
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M. Martin (Esquimalt—Juan de Fuca) |
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 |
M. Caccia |
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Le président suppléant (M. Bélair) |
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 |
M. Martin (Esquimalt—Juan de Fuca) |
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 |
M. Bagnell |
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 |
M. Martin (Esquimalt—Juan de Fuca) |
|
 |
M. Kenney |
|
 |
Le président suppléant (M. Bélair) |
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 |
M. Martin (Esquimalt—Juan de Fuca) |
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M. Paquette |
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 |
M. Kenney |
|
 |
Le président suppléant (M. Bélair) |
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 |
M. Paquette |
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Mme Redman |
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M. Thompson (Wild Rose) |
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Mme Redman |
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Mme Carroll |
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Mme Redman |
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Mme Gallant |
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M. Bagnell |
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 |
Mme Gallant |
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M. Stinson |
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Mme Gallant |
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M. Thompson (Wild Rose) |
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Mme Fry |
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M. Kenney |
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 |
Mme Fry |
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M. Stinson |
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 |
Mme Fry |
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M. Comartin |
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M. Kenney |
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 |
Mr. Comartin |
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Mme Fry |
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M. Comartin |
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M. Kilger |
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M. Blaikie |
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 |
M. Bagnell |
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M. Blaikie |
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M. Kenney |
|
 |
M. Blaikie |
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 |
M. Mark |
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 |
M. Bagnell |
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 |
M. Mark |
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M. Wilfert |
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M. Kenney |
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Mr. Wilfert |
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Le vice-président |
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M. Goldring |
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M. Cotler |
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M. Kenney |
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M. Cotler |
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Le vice-président |

CANADA
| Débats de la Chambre des communes |
COMPTE RENDU OFFICIEL (HANSARD)
Le mercredi 2 octobre 2002
Présidence de l'honorable Peter Milliken
La séance est ouverte à 14 heures.
Prière
[Article 31 du Règlement]
* * *
(1400)
[Traduction]

Le Président:
Comme nous avons l'habitude de le faire le mercredi, nous allons maintenant chanter l'hymne national sous la direction du député de Fraser Valley.
[Note de la rédaction: Les députés chantent l'hymne national.]
DÉCLARATIONS DE DÉPUTÉS
[Article 31 du Règlement]
* * *
[Traduction]
L'environnement


Mme Beth Phinney (Hamilton Mountain, Lib.):
Monsieur le Président, hier, à la Chambre, le premier ministre du Canada a réitéré l'intention du gouvernement de ratifier le Protocole de Kyoto sur le changement climatique d'ici à la fin de cette année.
L'accord a un fort appui chez les Canadiens. La semaine dernière, la Ville de Hamilton s'est jointe à des municipalités de tout le pays, de Kelowna et Canmore à Saint John et Pictou, et a déclaré publiquement son appui à la ratification de l'accord de Kyoto.
Le maire de Hamilton, Bob Wade, et le conseil municipal ont reconnu qu'il était important de prendre un engagement à l'égard de l'environnement durable et de ratifier maintenant le Protocole de Kyoto. La Ville de Hamilton a confiance dans la capacité du gouvernement d'élaborer un plan d'action équitable.
Je félicite la Ville de Hamilton pour son engagement. Le gouvernement fédéral compte bien collaborer avec ses partenaires à la mise en oeuvre des principes de l'accord de Kyoto.
* * *

Le bois d'oeuvre


M. Gary Lunn (Saanich—Gulf Islands, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, l'héritage du premier ministre se résume à des épreuves pour les travailleurs du secteur du bois d'oeuvre. Des droits compensateurs demeurent en place et chaque jour, les travailleurs forestiers de la Colombie-Britannique font face à un avenir incertain.
Si le premier ministre veut léguer un héritage, il devrait défendre les gens laborieux de notre pays. Nous en avons assez d'entendre parler des progrès réalisés, mais de ne pas voir de résultats concrets. Les libéraux sont restés les bras croisés pendant que le problème s'éternisait.
L'opposition officielle exerce depuis des mois des pressions sur le gouvernement pour qu'il appuie nos travailleurs déplacés. Nous sommes les seuls à avoir forgé des alliances avec des associations de consommateurs aux États-Unis. C'est nous qui avons essayé de réparer les torts que le premier ministre a causés à nos relations avec la présidence américaine. C'est nous qui défendons avec vigueur notre position au sein de l'ALENA et de l'OMC.
L'Alliance canadienne laisserait un héritage consistant en une économie forte, des emplois pour les Canadiens ordinaires et un commerce libre et équitable avec les États-Unis dans le secteur du bois d'oeuvre.
La seule chose que le gouvernement fasse pour les travailleurs forestiers, c'est de les acculer au chômage.
* * *
[Français]

L'American Hellenic Educational Progressive Association


Mme Raymonde Folco (Laval-Ouest, Lib.):
Monsieur le Président, à travers le temps, les timbres-poste ont eu une grande importance dans notre vie. Ils nous ont permis de garder le contact avec les êtres chers par le biais de nos correspondances, peu importe l'endroit où ils vivent.
Les timbres marquent notre vie et notre histoire. Voilà quelques jours, Postes Canada a annoncé l'émission de nouveaux timbres s'inscrivant dans le cadre de son programme des timbres commémoratifs.
Ce programme souligne les grandes réalisations et les grands anniversaires qui ont façonné le Canada tel que nous le connaissons aujourd'hui. Dans cette optique, je suis fière de constater qu'un timbre viendra prochainement souligner le 75e anniversaire de l'American Hellenic Educational Progressive Association du Canada. L'AHEPA est une organisation gréco-canadienne qui travaille à favoriser une compréhension mutuelle des deux cultures grecque et canadienne et à encourager ses membres de participer à la vie civique et commerciale de la société canadienne.
Je tiens donc à féliciter l'American Hellenic Educational Progressive Association du Canada pour le travail et les efforts qu'elle déploie depuis plus de 75 ans.
* * *

(1405)

Eaux Vives Harricana


M. Guy St-Julien (Abitibi—Baie-James—Nunavik, Lib.):
Monsieur le Président, Eaux Vives Harricana lance la marque d'eau de source Esker, un produit haut de gamme destiné à l'exportation.
Eaux Vives Harricana a commencé les expéditions de sa fameuse eau de source Esker, embouteillée à Saint-Mathieu d'Harricana, en Abitibi.
Selon le vice-président, Ghislain Gauthier, la marque Esker est protégée dans 85 pays.
L'ouverture officielle de l'usine d'Harricana a eu lieu le mercredi le 18 septembre dernier en présence de plusieurs invités, dont le président de Parmalat d'Amérique du Nord, M. Michael Rosiski.
Le gouvernement du Canada est fier de constater qu'il est possible de réaliser des projets qui contribuent à diversifier l'économie de l'Abitibi-Témiscamingue. Il est également fier de voir que des entreprises comme Parmalat partagent la confiance des gens d'affaires d'ici, particulièrement les investisseurs d'Amos qui ont cru en ce projet.
* * *
[Traduction]

Jour commémoratif national


M. Lynn Myers (Waterloo—Wellington, Lib.):
Monsieur le Président, je rends aujourd'hui hommage aux policiers et aux agents de la paix, particulièrement ceux qui sont morts dans l'exercice de leurs fonctions. Nous sommes de tout coeur avec leur familles et amis, et, unis par leur souvenir, nous les assurons que nous n'oublierons jamais le sacrifice qu'ils ont fait.
Dimanche dernier, des milliers de Canadiens se sont réunis sur la colline parlementaire pour rendre hommage à ces officiers et agents de la paix. Cet important service commémoratif donne aux Canadiens l'occasion d'exprimer leur appréciation aux policiers et aux agents de la paix qui risquent leur vie chaque jour pour assurer la sécurité des collectivités.
Nous remercions tous les policiers et agents de la paix de leur dévouement, de leur courage, de leur bravoure et de leur sacrifice. Nous sommes reconnaissants pour tout ce qu'ils font pour le Canada et les Canadiens.
* * *

La campagne Hay West


Mme Carol Skelton (Saskatoon—Rosetown—Biggar, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, voici la deuxième année consécutive que les familles d'agriculteurs des Prairies regardent leurs récoltes et leurs pâturages se dessécher et la poussière souffler autour d'eux à cause de la sécheresse qui continue d'affecter la plus grande partie de la région céréalière du Canada.
Lorsqu'un groupe de nos voisins agriculteurs des provinces de l'Est ont été mis au courant de la sécheresse qui sévit dans les Prairies, ils ont décidé d'aider. C'est ainsi qu'a vu le jour la campagne de collecte de foin pour les agriculteurs de l'Ouest «Hay West». Nombre de personnes méritent des remerciements pour leur contribution à cette campagne, mais les organisateurs de cette initiative méritent une reconnaissance toute particulière.
J'ai eu le plaisir de rencontrer deux des organisateurs de la campagne Hay West, en l'occurrence Willard McWilliams et le conseiller municipal de Cumberland, Phil McNeely. Ces deux citoyens ont consacré de nombreuses heures de leur temps ainsi que des ressources personnelles pour la coordination de la collecte des milliers de tonnes de foin destinées aux agriculteurs de l'Ouest. Ils ont accepté une énorme tâche avec bonne volonté et par générosité de coeur.
Au nom des électeurs de Saskatoon—Rosetown--Biggar, et, bien sûr, de tous les bénéficiaires de ce foin fort nécessaire, je désire féliciter les organisateurs de la campagne Hay West et leur offrir nos remerciements sincères.
* * *

Le député de Haldimand—Norfolk—Brant


Mme Sarmite Bulte (Parkdale—High Park, Lib.):
Monsieur le Président, en ma qualité de présidente de la section fédérale de l'Association parlementaire du Commonwealth, je tiens à féliciter le député de Haldimand—Norfolk—Brant pour son élection à la présidence du comité exécutif de l'Association, à l'occasion de la 48e conférence de celle-ci tenue en septembre à Windhoek, en Namibie.
Plus de 225 députés provenant d'environ 135 parlements et assemblées législatives du Commonwealth ont participé au scrutin, auquel s'étaient présentés trois autres candidats.
Le député de Haldimand—Norfolk—Brant est le premier député fédéral canadien à occuper ces fonctions. Il préside aussi à l'heure actuelle le Groupe de travail du caucus libéral sur les voies de l'avenir dans l'agriculture, mis sur pied par le premier ministre.
Son élection était aussi une façon de reconnaître le rôle important joué par le Canada au sein du Commonwealth ainsi que dans la communauté internationale, et de souligner les valeurs canadiennes.
Je prie la Chambre de se joindre à moi pour féliciter notre collègue.
* * *
[Français]

L'entreprise Caoutchouc Crosston


Mme Pauline Picard (Drummond, BQ):
Monsieur le Président, après avoir salué l'investissement des Industries WorldBest, je suis heureuse de vous faire part de l'implantation d'une deuxième entreprise chinoise à Drummondville, et du même coup la deuxième au Canada, Caoutchouc Crosston.
L'entreprise investit 2,5 millions de dollars cette année et un autre montant de deux millions l'an prochain pour la création de 35 emplois. À son usine drummondvilloise, Caoutchouc Crosston fabriquera un produit unique au Canada.
C'est lors d'une mission économique en Chine, menée par la Société de développement économique de Drummondville, que ce projet a pris naissance. La disponibilité de la SDED et la persévérance des acteurs économiques de la région de Drummond ont encore porté fruits.
Je veux donc féliciter le directeur général de la SDED, Martin Dupont, et souhaiter la bienvenue aux Chinois qui viendront s'installer temporairement à Drummondville pour le démarrage de cette entreprise.
* * *

(1410)
[Traduction]

Les aires marines de conservation


M. Peter Adams (Peterborough, Lib.):
Monsieur le Président, en septembre 2000 était ouverte la première aire marine protégée au Canada, Xwa Yen, à Race Rocks, en Colombie-Britannique. L'année suivante, en 2001, la Chambre adoptait une loi concernant les aires marines de conservation au Canada.
Le discours du Trône de 2002 a annoncé la création de nouvelles aires marines de conservation et de nouveaux parcs nationaux.
Le Canada, qui compte pourtant depuis un bon moment sur un magnifique système de parcs nationaux pour protéger certains territoires, a tardé à désigner des aires protégées dans nos trois océans.
Les Canadiens sont responsables des aires protégées dans trois océans qui couvrent une superficie équivalant à 50 p. 100 de notre masse terrestre. C'est une responsabilité énorme que l'on doit prendre très au sérieux.
Ce mois-ci, célébrons l'anniversaire de la création de notre première aire marine protégée et réjouissons-nous du discours du Trône qui prévoit une expansion des aires protégées sur terre comme en mer.
* * *

Les affaires autochtones


M. Brian Pallister (Portage—Lisgar, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, comme on le sait tous, ne pas tirer leçon de ses erreurs est la recette parfaite pour vivre en état permanent de frustration. Le discours du Trône a laissé bien des Canadiens dans un tel état de frustration à l'égard du gouvernement.
Depuis 25 ans, on essaie de régler les problèmes autochtones en injectant des sommes de plus en plus importantes, mais le degré de frustration a atteint un niveau effarant. Selon les chiffres par habitant, le gouvernement fédéral consacre maintenant aux programmes destinés spécifiquement aux autochtones plus de huit fois ce qu'il injectait dans ces programmes en 1973; pourtant la dépendance à l'égard de l'aide sociale et les problèmes qu'elle entraîne, comme la médiocrité de la santé, la faible scolarisation, les crimes et les suicides, ne semblent pas vouloir régresser.
Cette semaine, le discours du Trône a promis encore la même chose. On ne peut pas dire que ce soit magnanime. Augmenter le financement d'anciennes approches inefficaces témoigne d'un manque flagrant de commisération.
Les solutions à long terme ne viendront que si l'on procède à des réformes en profondeur qui renforceront l'autonomie des communautés autochtones en habilitant les peuples autochtones.
* * *

Le Sri Lanka


M. Irwin Cotler (Mont-Royal, Lib.):
Monsieur le Président, alors que nous discutons de la situation en Irak, un événement historique se déroule sans que les grands titres n'en fassent état et je suis fort heureux de le souligner en cette journée d'anniversaire du Mahatma Gandhi. Je parle de l'instauration d'un processus de paix au Sri Lanka, après 19 années d'un conflit tragique qui a laissé 65 000 morts, 1,5 million de personnes déplacées, 12 000 personnes disparues et une catastrophe humaine inimaginable.
Cette démarche historique a été soulignée la semaine dernière par la coalitionquébécoise pour la paix au Sri Lanka, dont le siège social se trouve dans ma circonscription; elle a tenu une cérémonie émouvante où les diverses communautés d'expatriés sri-lankais se sont réunies pour la première fois en 19 ans.
Le Canada a un rôle important à jouer dans ce processus de paix; nous devons faire profiter ce pays de notre expérience en politique fédérale de multiculturalisme et de bilinguisme et en élaboration de charte des droits; nous devons contribuer à l'effort de déminage pour sauver des vies et prévenir les mutilations; nous devons appuyer les mesures de renforcement de la confiance qui sous-tendent le processus de paix et mobiliser les forces de soutien et d'investissement des bailleurs de fonds.
* * *

Le logement


Mme Libby Davies (Vancouver-Est, NPD):
Monsieur le Président, que vaut un discours du Trône? Est-ce que les promesses au sujet du logement se traduiront concrètement par des logements abordables pour les deux millions de Canadiens qui en ont besoin?
Est-ce que les promesses recyclées censées régler le problème de l'accroissement de la pauvreté donnent à manger aux cinq millions de Canadiens qui souffrent depuis dix ans d'un engagement libéral qui ne compte pour rien?
Je pose ces questions parce que ce sont celles que se posent les 200 personnes qui campent dans des tentes autour d'un immeuble désaffecté, l'immeuble Woodward, à Vancouver. Ce sont aussi ces questions que les 125 itinérants expulsés d'un refuge pour itinérants à Toronto se sont posées. Ce nouveau discours du Trône leur procure un bien piètre réconfort.
Les promesses politiques qui sont censées aider les pauvres alors qu'elles ne se concrétisent jamais constituent la pire forme d'exploitation politique.
Aujourd'hui, le Nouveau Parti démocratique presse le premier ministre d'honorer ses engagements. Il devrait commencer par reconnaître les préjudices que son gouvernement a fait subir aux plus vulnérables dans notre société.
* * *
[Français]

Le discours du Trône


M. Yvan Loubier (Saint-Hyacinthe—Bagot, BQ):
Monsieur le Président, lors du discours du Trône, le premier ministre a raté une belle occasion de laisser sa marque et surtout de corriger le tir dévastateur qu'il a dirigé contre les chômeurs et les personnes malades.
Alors que le système de santé croule, aucune annonce concrète ne viendra les soulager à court terme et les milliers de chômeurs en marge du régime devront attendre, car rien n'est prévu pour eux dans ce testament. Pour le premier ministre, le déséquilibre fiscal n'est qu'une vision de l'esprit et non une distorsion vicieuse d'un régime qui contribue à appauvrir la population.
En prime le premier ministre nous offre ce qui a caractérisé ses 40 ans de vie politique: des chicanes avec Québec. Après l'éducation par l'entremise des Bourses du millénaire, il persiste et signe par l'annonce d'un Sommet national sur l'innovation et l'apprentissage, annonçant du même coup un envahissement du domaine des valeurs mobilières.
Les bonnes intentions de ce discours du Trône sont entachés des gestes des neuf dernières années et de la volonté du premier ministre d'en découdre une dernière fois avec le Québec.
* * *

(1415)
[Traduction]

Le Mois de l'histoire des femmes


M. Gurbax Malhi (Bramalea—Gore—Malton—Springdale, Lib.):
Monsieur le Président, je suis ravi d'intervenir aujourd'hui en reconnaissance du rôle important que les femmes ont joué dans l'histoire de notre nation.
Le mois d'octobre offre aux Canadiens l'occasion de célébrer la contribution des femmes dans l'histoire du Canada et de saluer leur participation à notre patrimoine.
Le thème choisi cette année est «Championnes un jour, championnes toujours! Les femmes et le sport».
Je tiens à souligner les exploits de nos athlètes féminines qui ont remporté plusieurs médailles aux Jeux olympiques d'hiver, aux Jeux paralympiques et aux Jeux du Commonwealth au cours de la dernière année.
Je salue leur succès, je salue aussi la réussite de nombreuses autres athlètes féminines et j'encourage les jeunes espoirs à demeurer actifs et à promouvoir les bienfaits de la participation à des épreuves sportives.
* * *

La justice


M. Peter MacKay (Pictou—Antigonish—Guysborough, PC):
Monsieur le Président, la décision du gouvernement libéral de revoir la politique du Canada en matière de déportation des criminels de guerre est moralement abjecte.
L'âge ne constitue pas une bonne raison pour empêcher la poursuite en justice d'individus ayant commis des crimes contre l'humanité. Justice doit être rendue. Nous le devons à la mémoire des victimes et des survivants qui ont subi des atrocités inimaginables.
Quel message envoyons-nous aux centaines de milliers de familles victimes du bain de sang nazi, si nous accueillons les criminels de guerre à bras ouverts au Canada et que nous leur permettons de se prévaloir des avantages de notre démocratie?
Quel message envoyons-nous si nous indiquons que les poursuites en justice sont trop onéreuses et prennent trop de temps? La justice n'est pas toujours bon marché ou rapide.
Quel message transmettons-nous aux générations futures si nous fermons les yeux sur des actes de barbarisme? Nous avons l'obligation de nous souvenir, mais aussi, et c'est le plus important, de veiller à ce que justice soit rendue.
Par respect pour les victimes, je demande au gouvernement de manifester l'engagement et le courage voulus pour poursuivre les criminels de guerre, les traîner en justice et les punir.
* * *

Le premier ministre


Mme Carolyn Bennett (St. Paul's, Lib.):
Monsieur le Président, au nom de tous les Canadiens, je suis très fière de féliciter aujourd'hui le premier ministre qui a reçu de la Fondation Appeal of Conscience le World Statesman Award de cette année, le prix des chefs d'État.
[Français]
Le premier ministre était à Manhattan hier soir pour accepter ce prix prestigieux.
[Traduction]
Ce prix lui a été décerné en reconnaissance de son initiative visant l'élaboration d'un nouveau plan économique pour l'Afrique, notamment lors du Sommet du G-8 qui a eu lieu à Kananaskis cet été.
La Fondation oeuvre pour le respect de la liberté de religion et des droits de l'homme dans le monde. Ce prix est décerné une fois l'an pour encourager la compréhension mutuelle, la paix et la tolérance. Il atteste de la vision du premier ministre et de sa capacité de rallier le consensus sur cette initiative extrêmement importante.
[Français]
Les autres récipiendaires de ce prix sont Mikhaïl Gorbatchev et Vaclav Havel.

QUESTIONS ORALES
[Questions orales]
* * *
[Traduction]

L'Irak


M. Stephen Harper (chef de l'opposition, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, au cours des dernières semaines, la position du gouvernement à l'égard de l'Irak a manqué de clarté et a même changé. Donc, pour que tout soit bien clair en ce qui a trait à la menace irakienne, le gouvernement accepte-t-il maintenant les rapports des services de sécurité des États-Unis, du Royaume-Uni et d'autres pays, y compris le SCRS, selon lesquels Saddam Hussein représente une menace sérieuse à la sécurité internationale, a mis au point des armes de destruction massive, soit des armes chimiques, biologiques et nucléaires, et est prêt à utiliser ces armes contre ses voisins?


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, nous savons que Saddam Hussein est un chef terrible pour son pays. Il a attaqué l'Iran et le Koweit et a utilisé des armes de destruction massive contre son propre peuple.
Cependant, nous avons toujours été d'avis que, pour faire avancer ce dossier, nous avions besoin d'une nouvelle résolution des Nations Unies qui soit plus claire que la précédente afin de nous assurer que les inspecteurs seront capables d'aller là-bas et de faire leur travail et que, si Saddam Hussein possède ce genre d'armes de destruction massive, celles-ci seront détruites, comme il avait accepté de le faire après la guerre au Koweit.


M. Stephen Harper (chef de l'opposition, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, je crois que le premier ministre a fait du chemin depuis le temps où il disait qu'il avait besoin de preuves.
On voit aussi des signaux contradictoires de la part du gouvernement pour ce qui est de sa volonté de prendre des mesures contre l'Irak. Donc, pour que tout soit bien clair, le gouvernement est-il maintenant en train de dire qu'il se range du côté de la coalition des alliés, soit les États-Unis, le Royaume-Uni, l'Australie et d'autres, exigeant qu'il y ait des conséquences claires pour Saddam Hussein si ce dernier choisit de ne pas se conformer aux résolutions des Nations Unies?

(1420)


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, c'est exactement ce que nous disons depuis des semaines. Notre position a été très claire. Nous avons dit que nous devions agir dans le cadre des Nations Unies et qu'il était très important de donner de la crédibilité à toute intervention là-bas en lui donnant un caractère international. Nous ne croyons pas dans l'unilatéralisme. Nous croyons dans le multilatéralisme. Tous les membres de la coalition doivent travailler ensemble pour voir à ce que des armes de ce genre ne soient pas utilisées contre son propre peuple ou contre les pays voisins.


M. Stephen Harper (chef de l'opposition, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, dans tout cela, le premier ministre a négligé de préciser s'il travaillait avec nos alliés ou non. Je vais donc poser la question différemment.
Hier soir, à la Chambre, le ministre de la Défense a laissé entendre que la politique américaine à l'égard de l'Irak n'était pas fondée sur des règles ni conforme au droit international. Il a comparé la politique américaine à la loi de la jungle. Pour que tout soit bien clair, est-ce là la façon dont le gouvernement voit l'approche adoptée par les Américains à l'égard de l'Irak?


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, dans les nombreuses discussions que j'ai eues avec le président Bush, j'ai toujours insisté pour dire que les Américains devraient passer par les Nations Unies et faire adopter d'autres résolutions. C'est d'ailleurs la position prise par d'autres leaders.
Lorsque j'ai discuté de cette question avec le premier ministre de la Grande-Bretagne en Afrique du Sud, nous avons parlé du besoin de passer par les Nations Unies. C'est le message que M. Blair a donné au président. Lorsque j'ai rencontré le président le lundi, il était évident que, le jeudi, il demanderait aux Nations Unies d'adopter une résolution ferme, claire et efficace.


M. Stockwell Day (Okanagan—Coquihalla, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, la liberté d'expression est un merveilleux principe, surtout lorsqu'il est appliqué par les libéraux.
Hier soir, par exemple, dans le cadre du débat sur l'Irak, le souhait exprimé par le président Bush de voir une alliance des nations résister à Saddam Hussein a été comparé à la stratégie utilisée par les nazis au cours de la Seconde Guerre mondiale. Permettez-moi de citer les propos de la députée: «[...] Bush insulte la mémoire des soldats de la Seconde Guerre mondiale...»
Cela correspond-il à la position du gouvernement?


L'hon. Bill Graham (ministre des Affaires étrangères, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai pu assister hier soir à l'ensemble du débat important que tenait la Chambre. Il m'a semblé évident que tous les députés cherchaient à analyser ce problème extraordinaire et à y trouver une solution.
Les analogies faites par les députés de ce côté-ci de la Chambre tendaient à montrer que si nous optons pour l'unilatéralisme et si nous choisissons de lancer une attaque qui pourrait, dans les circonstances, être considérée comme une agression, nous insulterions la mémoire de ceux qui, par le passé, ont su résister à la répression. C'est une position fort valable qui est conforme au droit international. Elle est conforme...


Le Président:
Le député d'Okanagan—Coquihalla a la parole.


M. Stockwell Day (Okanagan—Coquihalla, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, ce n'est pas ce qui a été dit. Je suis déçu de constater que le ministre ne se distancie pas des propos tenus par ces libéraux, car cela devient plus sérieux.
Selon une autre comparaison qui a été faite, toute action alliée menée contre Saddam Hussein serait comparable à l'invasion de Pearl Harbour par les Japonais. Est-ce bien là la position du gouvernement?


Le Président:
Le ministre des Affaires étrangères a la parole.
Des voix: Oh, oh!
Le Président: À l'ordre, s'il vous plaît. Il y a d'abord les questions, puis les réponses. Nous devons écouter les deux. Le ministre des Affaires étrangères a la parole.


L'hon. Bill Graham (ministre des Affaires étrangères, Lib.):
Monsieur le Président, cela ne correspond pas plus à la position de notre parti qu'aux propos tenus par notre collègue à la Chambre. La députée a affirmé que nous pourrions ne pas nous associer à des attaques perçues comme des agressions.
Nous avons consacré beaucoup de temps à établir cette position, tout comme le chef de l'opposition. Nous avons créé un ordre mondial qui résiste à l'agression. Notre parti et notre pays estiment que nous devons collaborer avec les Nations Unies, comme l'a dit le premier ministre, pour faire régner un ordre mondial qui s'oppose aux agressions.
[Français]


M. Gilles Duceppe (Laurier—Sainte-Marie, BQ):
Monsieur le Président, le président Bush est parvenu aujourd'hui à un accord bipartisan afin de présenter une résolution au Congrès américain, lui permettant d'intervenir unilatéralement en Irak hors du cadre des Nations Unies.
Comme le premier ministre a dit hier qu'il appuyait la position américaine, peut-il nous dire aujourd'hui s'il fera savoir au président Bush que jamais le Canada n'appuiera les États-Unis dans une intervention unilatérale, que le Congrès américain le permette ou non?

(1425)


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, il y a évidemment un débat qui a cours présentement au Congrès américain, aux États-Unis, et il y aura une résolution de support ou de non-support au président. C'est une question intérieure aux États-Unis.
La position du Canada est toujours la même. S'il doit y avoir une intervention en Irak, il faudra une résolution des Nations Unies. S'il y a une résolution des Nations Unies qui est claire et qui indique clairement que tous les membres ayant participé dans les coalitions antérieures veulent participer, le Canada participera, seulement si nous avons l'appui du Conseil de sécurité.


M. Gilles Duceppe (Laurier—Sainte-Marie, BQ):
Monsieur le Président, le premier ministre, en appuyant la position américaine, dans le cadre des résolutions des Nations Unies, comme il l'a fait hier, se rend-il compte qu'il retarde le travail des inspecteurs des Nations Unies en Irak, qu'il sème la division au sein du Conseil de sécurité, alors que l'accord et l'unanimité n'ont pas été faciles à obtenir, et qu'il cautionne les propos inqualifiables du porte-parole de la Maison-Blanche, hier, qui évoquait la possibilité d'assassinat sélectif?


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, nous souhaitons que les inspecteurs retournent le plus tôt possible en Irak et y fassent leur travail, mais nous sommes aussi d'accord qu'il faut une nouvelle résolution pour indiquer clairement quel travail doit être fait et dans quels délais les rapports doivent être faits aux Nations Unies.
Il y a déjà des résolutions. S'ils veulent respecter les anciennes résolutions, je n'ai rien contre cela, mais ils devront aussi respecter celle qui sera éventuellement adoptée, nous l'espérons, au Conseil de sécurité.


Mme Francine Lalonde (Mercier, BQ):
Monsieur le Président, le premier ministre a affirmé que la mise en oeuvre du Protocole de Kyoto était si importante qu'elle ferait l'objet d'un vote à la Chambre. Que dire alors de la guerre et de l'envoi de troupes? Ce sont aussi des sujets importants qui justifient que le gouvernement obtienne au préalable le feu vert de la Chambre, avant d'entreprendre quelque action militaire que ce soit contre l'Irak.
Est-ce que le premier ministre peut nous assurer que les parlementaires de cette Chambre seront appelés à se prononcer par un vote avant que le Canada n'entreprenne des actions militaires dirigées contre l'Irak?


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, il y a présentement un débat sur ce sujet, ici même, à la Chambre des communes. Il a eu lieu hier et se poursuivra aujourd'hui.
Dans l'éventualité où nous aurions besoin d'actions nouvelles, nous reviendrons devant la Chambre, comme nous l'avons fait hier soir.


Mme Francine Lalonde (Mercier, BQ):
Monsieur le Président, même si déclarer la guerre et envoyer des troupes à l'étranger peut relever de la seule compétence du gouvernement, la même logique s'appliquerait aussi à Kyoto. Or, le premier ministre trouve Kyoto si important qu'il demande un vote de la Chambre.
Pourquoi, alors, ne pas soumettre une question comme la guerre et l'envoi de troupes aux représentants de la population que sont les députés?


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, nous avons suivi les règles de la Chambre des communes, et à plusieurs reprises depuis que je suis premier ministre, il y a toujours eu des débats ici à la Chambre des communes. Ce fut le cas lorsque nous sommes allés en Afghanistan, ce fut le cas lorsque nous sommes allés au Kosovo et je pense que la procédure qui a été suivie était adéquate à l'époque comme elle le sera normalement dans le futur.
[Traduction]


Mme Alexa McDonough (Halifax, NPD):
Monsieur le Président, ma question s'adresse au premier ministre.
Les États-Unis ont proposé au Conseil de sécurité une nouvelle résolution autorisant une invasion de l'Irak si ce pays ne se plie pas aux exigences américaines. Même si le texte de la résolution n'a pas encore été rendu public, le premier ministre dit qu'il l'appuie.
Le premier ministre pourrait-il nous dire quelle est exactement la teneur de la résolution? Sinon, pourquoi donne-t-il ainsi carte blanche aux États-Unis?


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, il n'y a pas de résolution. On discute à l'heure actuelle pour déterminer en quoi devrait consister la prochaine résolution. Nous disons que nous avons besoin d'une nouvelle résolution qui doit être approuvée par le Conseil de sécurité. Les membres du Conseil de sécurité discutent de ce que devait être son libellé. Nous ne sommes pas membres de cet organisme. La résolution n'existe pas encore.
Le Conseil de sécurité tente d'en élaborer une. Nous nous accordons avec d'autres gouvernements pour dire qu'une nouvelle résolution s'impose. Les Américains sont d'accord sur ce point, comme les Britanniques et les Français. Il s'agit maintenant d'établir le libellé de la résolution. Quand nous le connaîtrons, nous nous prononcerons sur la résolution. Une nouvelle résolution s'impose, et on y travaille en ce moment même.


Mme Alexa McDonough (Halifax, NPD):
Monsieur le Président, dans le livre rouge de 1993, les libéraux ont promis que leur gouvernement taillerait au Canada un rôle plus indépendant à l'égard des États-Unis, «sans faire du suivisme».
Que voyons-nous à la place? Un gouvernement qui soutient les menaces d'assassinat et les stratégies de type solution magique. Est-ce vraiment là l'héritage que le premier ministre veut nous léguer?

(1430)


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, c'est toujours comme ça quand on ne tient pas compte de tous les faits. Le chef de l'opposition m'a vivement reproché certaines déclarations que j'avais faites à propos de la situation. Or, plusieurs propos que j'ai tenus au cours de mon entrevue avec la CBC ont été repris la semaine dernière par le président Bush lui-même.
Nous avons là une autre interprétation élastique de la part du chef du NPD, qui ne s'est pas donné la peine d'examiner les faits. Le Canada a une position extrêmement solide qui a trouvé un appui chez beaucoup de gens qui auparavant n'appuyaient pas ce genre de position.
* * *

Le Protocole de Kyoto


Le très hon. Joe Clark (Calgary-Centre, PC):
Monsieur le Président, ma question s'adresse au premier ministre.
L'ex-premier ministre Lougheed a fait remarquer que si le gouvernement fédéral a le pouvoir de ratifier le Protocole de Kyoto, il pourrait ne pas avoir celui de le mettre en oeuvre.
Le gouvernement du Canada a-t-il obtenu un avis juridique officiel attestant que le gouvernement fédéral, agissant seul, a le pouvoir constitutionnel de mettre en oeuvre les obligations qui incombe au Canada aux termes du Protocole de Kyoto? Dans l'affirmative, le premier ministre accepterait-il de déposer cet avis juridique au Parlement aujourd'hui?


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, c'est une obligation internationale que peut remplir le gouvernement canadien. Telle est notre position depuis des années. La mise en oeuvre est toujours faite au Canada.
Nous avons deux paliers de gouvernement, et nous parvenons toujours à remplir nos obligations internationales en collaboration avec les provinces et le secteur privé au Canada. Ce sera la même chose avec le Protocole de Kyoto.


M. John Herron (Fundy—Royal, PC):
Monsieur le Président, hier, le ministre de l'Environnement a dit à la Chambre que le Canada atteindrait les cibles visées par le Protocole de Kyoto. Or, dans La Presse d'hier, le ministre a dit que le Canada ratifierait sans doute le protocole, mais qu'il pourrait ne pas atteindre les cibles. La société Enron confiait sa comptabilité à Andersen Accounting, et on sait ce qui lui est arrivé.
Le premier ministre est-il prêt à demander à la Chambre de voter sur une cible que, de l'aveu même de son ministre, le gouvernement n'a pas l'intention d'atteindre?


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, les cibles sont bien connues, et nous avons dix ans pour les atteindre. Dans le passé, nous avons pris des mesures pour lutter contre des choses comme les pluies acides. C'était censé être un épineux problème, et nous l'avons réglé à un coût moindre que prévu, et tout le monde était content.
La même chose s'est produite il y a quelques années avec le plomb dans l'essence. Tout le monde disait que si on forçait l'industrie à retirer le plomb de l'essence, cela entraînerait l'effondrement de l'industrie. Or, il n'y a plus de plomb dans l'essence et les pétrolières n'ont pas été ruinées.
* * *

Les finances


M. Charlie Penson (Peace River, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, le premier ministre a promis beaucoup de dépenses dans le discours du Trône de lundi. Or, il n'a pas similairement promis de ne pas toucher aux impôts. Il a même laissé entendre hier qu'il se pourrait qu'il les augmente pour financer les soins de santé. Au lieu d'envisager de hausser les taxes comme la TPS ou toute autre taxe spécialement affectée à la santé, le gouvernement doit maîtriser son penchant malsain pour les dépenses.
Le ministre des Finances va-t-il assurer aux Canadiens qu'il ne haussera pas les impôts pour financer toutes ces promesses, et va-t-il déposer cet automne un budget expliquant ses plans?


L'hon. John Manley (vice-premier ministre et ministre des Finances, Lib.):
Monsieur le Président, le gouvernement a pour habitude de diminuer les impôts.
En fait, l'annonce que nous avons faite en octobre 2000 prévoyait des réductions d'impôt de 100 milliards de dollars sur cinq ans, soit les plus importantes de l'histoire de notre pays; au cours de la présente année, ces réductions s'élèveront à 20 milliards de dollars. Je ne comprends pas de quoi le député a peur.


M. Charlie Penson (Peace River, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, les compagnies aériennes et les voyageurs, eux, savent de quoi je parle. Une nouvelle taxe leur a été imposée.
Les contribuables canadiens ont le droit de savoir comment le gouvernement a l'intention de financer tous ces programmes. Le gouvernement n'a pas de problème de recettes. Cela fait longtemps qu'il n'a pas de problème de recettes, mais il a un problème de dépenses, un penchant malsain pour les dépenses. C'est ça le véritable héritage que nous léguera le premier ministre, un penchant malsain pour les dépenses.
Pourquoi le ministre des Finances pense-t-il qu'il est correct de laisser les Canadiens dans l'ignorance pendant quatre ou cinq mois avant de déposer un budget nous disant comment il va financer ces programmes?


L'hon. John Manley (vice-premier ministre et ministre des Finances, Lib.):
Monsieur le Président, ce problème de dépenses est si grave que nos dépenses, exprimées en pourcentage du PIB, sont au même niveau qu'au début des années 1950. Notre problème est si grave que nous sommes le seul pays du G-7 à enregistrer un excédent budgétaire cette année et l'an prochain.
Nous avons un tel penchant pour les dépenses que nous sommes le seul pays du G-7 à afficher un taux de croissance de 3,5 p. 100 cette année et probablement l'an prochain. Si le député l'ignore, je ne sais pas ce que je peux faire pour lui.
* * *

(1435)
[Français]

Le Protocole de Kyoto


M. Bernard Bigras (Rosemont—Petite-Patrie, BQ):
Monsieur le Président, pour une mise en oeuvre équitable et efficace du Protocole de Kyoto, il faut une unité de pensée et d'action. Or, la ministre de la Santé s'est prononcée contre le protocole et le ministre de l'Industrie l'appuie du bout des lèvres.
Est-ce que le premier ministre considère que son Cabinet offre l'unité nécessaire pour ratifier et mettre en oeuvre le Protocole de Kyoto?


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Oui, monsieur le Président.


M. Bernard Bigras (Rosemont—Petite-Patrie, BQ):
Pourtant, monsieur le Président, les ministres de la Santé et des Ressources naturelles sont contre, le ministre de l'Industrie est ambivalent et le présumé successeur du premier ministre reste muet sur la question.
Le premier ministre réalise-t-il que son problème de leadership met un bémol à son intention de ratifier le Protocole de Kyoto? En d'autres termes, le premier ministre convient-il que, dans les faits, c'est le député de LaSalle—Émard qui tire les ficelles, alors que lui, on ne sait pas ce qu'il pense de cette question?


Le très hon. Jean Chrétien (premier ministre, Lib.):
Monsieur le Président, le caucus de mon parti est très en faveur de Kyoto. J'ai reçu des pétitions de la part des députés. Ils se sont levés depuis des années, me parlant de ce problème-là. J'ai écouté le caucus. Ils en parlent depuis des années et nous procédons.
* * *
[Traduction]

Les dépenses publiques


M. Gerry Ritz (Battlefords—Lloydminster, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, le ministre des Travaux publics a déclaré hier que l'achat d'avions à réaction Challenger et d'hélicoptères maritimes correspond à des «transactions totalement différentes». Je suppose que c'est vrai, car une transaction est conclue et l'autre ne l'est pas.
Toutefois, nous avons appris aujourd'hui que des semaines avant que soit passée la commande des avions Challenger les fonctionnaires du ministre ont informé celui-ci que les deux achats étaient incontestablement liés, au point où les méthodes d'acquisition douteuses de son gouvernement pourraient entraîner de nouvelles contestations devant les tribunaux.
Le ministre est-il maintenant disposé à reconnaître qu'il ne connaît rien des pratiques pertinentes en matière d'approvisionnement ou encore qu'il a tout simplement induit la Chambre en erreur hier?


L'hon. Ralph Goodale (ministre des Travaux publics et des Services gouvernementaux, ministre responsable de la Commission canadienne du blé et interlocuteur fédéral auprès des Métis et des Indiens non inscrits, Lib.):
Monsieur le Président, l'opposition a certes tenté d'établir un lien entre les deux transactions, mais elles sont en réalité fort différentes.
Dans un cas, il s'agit de l'acquisition de deux appareils; dans l'autre, il s'agit d'une acquisition de 28 appareils qui se traduirait par une augmentation des deux tiers de la flotte. Dans un cas, le marché est d'une valeur de 100 millions de dollars ou peut-être moins; dans l'autre, il est de l'ordre de plusieurs milliards de dollars.
Dans un cas, l'appareil est destiné à accomplir une tâche assez simple, soit assurer le transport de personnalités. Dans l'autre, il sert à exécuter une tâche complexe liée à la défense du pays. Ce sont deux contextes totalement différents.


M. Gerry Ritz (Battlefords—Lloydminster, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, c'est une histoire de chiffres pour le ministre, mais c'est une question de priorités pour les contribuables; quelle est la transaction dont nous avons besoin? Voici un extrait d'une note de service du sous-ministre Cochrane:
| Si le gouvernement est incapable d'affecter des crédits supplémentaires à la santé, comment peut-il être en mesure d'acquérir de nouveaux avions alors que ceux qu'il possède demeurent en mesure de voler? |
Comment le ministre pourrait-il bien justifier l'acquisition extravagante de nouveaux avions à réaction auprès du nombre croissant de Canadiens dont le nom est inscrit sur les listes d'attente pour les soins de santé?


L'hon. Ralph Goodale (ministre des Travaux publics et des Services gouvernementaux, ministre responsable de la Commission canadienne du blé et interlocuteur fédéral auprès des Métis et des Indiens non inscrits, Lib.):
Monsieur le Président, tout gouvernement doit à quelque moment que ce soit faire face à tout un éventail de priorités.
Dans le cas de la santé, le premier ministre a conclu en l'an 2000 un accord historique avec tous les premiers ministres provinciaux. Le gouvernement du Canada a investi à court terme 23 milliards de dollars. La commission Romanow a été nommée afin de se pencher sur le long terme. M. Romanow présentera son rapport en novembre. Le premier ministre tiendra une conférence des premiers ministres au début de la prochaine année, et les crédits pertinents seront prévus dans le prochain budget.
* * *
[Français]

La gestion de l'offre


M. Louis Plamondon (Bas-Richelieu—Nicolet—Bécancour, BQ):
Monsieur le Président, ma question s'adresse au ministre du Commerce international. Le ministre a soutenu hier qu'il était fermement engagé en faveur du système de gestion de l'offre.
Or, un mémoire impliquant trois ministères et soumis par de très hauts fonctionnaires au Cabinet, proposait comme stratégie de troquer le système de gestion de l'offre dans de futures négociations de l'OMC.
Le ministre du Commerce international peut-il nous assurer que cette stratégie a été totalement écartée et qu'il est hors de question de faire quelque compromis que ce soit dans ce domaine?

(1440)


L'hon. Pierre Pettigrew (ministre du Commerce international, Lib.):
Monsieur le Président, jamais nous n'avons envisagé de faire quelque compromis que ce soit sur notre système de gestion de l'offre. Nous n'avons pas élaboré de stratégie de négociation qui remettra en question la gestion de l'offre au Canada, parce que nous y sommes attachés.
Ce système, nous l'avons bâti nous-mêmes, notre gouvernement et les gouvernements qui nous ont précédés. Nous y avons contribué plus que des députés qui essaient de déstabiliser et d'insécuriser des citoyens qui gagnent bien leur vie sur nos fermes partout à travers le pays. Nous allons continuer de promouvoir le système de gestion de l'offre au Canada.


M. Louis Plamondon (Bas-Richelieu—Nicolet—Bécancour, BQ):
Monsieur le Président, si l'engagement du ministre est si ferme et sincère qu'il le prétend, pourquoi n'applique-t-il pas intégralement les mesures prévues par l'entente actuelle au chapitre des contrôles des frontières en stoppant l'entrée des produits contenant des dérivés de lait et en appliquant plus fermement la règle du 13 p. 100 pour ce qui est du poulet par exemple?
Il y a un langage très différent entre le discours du ministre et les gestes qu'il pose actuellement.


L'hon. Pierre Pettigrew (ministre du Commerce international, Lib.):
Heureusement, monsieur le Président, la classe agricole a appris à travailler avec nous de très près au cours des dernières années. Ce sont des gens qui ont été capables de nous faire confiance au moment où cela compte.
Lorsqu'on nous apporte certains dossiers, comme celui des bâtonnets de fromage, nous l'avons réglé ce dossier au terme de discussions avec les Américains. C'est notre gouvernement qui a mis de l'ordre dans des dossiers qui n'avaient pas été réglés au cours des années qui ont précédé l'élection de notre gouvernement.
Nous allons continuer de travailler étroitement avec la classe agricole même si cela les fait bavasser et que cela les dérange dans les régions.
* * *
[Traduction]

Le Protocole de Kyoto


M. Bob Mills (Red Deer, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, en abordant avec désinvolture la ratification du Protocole de Kyoto, le premier ministre semble faire complètement abstraction de nombreux Canadiens, dont ceux qui ont un revenu fixe et qui subiront les conséquences du plan de mise en oeuvre. Que leur répondra le premier ministre lorsqu'ils devront payer beaucoup plus cher l'électricité, le chauffage et le transport?


L'hon. David Anderson (ministre de l'Environnement, Lib.):
Monsieur le Président, comme nous l'avons dit à la Chambre...


Le Président:
À l'ordre. La présidence a beaucoup de mal à entendre.
[Français]
C'est presque impossible pour la présidence d'entendre la réponse à cause du bruit à l'autre bout de la Chambre. J'insiste pour que les députés soient un peu plus silencieux pour que nous puissions entendre les réponses et les questions. L'honorable ministre de l'Environnement a la parole.
[Traduction]


L'hon. David Anderson:
Monsieur le Président, comme nous l'avons dit plusieurs fois à la Chambre hier, nous nous efforçons de collaborer avec les provinces et les territoires pour adopter un plan de mise en oeuvre qui réduira au minimum les éventuelles répercussions sur les Canadiens.
En plus de ceux qui préoccupent le député et qui sont très importants, il va sans dire, il faut aussi penser aux générations futures et aux conséquences qu'auront pour elles et leur avenir des changements climatiques débridés.


M. Bob Mills (Red Deer, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, nous nous soucions des générations à venir et de l'environnement, mais l'accord de Kyoto n'est pas la solution, et le ministre le sait.
Le premier ministre a parlé de ratification. Un certain nombre d'entreprises ont réduit les investissements qu'elles prévoyaient. C'est une sorte de paralysie de l'investissement, et le phénomène prendra beaucoup plus d'ampleur à l'avenir. Le ministre le sait également.
Pourquoi le premier ministre tient-il autant à nous léguer le Protocole de Kyoto, au risque de paralyser l'investissement?


L'hon. David Anderson (ministre de l'Environnement, Lib.):
Monsieur le Président, il y a environ 18 mois, le président des États-Unis a déclaré que son pays ne ratifierait pas le Protocole de Kyoto. Il y a une quinzaine de mois, le premier ministre du Canada a manifesté son intention de le ratifier.
Le député devrait considérer les données économiques des huit premiers mois de l'année. Les États-Unis ont perdu 48 000 emplois. Par contre, au Canada, 384 000 emplois ont été créés, ce qui n'est pas rien, et ils sont le résultat direct de l'investissement.
* * *

(1445)

L'Irak


M. Larry Bagnell (Yukon, Lib.):
Monsieur le Président, en tant que président du caucus des affaires étrangères, je tiens beaucoup, à l'instar de nombre de mes collègues, à ce que le Canada cherche le plus possible à résoudre la situation en Irak par la voie diplomatique.
Le ministre des Affaires étrangères aurait-il l'obligeance de dire à la Chambre quelles méthodes il a prises jusqu'à maintenant pour atténuer la crise?


L'hon. Bill Graham (ministre des Affaires étrangères, Lib.):
Monsieur le Président, je remercie le député pour sa question et pour le travail que son comité accomplit, dans la plus pure tradition canadienne, pour essayer de trouver par voie diplomatique une solution pacifique aux conflits qui font rage dans le monde.
Ce que nous avons fait en étroite collaboration, le premier ministre et moi-même, c'est contacter les leaders mondiaux pour s'assurer que l'on continue à chercher par voie diplomatique une solution pacifique à ce conflit potentiel.
À New York, je me suis entretenu avec des ministres des Affaires étrangères, avec la Ligue arabe et avec le G-8. Dans tous les cas, nous nous en sommes tenus à notre plan de match, qui est de chercher à résoudre ce problème à la façon de la communauté internationale, conformément à la tradition canadienne de faire les choses...


Le Président:
Le député de Windsor-Ouest a la parole.
* * *

Le bois d'oeuvre


M. Brian Masse (Windsor-Ouest, NPD):
Monsieur le Président, le gouvernement en place aurait pu se pencher sur le problème du bois d'oeuvre dès 1996.
Hier à la Chambre, le ministre du Commerce international a dit «comme on le sait, les discussions avec les Américains continuent d'aller bon train». Ce matin, nous avons appris que la société Tember, le deuxième plus important producteur de bois du Canada, licencie des employés et réduit ses opérations par suite des mesures commerciales adoptées par les États-Unis.
Le gouvernement semble considérer que la destruction de l'industrie canadienne du bois d'oeuvre et les pertes d'emplois connexes s'inscrivent dans le contexte de discussions «qui vont bon train».
Le ministre de l'Industrie est-il prêt à s'engager dès aujourd'hui à mettre en oeuvre un plan d'action qui permettrait de protéger cette industrie et les emplois qu'elle génère jusqu'à ce que le ministre du Commerce international soit en mesure de régler ce différend commercial?


L'hon. Pierre Pettigrew (ministre du Commerce international, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai travaillé en étroite collaboration dans ce dossier avec mon collègue, le ministre de l'Industrie, qui se préoccupe au plus haut point, tout comme moi d'ailleurs, de l'avenir de l'industrie du bois d'oeuvre. Nous avons également consulté nos collègues les ministres des Ressources naturelles et du Développement des ressources humaines à ce sujet.
Nous comprenons que la situation est très difficile sur le terrain, dans les régions et les collectivités. C'est très pénible, mais nous croyons également qu'il est essentiel que nos discussions avec les États-Unis soient bien claires. Il est certain que nous appuierons les travailleurs forestiers et leurs collectivités grâce aux programmes qui ont été mis en place pour les aider à faire face aux difficultés actuelles.
* * *

Les affaires étrangères


M. Svend Robinson (Burnaby—Douglas, NPD):
Monsieur le Président, ma question s'adresse au ministre des Affaires étrangères.
En juillet dernier, Omar Khadr, un citoyen canadien de 15 ans, a été arrêté par l'armée américaine en Afghanistan. À ce jour, les États-Unis ont autorisé des représentants de la Croix-Rouge à voir le jeune homme, mais ils ont refusé l'accès aux autorités consulaires canadiennes, ce qui constitue une violation flagrante du droit international.
Je demande donc au ministre quelle mesure le gouvernement a prise pour veiller à ce que cet adolescent ne soit pas détenu à Guantanamo indéfiniment, jugé par un tribunal militaire secret et possiblement condamné à mort. Qu'est-ce que le Canada fait actuellement pour défendre les droits de ce jeune Canadien et empêcher les abus de pouvoir de la part des autorités américaines?


L'hon. Bill Graham (ministre des Affaires étrangères, Lib.):
Monsieur le Président, mon collègue d'en face, qui connaît à fond le droit international, sait fort bien qu'il a tort de parler de droit à l'accès consulaire dans de tels cas.
Le jeune homme en question a malheureusement été arrêté parce qu'il est accusé d'avoir tué un militaire américain au cours d'un conflit. Il n'est pas question d'accès consulaire en situation de conflit armé car, s'il en était ainsi, nos autorités consulaires auraient pu avoir accès aux soldats canadiens faits prisonniers, lors de la Seconde Guerre mondiale.
Nous avons cet accès. Nous avons demandé aux autorités américaines d'avoir accès au jeune homme et elles nous ont assurés que ce sera fait. La Croix-Rouge nous a également fait savoir que l'état de santé du jeune prisonnier était satisfaisant. Nous continuons à faire pression sur les autorités américaines pour que les droits de ce ressortissant canadien soient respectés, mais je tiens à assurer la Chambre que...


Le Président:
Le député de Cumberland—Colchester a la parole.
* * *

Le revenu national


M. Bill Casey (Cumberland—Colchester, PC):
Monsieur le Président, beaucoup de Canadiens sont privés du crédit d'impôt pour personnes handicapées parce que le formulaire est compliqué, mais au moins 20 000 Canadiens en sont privés tout simplement parce qu'ils n'ont pas renvoyé les formulaires. Qu'ils soient handicapés ou non, leur nom est rayé de la liste. C'est un peu comme la facturation par défaut.
La ministre a-t-elle fait des efforts pour communiquer avec ces personnes, afin de savoir pourquoi les formulaires n'ont pas été renvoyés?


L'hon. Elinor Caplan (ministre du Revenu national, Lib.):
Monsieur le Président, nous sommes déterminés à veiller à ce que les personnes admissibles à ce crédit d'impôt le reçoivent.
Nous tenons également des consultations pour nous assurer que le formulaire est bien compris. Nos consultations nous montrent que le formulaire a suscité un peu de confusion. Nous tâchons de faire en sorte que quiconque a besoin de renseignements sur la façon de remplir ce formulaire puisse en recevoir rapidement.
Je sais gré au député de sa question. Lorsque nous ferons notre vérification, nous sommes déterminés à faire en sorte qu'elle soit conforme à la loi et qu'elle aide les gens à obtenir l'assistance dont ils ont besoin.

(1450)


M. Bill Casey (Cumberland—Colchester, PC):
Monsieur le Président, je voudrais répéter la question. La ministre communiquera-t-elle avec les 20 000 à 30 000 Canadiens qui sont handicapés et qui n'ont pas renvoyé le formulaire? Le ministère va-t-il communiquer avec ces personnes handicapées pour s'assurer qu'elles peuvent redemander le crédit d'impôt?


L'hon. Elinor Caplan (ministre du Revenu national, Lib.):
Monsieur le Président, nous savons que beaucoup de gens n'ont pas renvoyé le formulaire tout simplement parce qu'ils reconnaissent qu'ils n'ont plus besoin du crédit ou qu'ils n'y sont pas admissibles.
Cependant, chaque fois que nous avons reçu une demande de renseignements supplémentaires ou d'explication du formulaire, nous y avons répondu, car nous sommes déterminés à faire en sorte que tous ceux qui ont droit à ce crédit le reçoivent.
* * *

La Garde côtière


M. John Cummins (Delta—South Richmond, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, le 13 août dernier cinq personnes ont perdu la vie, dont une mère et ses deux jeunes enfants lorsque le bateau de pêche Cap Rouge II a chaviré. Les plongeurs de la Garde côtière ont reçu l'ordre de ne pas tenter de sauver les personnes prises à l'intérieur du bateau. Hier, le commissaire de la Garde côtière a déclaré que les directives qui auraient permis aux plongeurs de pénétrer à l'intérieur du bateau chaviré ne leur avaient pas été communiquées.
De quelles directives parlait-il?
Le manuel de sécurité de la flotte interdit aux plongeurs d'entrer à l'intérieur de bateaux qui ont chaviré. Des cadres supérieurs leur ont ordonné de demeurer à l'extérieur.
Je demande au ministre de déposer les directives qui auraient permis d'effectuer une tentative de sauvetage dans ce cas.


L'hon. Robert Thibault (ministre des Pêches et des Océans, Lib.):
Monsieur le Président, la politique de plongée de la Garde côtière canadienne est conforme au Code canadien du travail. De ce fait, les plongeurs n'entrent pas dans les zones d'accès interdit. Toutefois, la Loi sur la marine marchande du Canada contient une disposition qui permet aux coordonnateurs conjoints des services de recherche et de sauvetage d'autoriser, dans des circonstances raisonnables, la prise de toute mesure nécessaire pour sauver des vies humaines.


M. John Cummins (Delta—South Richmond, Alliance canadienne):
Monsieur le président, le Code canadien du travail n'interdit pas d'effectuer des plongées de sauvetage. Le manuel de sécurité de la flotte l'interdit, de même que la politique du ministre.
En fait, le ministre et ses hauts fonctionnaires ont créé un homme de paille. Ils préfèrent être tenus responsables de ne pas avoir communiqué de directives que d'avoir mis en place des directives qui ont peut-être causé la mort de cinq personnes, dont une mère et ses deux jeunes enfants.
Si ce n'est pas la vérité, je mets le ministre au défi de déposer les documents énonçant les directives en question.


L'hon. Robert Thibault (ministre des Pêches et des Océans, Lib.):
Monsieur le Président, le gouvernement offre ses condoléances aux familles et aux amis de toutes les personnes décédées. Il regrette cependant que les députés d'en face et d'autres imputent la responsabilité de la situation à la Garde côtière et à ses actions. La Garde côtière, les plongeurs, les équipes de recherche et de sauvetage, les services d'incendie et tous les intervenants ont fait un travail remarquable. Chaque année, ils sauvent quelque 1 500 personnes en Colombie-Britannique et ils continueront de sauver des vies. C'est faire preuve d'irresponsabilité que de minimiser leur rôle.
* * *
[Français]

Les marchés publics


M. Robert Lanctôt (Châteauguay, BQ):
Monsieur le Président, dans le dossier des commandites, le ministre des Travaux publics a nié hier que 80 p. 100 des sommes du programme étaient entachées d'irrégularités.
Or, le rapport produit par son ministère, qui nous permettrait d'y voir plus clair, n'est toujours pas public, contrairement à l'engagement du ministre.
Pourquoi le ministre des Travaux publics, qui devait rendre public ce rapport d'enquête interne, ne le fait pas? A-t-il soudainement changé d'avis?
[Traduction]


L'hon. Ralph Goodale (ministre des Travaux publics et des Services gouvernementaux, ministre responsable de la Commission canadienne du blé et interlocuteur fédéral auprès des Métis et des Indiens non inscrits, Lib.):
Monsieur le Président, avant tout, je voudrais féliciter le député de sa nomination au poste de porte-parole pour les questions intéressant ce portefeuille. J'aurais dû le faire hier, mais j'ai oublié et c'est pourquoi je le fais maintenant.
Je suis fort heureux d'apprendre à la Chambre que l'examen des dossiers de mon ministère, annoncé au printemps, est presque terminé. Quelque 720 dossiers différents ont dû être étudiés, dont 125 à 130 de façon très détaillée. On m'a dit que le rapport en est cours de parachèvement. Je l'attends avec impatience, comme le député sans aucun doute.
[Français]


M. Robert Lanctôt (Châteauguay, BQ):
Monsieur le Président, le gouvernement a toujours refusé une enquête en prétextant la tenue d'une enquête interne et d'une enquête policière.
Le ministre pourrait-il nous dire ceci: combien y a-t-il d'enquêtes policières en cours; sur combien de contrats portent-elles; et quelles sont les entreprises visées par ces enquêtes?

(1455)
[Traduction]


L'hon. Ralph Goodale (ministre des Travaux publics et des Services gouvernementaux, ministre responsable de la Commission canadienne du blé et interlocuteur fédéral auprès des Métis et des Indiens non inscrits, Lib.):
Monsieur le Président, les services policiers auraient fait enquête dans 13 cas selon des informations qui sont déjà du domaine public. Je ne peux confirmer le nombre exact d'enquêtes car, bien entendu, il appartient aux policiers eux-mêmes de déterminer ce qui fera ou non l'objet de leur enquête.
* * *

La sécurité aérienne


M. James Moore (Port Moody—Coquitlam—Port Coquitlam, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, le 22 mai dernier, au sujet de la taxe aéroportuaire de 24 $, le ministre des Transports a promis à la Chambre que le gouvernement «reverra les droits en septembre». Nous sommes maintenant le 2 octobre. Le ministre des Transports peut-il nous dire quand nous verrons le rapport qu'il a promis ou s'il a tout simplement tenu parole?


L'hon. John Manley (vice-premier ministre et ministre des Finances, Lib.):
Monsieur le Président, nous reverrons les droits lorsque nous aurons des données adéquates pour le faire convenablement. Nous avons toutefois une divergence de principe avec les députés de l'opposition. Nous croyons en effet que les usagers du système de transport aérien devraient assumer les coûts des mesures de sécurité supplémentaires. L'opposition croit que nous devrions simplement payer ces dépenses supplémentaires avec d'autres recettes.


M. James Moore (Port Moody—Coquitlam—Port Coquitlam, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, depuis l'instauration de la taxe, les localités de Stephenville, à Terre-Neuve, de Yarmouth, en Nouvelle-Écosse, et de St. Leonard, au Nouveau-Brunswick, ne sont plus desservies par Air Canada. Un transporteur aérien a signalé que, par rapport à l'an dernier, les embarquements ont baissé de 52 p. 100 à Regina, et de 42 p. 100, à Saskatoon.
Combien de villes devront cesser d'être desservies par un transporteur aérien avant que le gouvernement réagisse en réduisant ou en éliminant la taxe aérienne et en incitant plus de Canadiens à emprunter les transports aériens? Quand le gouvernement sera-t-il à l'écoute?


L'hon. John Manley (vice-premier ministre et ministre des Finances, Lib.):
Monsieur le Président, les embarquements sont à la baisse partout en Amérique du Nord, à la suite des événements du 11 septembre 2000. En essayant de déterminer le montant adéquat des frais prévus dans le dernier budget au titre de la sécurité, nous avons tenté d'évaluer le nombre d'embarquements qui s'effectueraient cette année, compte tenu des événements susmentionnés. En fait, les évaluations se sont révélées assez justes, même si les embarquements ont été légèrement inférieurs à ce qui avait été prévu. Ces variables seront prises en considération lors de la révision des frais.
* * *

Les affaires étrangères


M. Walt Lastewka (St. Catharines, Lib.):
Monsieur le Président, ma question s'adresse au secrétaire d'État responsable de l'Europe centrale et orientale et du Moyen-Orient.
Le secrétaire d'État se rendra dans la région du Golfe la semaine prochaine. Compte tenu de la tension accrue qui règne dans la région à cause de l'Irak, le secrétaire d'État peut-il nous dire ce qu'il espère accomplir au cours de sa visite?


L'hon. Gar Knutson (secrétaire d'État (Europe centrale et orientale et Moyen-Orient), Lib.):
Monsieur le Président, la mission commerciale que j'effectuerai la semaine prochaine dans le Golfe en compagnie de représentants de 30 entreprises canadiennes, notamment SNC-Lavalin et EnCana, et du député de St. Catharines fera ressortir le fait que le Canada entretient des relations multidimensionnelles avec le monde arabe. Nous pouvons contribuer à la stabilité dans cette région en renforçant nos liens économiques tout en faisant valoir les valeurs canadiennes.
J'aurai l'occasion de m'asseoir avec des chefs de ces pays et de faire valoir le désir du Canada de voir une solution à l'impasse actuelle concernant l'Irak et la nécessité absolue du retour au travail des inspecteurs en désarmement.
* * *

La frontière canado-américaine


Mme Val Meredith (South Surrey—White Rock—Langley, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, dans son discours du Trône, le gouvernement se vante également de la libre circulation des personnes, des biens et du commerce à notre frontière commune avec les États-Unis. Or, au poste frontalier de ma circonscription, on constate de très longs bouchons et des attentes de deux à quatre heures. Le gouvernement croit-il que des attentes de deux à quatre heures représentent une libre circulation des biens?


L'hon. Elinor Caplan (ministre du Revenu national, Lib.):
Monsieur le Président, nous surveillons la situation de près.
La sécurité des Canadiens est essentielle. Nous savons que, de temps à autre, les employés exercent des moyens de pression. Il existe une convention collective et un processus de règlement des griefs. Cependant, je peux garantir à la députée que la sécurité n'est pas menacée, que le trafic se fait normalement et qu'il est sous surveillance car, à l'instar des agents dévoués qui travaillent à nos postes frontaliers, nous reconnaissons son importance pour tous les Canadiens


Mme Val Meredith (South Surrey—White Rock—Langley, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, ce problème existait avant que les employés n'exercent des moyens de pression. Malgré l'arrivée d'un grand nombre de douaniers américains à la frontière, les attentes sont causées par les préoccupations des Américains au sujet du manque d'engagement du Canada à l'égard de la sécurité continentale. Malgré tous les accords, les Américains continuent de croire que le gouvernement libéral n'est pas en mesure d'offrir un niveau de sécurité approprié. Quelles mesures le gouvernement prend-il pour apaiser ces craintes?

(1500)


L'hon. John Manley (vice-premier ministre et ministre des Finances, Lib.):
Monsieur le Président, je rencontre toutes les quatre à six semaines environ le directeur de la sécurité du territoire, le gouverneur Tom Ridge. Nous avons été en mesure de conclure un accord historique dont on a pris acte le 9 septembre à l'occasion d'une réunion importante à Detroit entre le président des États-Unis et le premier ministre du Canada.
Je peux dire en toute honnêteté à la députée que j'ignore ses sources d'information, mais durant tous ces mois de réunions sur ces questions qui préoccupent les deux gouvernements depuis des années, je n'ai jamais entendu un fonctionnaire, un représentant politique ou un secrétaire du Cabinet américain émettre des doutes sur la sécurité du Canada.
* * *
[Français]

Les infrastructures routières


M. Mario Laframboise (Argenteuil—Papineau—Mirabel, BQ):
Monsieur le Président, le ministre des Transports a dit hier ne pas douter qu'il y aurait prolongement de l'autoroute 30 «bientôt». Le 29 janvier 2001, pour lui, la même autoroute était «prioritaire». Au printemps 2001, les travaux débuteraient «dans les meilleurs délais». Dans une lettre du 20 août 2001, c'est encore une fois une «priorité», et le 6 août dernier, c'était une «question de semaines sinon de jours».
Plutôt que de multiplier les déclarations qui n'aboutissent à rien, est-ce que le ministre des Transports pourrait s'engager formellement, aujourd'hui, à signer le protocole d'entente que le gouvernement du Québec lui faisait parvenir il y a près de dix mois, afin de prolonger l'autoroute 30 entre Candiac et Vaudreuil?


L'hon. David Collenette (ministre des Transports, Lib.):
Monsieur le Président, avant de signer l'entente avec le gouvernement du Québec, il est nécessaire de mettre en place toutes les mesures pour étudier la situation. Nous avons commencé avec les études environnementales et celles pour la circulation. C'est ce que j'ai dit hier.
* * *
[Traduction]

Les affaires autochtones


M. Brian Pallister (Portage—Lisgar, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, le Canada dépense aujourd'hui huit fois plus d'argent par habitant pour résoudre les problèmes autochtones et, pourtant, non seulement les problèmes sociaux ne sont pas résolus, mais ils s'aggravent. Cette façon symbolique de traiter les symptômes à coups de milliards, sans tenir compte des causes, n'est que du gaspillage.
Le ministre des Finances peut-il me dire quelle analyse permet au gouvernement de croire que cette approche perdante fonctionnera mieux à l'avenir qu'elle ne l'a fait jusqu'à maintenant?


L'hon. Robert Nault (ministre des Affaires indiennes et du Nord canadien, Lib.):
Monsieur le Président, je croyais que l'opposition se hâterait d'applaudir le gouvernement pour un discours du Trône qui reconnaît le travail important qui doit être accompli auprès des autochtones.
Depuis quelques mois, nous nous entretenons avec des autochtones de tout le Canada. Nous les consultons. Nous présenterons cet automne quatre projets de loi qui, nous l'espérons, auront l'approbation de l'opposition. Ils viseront à établir une relation de gouvernement à gouvernement et à mettre à la disposition des premières nations des outils modernes de gestion publique qui les aideront à passer d'une situation d'assistés sociaux à une économie que nous souhaitons tous.
* * *
[Français]

Le bois d'oeuvre


M. Stéphane Bergeron (Verchères—Les-Patriotes, BQ):
Monsieur le Président, après des mois de tergiversations, le gouvernement semble enfin se rendre à l'évidence et laisse entendre qu'il annoncera sous peu un plan d'aide au secteur du bois d'oeuvre. Le Bloc québécois, lui, a compris la situation depuis longtemps et a présenté, dès le mois de mars, un plan dont le gouvernement devrait certainement s'inspirer pour aider les entreprises et les travailleurs à traverser la crise jusqu'à ce que l'ALENA et l'OMC rendent leurs décisions.
Le ministre du Commerce international peut-il nous assurer que le plan qu'il compte annoncer, comme celui du Bloc, va comporter des mesures pour venir en aide aux travailleurs et des mesures destinées aux entreprises, comme par exemple des garanties de prêt?


L'hon. John Manley (vice-premier ministre et ministre des Finances, Lib.):
Monsieur le Président, de la part du ministre du Commerce international, je dirai d'abord que nous avons déjà annoncé de l'aide financière. Deuxièmement, nous avons déjà eu du succès à l'OMC. Nous avons l'engagement de notre gouvernement, avec l'industrie, de travailler fortement à trouver des solutions rapidement pour le secteur du bois d'oeuvre.

AFFAIRES COURANTES
[Affaires courantes]
* * *

(1505)
[Traduction]

Nominations par décret


M. Geoff Regan (secrétaire parlementaire du leader du gouvernement à la Chambre des communes, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai le plaisir de déposer, dans les deux langues officielles, quelques décrets annonçant des nominations faites récemment par le gouvernement.
* * *

Réponse du gouvernement à des pétitions


M. Geoff Regan (secrétaire parlementaire du leader du gouvernement à la Chambre des communes, Lib.):
Monsieur le Président, conformément au paragraphe 36(8) du Règlement, j'ai l'honneur de déposer dans les deux langues officielles la réponse du gouvernement à 10 pétitions.
* * *
[Français]

Les délégations interparlementaires


M. David Price (Compton—Stanstead, Lib.):
Monsieur le Président, en vertu de l'article 34(1) du Règlement, j'ai l'honneur de présenter à la Chambre, dans les deux langues officielles, le 15e rapport de l'Association parlementaire canadienne de l'OTAN, qui a représenté le Canada à la session du printemps 2002 à l'Assemblée parlementaire de l'OTAN, tenue à Sofia en Bulgarie, du 24 au 28 mai 2002.


M. Bernard Patry (Pierrefonds—Dollard, Lib.):
Monsieur le Président, en vertu de l'article 34 du Règlement, j'ai l'honneur de présenter à la Chambre, dans les deux langues officielles, le rapport de la section canadienne de l'Assemblée parlementaire de la Francophonie, ainsi que le rapport financier y afférent.
Le rapport a trait à la 28e session annuelle de l'APF, qui s'est tenue à Berne en Suisse, du 4 au 10 juillet 2002.
[Traduction]


M. Joe Comuzzi (Thunder Bay—Superior-Nord, Lib.):
Monsieur le Président, conformément au paragraphe 34(1) du Règlement, j'ai l'honneur de présenter un compte rendu de la participation de la délégation canadienne à la 43e réunion annuelle du Groupe interparlementaire Canada-États-Unis, qui s'est tenue au Rhode Island en mai 2002.
C'était la première fois que nous avions la possibilité de rencontrer nos collègues parlementaires américains depuis le 11 septembre 2001. Inutile de dire que le terrorisme et la sécurité de nos citoyens étaient au coeur des discussions.
Nous avons utilisé une nouvelle formule cette année. Le présent rapport, combien important pour les relations entre le Canada et les États-Unis, sera distribué à tous les députés de la Chambre et tous les sénateurs, qui, je l'espère, prendront le temps de le lire. Il sera également distribué aux membres du Sénat et de la Chambre des représentants des États-Unis.
* * *

La Loi sur la protection des droits fondamentaux des dénonciateurs


M. Gurmant Grewal (Surrey-Centre, Alliance canadienne)
demande à présenter le projet de loi C-201, Loi sur la protection des droits fondamentaux des dénonciateurs.
--Monsieur le Président, au nom des contribuables de Surrey-Centre et, en fait, de tous les Canadiens, je dépose à nouveau mon projet de loi d'initiative parlementaire concernant la protection des fonctionnaires qui dénoncent de bonne foi les allégations de conduites répréhensibles dans la fonction publique. Ce projet de loi s'intitule Loi sur la protection des droits fondamentaux des dénonciateurs.
L'objet du présent projet de loi est de protéger les fonctionnaires fédéraux qui, de bonne foi, signalent des actes répréhensibles qui sont commis dans la fonction publique, soit des cas de gaspillage, de fraude, de corruption, d'abus de pouvoir, de violation des lois ou de menaces pour la santé et la sécurité publiques. Il est dans l'intérêt public de faire en sorte que les fonctionnaires soient libres de signaler de telle situations sans crainte de représailles ou de discrimination.
J'ai déposé ce projet de loi à la dernière session, également sous le titre de projet de loi C-201. Je profite de l'occasion pour remercier le député de Calgary—Nose Hill pour son appui à l'égard de cet important projet de loi.
(Les motions sont adoptées, le projet de loi est lu pour la première fois et imprimé.)

(1510)


Le Président:
Le Président convient que le texte du projet de loi est inchangé par rapport au projet de loi C-201 à l'étude au moment de la prorogation de la première session de la 37e législature. Par conséquent, conformément à l'article 86.1 du Règlement, le projet de loi devrait être inscrit au bas de la liste de priorité du Feuilleton à la suite du premier tirage de la session et devrait faire l'objet d'un vote.
* * *
[Français]

La Loi canadienne sur la santé


M. Mauril Bélanger (Ottawa—Vanier, Lib.)
demande à présenter le projet de loi C-202, Loi modifiant la Loi canadienne sur la santé (dualité linguistique).
--Monsieur le Président,conformément à l'article 86.1 du Règlement de la Chambre des communes, je souhaite rétablir mon projet de loi intitulé Loi modifiant la Loi canadienne sur la santé et d'en faire la première lecture aujourd'hui.
Ce projet de loi est identique à celui que j'avais déposé au cours de la dernière session. Il était connu comme étant le projet de loi C-407. Je souhaite que ce projet de loi soit rétabli lors de la présente session et classé dans l'ordre de priorité à l'étape où il se trouvait au moment de la prorogation des travaux parlementaires.
Je remercie mon collègue de Beauséjour—Petitcodiac de l'avoir appuyé. C'est un projet de loi qui ajouterait un sixième principe à la Loi canadienne sur la santé, soit celui du respect de la dualité linguistique canadienne.
[Traduction]
Ce projet de loi revêt une importance considérable pour toutes les minorités linguistiques du pays. J'attends avec impatience les trois heures de débat et le vote en cours de session.
(Les motions sont adoptées, le projet de loi est lu pour la première fois et imprimé.)
[Français]


Le Président:
La Présidence est d'avis que ce projet de loi est dans le même état où était le projet de loi C-407 au moment de la prorogation de la première session de la 37e législature.
En conséquence, conformément à l'article 86.1 du Règlement, le projet de loi sera inscrit au bas de la liste des affaires dans l'ordre de priorité au Feuilleton, suite au premier tirage de la session, et désigné comme étant un item votable.
* * *
[Traduction]

Loi sur la citoyenneté


M. John Bryden (Ancaster—Dundas—Flamborough—Aldershot, Lib.)
demande a présenter le projet de loi C-203, Loi modifiant la Loi sur la citoyenneté (serment de citoyenneté ou affirmation de citoyenneté).
--Monsieur le Président, ce projet de loi, qui est nouveau, a pour objet de modifier la Loi sur la citoyenneté pour mieux définir les responsabilités des citoyens canadiens. À cette fin, il propose de modifier le texte actuel du serment de citoyenneté pour qu'il reflète mieux les principes énoncés dans la Charte des droits et libertés.
Vu ce qui se passe ailleurs dans le monde, je ne pense pas qu'il y ait eu dans l'histoire du Canada un autre moment où il ait été aussi important qu'aujourd'hui de rappeler à nos concitoyens les idéaux que nous défendons en tant que Canadiens, et de dire au reste du monde que nous soutenons les droits fondamentaux de tout être humain.
Je propose donc le texte suivant: «En prêtant allégeance au Canada, je me range parmi les Canadiens, un peuple uni par la mission solennelle de faire respecter cinq grands principes: égalité des chances, liberté d'expression, valeurs démocratiques, droits de la personne et primauté du droit.»
Je remercie la députée de Saint-Lambert, qui appuie ce projet de loi.
(Les motions sont adoptées, le projet de loi est lu pour la première fois et imprimé.)
* * *

(1515)

Loi sur le système de justice pénale pour les adolescents


M. Gary Lunn (Saanich—Gulf Islands, Alliance canadienne)
demande à présenter le projet de loi C-204, Loi modifiant la Loi sur le système de justice pénale pour les adolescents.
--Monsieur le Président, c'est avec grand plaisir que je prends la parole au nom de tous les habitants de Saanich—Gulf Islands. J'interviens pour présenter de nouveau mon projet de loi, qui a pour objet de modifier la Loi sur le système de justice pénale pour les adolescents. C'est la deuxième fois en six mois que je dois le représenter, à cause principalement de la prorogation inutile du Parlement décrétée par le premier ministre.
Mon projet de loi vise à assurer un juste équilibre entre la nécessité de punir les jeunes qui commettent des infractions contre des biens et le fait que de nombreux jeunes contrevenants ne récidivent pas s'ils obtiennent l'aide dont ils ont besoin.
S'il est adopté, le projet de loi accomplira trois choses. Premièrement, imposer un couvre-feu obligatoire pour tous les jeunes contrevenants de 18 ans ou moins reconnus coupables d'introduction par infraction ou d'invasion de domicile, pour une durée d'au moins un an et d'au plus trois ans.
Deuxièmement, imposer aux récidivistes une peine d'emprisonnement obligatoire d'au moins 30 jours.
Troisièmement, obliger le parent ou le tuteur d'un jeune contrevenant qui manque aux conditions de sa probation à rapporter le fait immédiatement, sous peine d'une amende pouvant aller jusqu'à 2 000 $ ou d'une peine d'emprisonnement de six mois.
Je dirai en guise de conclusion que, faute de mécanismes d'exécution, de nombreux manquements aux conditions de la probation ne sont pas signalés, de sorte que les jeunes n'obtiennent pas l'aide dont ils ont besoin. Le projet de loi vise à assurer un juste équilibre entre la punition et la réadaptation. J'encourage tous les députés à appuyer ce projet de loi.
(Les motions sont adoptées, le projet de loi est lu pour la première fois et imprimé.)
* * *

La Loi sur les textes réglementaires


M. Gurmant Grewal (Surrey-Centre, Alliance canadienne)
demande à présenter le projet de loi C-205, Loi modifiant la Loi sur les textes réglementaires (procédure d'annulation des textes réglementaires).
--Monsieur le Président, au nom des électeurs de Surrey-Centre, en fait de tous les Canadiens, dans l'esprit de la réforme démocratique, je présente une nouvelle fois mon projet de loi d'initiative privée, intitulé Loi modifiant la Loi sur les textes réglementaires (procédure d'annulation des textes réglementaires).
Cette mesure vise à mettre en place une procédure formelle de révocation de tous les textes réglementaires qui sont soumis à un examen par le Comité mixte permanent de l'examen de la réglementation, dont j'étais coprésident lors de la dernière législature. Le projet de loi renforcera les pouvoirs du comité mixte et permettra aux députés et sénateurs de raffermir leurs droits démocratiques au Parlement.
Le projet de loi est identique à l'ancien projet de loi C-202 qui avait été présenté lors de la dernière session. Par conséquent, conformément à l'article 86.1 du Règlement, je souhaite que le projet de loi soit repris au stade où il se trouvait avant la prorogation.
Puis-je avoir le consentement unanime de la Chambre pour donner à ce projet de loi le numéro C-202 plutôt qu'un autre numéro?


Le Président:
Ce sera difficile car nous avons déjà un projet de loi C-202. Les numéros sont attribués automatiquement et c'est ce qui nous empêche d'en changer. Ce sera donc difficile, mais nous y reviendrons dans un instant. Commençons par la première lecture du projet de loi.
(Les motions sont adoptées, le projet de loi est lu pour la première fois et imprimé.)


Le Président:
La présidence convient que ce projet de loi est identique au projet de loi C-202 tel qu'il était au moment de la prorogation de la première session de la 37e législature. Par conséquent, conformément à l'article 86.1 du Règlement, le projet de loi sera inscrit au bas de la liste de priorité du Feuilleton à la suite du premier tirage de la session, et fera l'objet d'un vote.
Le député pourrait peut-être discuter de la situation avec son collègue d'Ottawa--Vanier, dont le projet de loi porte le numéro 202, et nous revenir assez rapidement avec la décision qu'ils auront prise. Avec le consentement de la Chambre, nous ferons les modifications voulues.
* * *

Pétitions
La justice


Mme Brenda Chamberlain (Guelph—Wellington, Lib.):
Monsieur le Président, nous avons 1 500 signatures avec la coalition formée au sein de la Chambre par 26 députés et 32 sénateurs.
En juin dernier, nous avons également déposé 2 300 signatures de pétitionnaires qui demandaient au ministre de la Justice de faire avancer le plus rapidement possible le processus de révision du dossier de M. Steven Truscott par l'honorable Fred Kaufman et de voir à ce que justice soit rendue.
* * *

(1520)

La recherche sur les cellules souches


M. Reed Elley (Nanaimo—Cowichan, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, conformément à l'article 36 du Règlement, j'ai le plaisir de présenter à la Chambre, au nom de mes électeurs de Nanaimo--Cowichan, deux pétitions réunissant 125 signatures. Les pétitionnaires demandent que dans le dossier actuel de la recherche sur les cellules souches, le Parlement du Canada appuie la recherche sur les cellules souches adultes, comme meilleure solution, et qu'il axe son soutien législatif autour de la recherche sur les cellules souches adultes plutôt que de la recherche sur les cellules embryonnaires, qui soulève un grand nombre de problèmes d'ordre moral.
* * *

La défense nationale


M. Svend Robinson (Burnaby—Douglas, NPD):
Monsieur le Président, j'ai l'honneur de déposer deux pétitions aujourd'hui.
La première a été signée par un grand nombre de résidents de ma circonscription de Burnaby—Douglas et porte sur l'adoption d'un traité de préservation de l'espace. Les pétitionnaires soulèvent les préoccupations entraînées par l'extinction du traité ABM, le 13 juin dernier.
Les pétitionnaires exhortent le Parlement à voir à ce que le Canada approuve, signe et ratifie sans délai un traité de préservation de l'espace et à ce que ce traité soit déposé auprès du Secrétaire général des Nations Unies.
Ils demandent également que le gouvernement du Canada convoque une assemblée en vue de la signature du traité de préservation de l'espace.
* * *

La pornographie juvénile


M. Svend Robinson (Burnaby—Douglas, NPD):
Monsieur le Président, j'ai une deuxième pétition qui est aussi signée par des habitants de ma circonscription, celle de Burnaby—Douglas, notamment par Mme Tania Jackson, de la promenade Garden Grove à Burnaby.
Les pétitionnaires signalent à la Chambre qu'une nette majorité de Canadiens condamnent la création et l'utilisation de pornographie juvénile. Ils soulignent que les tribunaux n'ont pas mis en application la loi actuelle en la matière de façon à clairement faire savoir qu'une telle exploitation des enfants sera vivement réprimée.
Ils exhortent le Parlement à prendre les mesures nécessaires pour protéger nos enfants en déclarant illégal tout matériel faisant la promotion et la glorification de la pédophilie et d'activités sadomasochistes mettant en cause des enfants.
* * *

La justice


M. Peter MacKay (Pictou—Antigonish—Guysborough, PC):
Monsieur le Président, conformément à l'article 36 du Règlement, j'ai l'honneur de présenter une pétition au nom de centaines de Canadiens qui ajoutent leur nom à celui de milliers d'autres, cela, pour appuyer Steven Truscott. Ils exhortent le gouvernement et le ministre de la Justice à revoir l'affaire qui, en 1959, a entraîné la condamnation de Steven Truscott, alors âgé de 14 ans, pour un meurtre qu'à mon avis, il n'a pas commis.
Cette affaire a retenu beaucoup l'attention et est célèbre au Canada. La prédécesseure du ministre de la Justice actuel avait pris des mesures relativement à ce dossier. Les pétitionnaires exhortent l'actuel ministre de la Justice à poursuivre la démarche en présentant une requête en application de l'article 690 du Code criminel, afin que l'affaire et les preuves soient réexaminées, y compris les nouvelles preuves qui ont été présentées, et afin de veiller à ce que la justice soit finalement rendue dans cette affaire et cette aventure pleine de rebondissements que vivent M. Truscott et sa famille depuis 1959.
* * *

La recherche sur les cellules souches


L'hon. Jim Peterson (Willowdale, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai six pétitions à présenter. La première concerne l'aide gouvernementale qui devrait être axée autour de la recherche sur les cellules souches adultes.
* * *

La pornographie juvénile


L'hon. Jim Peterson (Willowdale, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai deux pétitions concernant la pornographie juvénile qui préconisent l'adoption de lois plus sévères à l'égard de tout matériel glorifiant la pédophilie ou les activités sadomasochistes mettant en cause des enfants.
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Le projet de loi C-15B


L'hon. Jim Peterson (Willowdale, Lib.):
Monsieur le président, j'ai ici deux pétitions signées par des milliers de personnes priant instamment le Parlement de terminer son travail et d'adopter le projet de loi C-15B, Loi modifiant le Code criminel (cruauté envers les animaux).
* * *

La Justice


L'hon. Jim Peterson (Willowdale, Lib.):
Monsieur le président, ma dernière pétition concerne Steven Truscott. Les pétitionnaires demandent au gouvernement de veiller à ce que l'enquête et la révision de ce dossier aient lieu le plus rapidement possible.


M. Andrew Telegdi (Kitchener—Waterloo, Lib.):
Monsieur le président, j'ai l'honneur de présenter aujourd'hui une pétition signée par 97 personnes et concernant l'affaire Steven Truscott. En 1959, à l'âge de 14 ans, Steven Truscott a été condamné à la pendaison. Dans cette affaire, l'enquête policière a été entourée de circonstances inhabituelles, et des questions concernant la condamnation subséquente de M. Truscott demeurent sans réponse.
Les pétitionnaires demandent au Parlement et au ministre de la Justice, l'honorable Martin Cauchon, d'entreprendre...

(1525)


Le Président:
À l'ordre, s'il vous plaît. Le député sait qu'il ne peut mentionner le nom des députés, et je sais qu'il tient à respecter le Règlement à tous égards.


M. Andrew Telegdi:
C'est un oubli, monsieur le président. Il est important que le dossier soit réexaminé dans un délai raisonnable. À mon avis, la majorité des Canadiens conviendrait avec moi que justice devrait être rendue à M. Truscott.
* * *

La Société canadienne des postes


M. Gary Lunn (Saanich—Gulf Islands, Alliance canadienne):
Monsieur le président, je désire présenter une pétition au nom des électeurs de Saanich—Gulf Islands et de toute la Colombie-Britannique.
Les pétitionnaires demandent au Parlement d'abroger le paragraphe 13(5) de la Loi sur la Société canadienne des postes, car les courriers des routes rurales n'ont pu négocier collectivement afin d'améliorer leur salaire et leurs conditions de travail, et ils gagnent souvent moins que le salaire minimum.
* * *

La pornographie juvénile


Mme Val Meredith (South Surrey—White Rock—Langley, Alliance canadienne):
Monsieur le président, j'ai l'honneur de présenter deux pétitions au nom des résidents de la région du Lower Mainland. La première pétition comprend 249 signatures et la deuxième, 422.
Les deux pétitions demandent au Parlement de protéger nos enfants en adoptant toutes les mesures nécessaires pour veiller à ce que soit interdit tout matériel assurant la promotion ou la glorification des activités pédophiles ou sadomasochistes mettant en cause des enfants.


Mme Judi Longfield (Whitby—Ajax, Lib.):
Monsieur le président, je désire présenter deux pétitions priant instamment la Chambre de protéger nos enfants en adoptant toutes les mesures nécessaires afin de veiller à ce que soit interdit tout matériel assurant la promotion ou la glorification des activités pédophiles ou sadomasochistes mettant en cause des enfants. En conformité avec le Règlement, j'ai apposé ma signature.
* * *

La recherche sur les cellules souches


Mme Judi Longfield (Whitby—Ajax, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai deux autres pétitions qui invitent le gouvernement à centrer son projet de loi sur les cellules souches non embryonnaires, ou cellules souches adultes, pour la recherche visant à trouver les remèdes et thérapies nécessaires pour traiter certaines maladies dont souffrent les Canadiens, et j'ajoute ma signature à ces pétitions également.
* * *

La pornographie juvénile


M. Ovid Jackson (Bruce—Grey—Owen Sound, Lib.):
Monsieur le président, je suis heureux d'intervenir aujourd'hui au nom des électeurs de Bruce--Grey--Owen Sound pour déposer quatre pétitions, qui regroupent quelque 200 signatures.
Les pétitionnaires demandent au Parlement de prendre toutes les mesures nécessaires pour assurer la protection des enfants en veillant à ce que soient proscrits les documents encourageant la pornographie et les activités sado-masochistes contre les enfants.
* * *

La recherche sur les cellules souches


M. Gurmant Grewal (Surrey-Centre, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, au nom des électeurs de Surrey-Centre et de beaucoup d'autres Canadiens, il me fait plaisir de déposer deux pétitions.
Ma première pétition invite le Parlement à appuyer la recherche éthique sur les cellules souches, qui a déjà révélé un potentiel encourageant pour trouver des remèdes et des thérapies concernant plusieurs maladies, dont la maladie de Parkinson, la maladie d'Alzheimer, le diabète, le cancer, la sclérose en plaques, les lésions de la moelle épinière et ainsi de suite.
* * *

Postes Canada


M. Gurmant Grewal (Surrey-Centre, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, ma seconde pétition demande au Parlement d'abroger le paragraphe 13(5) de la Loi sur la Société canadienne des postes.
Les facteurs ruraux gagnent souvent moins que le salaire minimum et travaillent dans des conditions dignes d'une autre époque, mais on leur refuse le droit de recourir à la négociation collective pour faire améliorer leurs salaires et leurs conditions de travail. Cette disposition de la loi leur interdit en effet le droit à la négociation collective. Il me fait plaisir de déposer ces deux pétitions.
* * *

La justice


M. Norman Doyle (St. John's-Est, PC):
Monsieur le Président, j'ai une pétition signée par une centaine de personnes qui demandent à la ministre de la Justice de réexaminer en profondeur l'affaire Steven Truscott. Ils croient que ce dernier a été victime d'une injustice. Les pétitionnaires exhortent le juge Kaufman à réexaminer les faits de la cause dans les plus brefs délais et de voir à ce que la justice soit rétablie.
* * *

L'Irak


M. Peter Adams (Peterborough, Lib.):
Monsieur le Président, j'interviens pour présenter une pétition signée par des centaines de citoyens de Peterborough qui ne veulent pas que le Canada appuie une nouvelle attaque américaine contre l'Irak. Il est opportun de présenter cette pétition au moment du débat sur l'Irak.
Les pétitionnaires signalent que le rejet de la violence et la levée des sanctions économiques contre le peuple irakien pourraient nous gagner la bonne volonté des citoyens irakiens et leur ouvrir la voie pour apporter des changements politiques menant à la paix.
Les pétitionnaires exhortent le Parlement à refuser de collaborer de quelque façon que ce soit dans une guerre contre l'Irak et à mettre en oeuvre tous les moyens diplomatiques du Canada pour convaincre les États-Unis, la Grande-Bretagne et les Nations Unies d'opter pour les outils de la diplomatie, et non pour les armes, en vue de rétablir la paix au Moyen-Orient. Les signataires demandent la levée de toutes les sanctions contre l'Irak, à part les sanctions militaires.
* * *

(1530)

La justice


Mme Rose-Marie Ur (Lambton—Kent—Middlesex, Lib.):
Monsieur le Président, conformément à l'article 36 du Règlement, j'ai l'honneur de présenter une pétition au nom des citoyens de London et de la région avoisinante. Environ 325 signataires exhortent le Parlement à demander au ministre de la Justice de procéder, dans un délai raisonnable, à un examen approfondi du cas de Steven Truscott afin que justice lui soit faite.
* * *

La pornographie juvénile


Mme Rose-Marie Ur (Lambton—Kent—Middlesex, Lib.):
Monsieur le Président, je présente une seconde pétition au nom des citoyens de ma circonscription, Lambton--Kent--Middlesex. Les pétitionnaires exhortent le Parlement à protéger les enfants en prenant les mesures nécessaires pour rendre illégal tout matériel faisant la promotion ou la glorification de la pédophilie mettant en cause des enfants.


M. R. John Efford (Bonavista—Trinity—Conception, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai l'honneur de présenter, au nom de Wanda Goodyear, de Lumsden, à Terre-Neuve, une pétition signée par 480 de mes électeurs de ma circonscription, Bonavista—Trinity—Conception.
Les pétitionnaires exhortent le Parlement à prendre les mesures qui s'imposent pour protéger nos enfants de tout matériel de promotion de la pornographie juvénile et pour clairement faire savoir qu'une telle exploitation des enfants sera vivement réprimée.
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La Garde côtière canadienne


M. John Cummins (Delta—South Richmond, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, j'ai le plaisir de présenter aujourd'hui une pétition provenant de résidants de l'île Galiano, port d'attache du Cap Rouge qui a tragiquement sombré en août dernier.
Les citoyens de l'île Galiano notent que le ministère des Pêches et des Océans n'assure plus un financement adéquat à la Garde côtière. Ils souhaitent voir la Garde côtière canadienne devenir un service distinct du ministère des Pêches et des Océans, un organisme indépendant, et ils veulent qu'elle reçoive un financement suffisant pour pouvoir agir et remplir ses fonctions.
* * *

La justice


M. Loyola Hearn (St. John's-Ouest, PC):
Monsieur le Président, je présente aujourd'hui une pétition demandant au Parlement de revoir la cause de Steven Truscott. Il faudrait procéder, dans un délai raisonnable, à un examen approfondi de cette cause. Je suis entièrement d'accord avec les commentaires formulés plus tôt par mon collègue, le député de Pictou—Antigonish—Guysborough. Ses propos étaient tout à fait appropriés à la pétition présentée.


M. Janko Peric (Cambridge, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai le privilège de présenter à la Chambre une pétition venant de citoyens profondément préoccupés et convaincus que M. Steven Truscott a subi un préjudice grave lorsqu'il a été condamné à tort.
Les pétitionnaires veulent attirer l'attention de la Chambre sur le fait qu'en 1959, Steven Truscott, alors âgé de 14 ans, a été accusé, trouvé coupable et condamné à la peine capitale alors qu'à maintes reprises certaines questions s'étaient posées au sujet de l'enquête et de la condamnation. Les pétitionnaires prient le ministre de la Justice d'agir maintenant pour réhabiliter le nom de M. Steven Truscott.
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La pornographie juvénile


M. Jerry Pickard (Chatham—Kent Essex, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai le privilège de présenter une pétition au nom de certains de mes électeurs qui demandent au Parlement de prendre toutes les mesures nécessaires pour veiller à ce que tout matériel ayant trait à de la pornographie juvénile ou à des activités sado-masochistes impliquant des enfants soit déclaré illégal. Je crois que plusieurs autres pétitions ont été présentées à cet égard et que la majorité des Canadiens sont d'accord avec cette pétition.
* * *

(1535)

La recherche sur les cellules souches


M. Jerry Pickard (Chatham—Kent Essex, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai une deuxième pétition qui demande au Parlement d'axer sa législation sur la recherche sur les cellules souches adultes plutôt que sur les cellules souches embryonnaires pour trouver les cures et les thérapies pour des maladies.
* * *

Les affaires autochtones


M. Jerry Pickard (Chatham—Kent Essex, Lib.):
Monsieur le Président, ma troisième pétition demande au Parlement d'agir immédiatement pour régler à l'amiable les litiges liés aux pensionnats, et, notamment, assumer la pleine responsabilité de la poursuite intentée par le Mohawk Institute, reconnaissant par le fait même que le diocèse anglican de Huron n'a jamais été gestionnaire de ce pensionnat.
Le Parlement doit agir afin d'éviter la ruine au diocèse de Huron et à d'autres diocèses anglicans.
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La pornographie juvénile


M. John Bryden (Ancaster—Dundas—Flamborough—Aldershot, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai trois pétitions à présenter qui portent sur deux sujets fréquemment abordés à la Chambre. La première pétition concerne la question d'une meilleure lutte contre le matériel pornographique ayant pour sujet des enfants.
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La recherche sur les cellules souches


M. John Bryden (Ancaster—Dundas—Flamborough—Aldershot, Lib.):
Monsieur le Président, les deux autres pétitions que j'ai le plaisir de présenter à la Chambre aujourd'hui pressent le gouvernement d'axer la recherche sur les cellules souches sur les cellules adultes plutôt qu'embryonnaires.
Cette question a été soulevée à maintes reprises à la Chambre. La présente législature devrait prendre cette recherche très au sérieux parce qu'elle reflète de toute évidence les préoccupations des Canadiens d'un bout à l'autre du pays.
* * *

Questions au Feuilleton


M. Geoff Regan (secrétaire parlementaire du leader du gouvernement à la Chambre des communes, Lib.):
Monsieur le Président, pour le cas où il y en aurait et par mesure de prudence, je demande que toutes les questions restent au Feuilleton.
Le Président: Est-ce d'accord?
Des voix: D'accord.


Le Président:
J'ai une précision à faire à la Chambre. La présidence a commis une erreur, que je m'empresse de corriger maintenant. Il s'agit du projet de loi C-201, Loi sur la protection des droits fondamentaux des dénonciateurs, inscrit au nom du député de Surrey-Centre. Comme ce projet de loi ne figurait pas sur la liste de priorité au cours de la session précédente, il n'y apparaîtra pas plus aujourd'hui, contrairement à ce que j'ai dit précédemment. Il fera partie, comme les autres projets de loi, du tirage au sort visant à déterminer quelles initiatives parlementaires seront inscrites sur la liste de priorité. Je m'excuse auprès de la Chambre pour cette erreur.
* * *

Demandes de documents


M. Geoff Regan (secrétaire parlementaire du leader du gouvernement à la Chambre des communes, Lib.):
Monsieur le Président, poursuivant dans la même veine que mes commentaires au sujet des questions au Feuilleton, je demande que toutes les motions portant production de documents soient reportées.
Le Président: Est-ce d'accord?
Des voix: D'accord.
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Demande de débat d'urgence

Recherche et sauvetage
[Article 52 du Règlement]


Le Président:
La présidence a reçu avis d'une demande de débat d'urgence de la part du député de Delta—South Richmond.


M. John Cummins (Delta—South Richmond, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, je vous remercie de me permettre d'aborder cette importante question.
La sécurité des passagers à bord des avions qui atterrissent à l'aéroport international de Vancouver et qui en décollent est menacée. L'aéroport compte sur la Garde côtière pour offrir des services de recherche et de sauvetage 24 heures sur 24 dans les vasières adjacentes à l'aéroport. Ce service ne peut plus être offert car l'un des deux aéroglisseurs sera mis hors de service de façon permanente à minuit le 4 octobre 2002, au moment où son certificat de navigabilité expirera.
Dans des documents internes de la Garde côtière, on dit au directeur régional de la Garde côtière qu'en octobre 2002, la situation atteindra un point où le programme fédéral de recherche et de sauvetage ne pourra plus assumer ses responsabilités dans les eaux peu profondes entourant la région métropolitaine de Vancouver. On ajoute que le ministère sera blâmé pour les pertes de vie découlant de l'incapacité d'assumer son obligation juridique de diligence.
On retrouve sur l'aéroglisseur des plongeurs de sauvetage capables de venir en aide aux personnes prisonnières d'un avion forcé d'amerrir dans des vasières près de l'aéroport. Le plan d'urgence de l'aéroport est fondé sur la disponibilité d'un minimum de deux aéroglisseurs 24 heures sur 24 pour venir en aide aux passagers, transporter les membres du service des incendies de Richmond et, comme on le dit dans le plan d'urgence, continuer à assurer le transport des victimes ainsi que du matériel et du personnel de sauvetage tant que c'est nécessaire.
Le surintendant de la Recherche et du sauvetage en mer a déjà signalé aux services des incendies locaux que les aéroglisseurs ne pourront plus assurer les services de recherche et de sauvetage pendant certaines périodes, au point qu'ils ne pourront plus répondre rapidement. Le surintendant a précisé également qu'en attendant que la situation soit rectifiée, il serait bon que tout plan d'urgence prévoyant l'utilisation d'aéroglisseurs soit modifié.
Sans service de recherche et de sauvetage par aéroglisseur, le plan d'urgence de l'aéroport est compromis, tout comme la sécurité des passagers à l'aéroport de Vancouver. Le 13 août, la journée de la tragédie du Cap Rouge, seul l'aéroglisseur qui va être mis hors service était disponible et il a éprouvé plusieurs problèmes mécaniques dans le cadre de cette mission de sauvetage.
Le rapport sur les opérations de recherche et de sauvetage dans le cas de la disparition tragique d'une mère et de ses deux enfants ainsi que de deux membres d'équipage à bord du Cap Rouge, recommande d'acquérir le plus tôt possible un appareil de remplacement capable de naviguer sur les énormes vasières du fleuve Fraser.
Nous ne pouvons nous permettre une autre tragédie comme celle du Cap Rouge, où la Garde côtière n'a pas le pouvoir et les ressources nécessaires pour procéder à un sauvetage et doit se contenter de récupérer les corps.
Je vous remercie, monsieur le Président, de m'avoir permis de parler de cette importante question.

(1540)


Le Président:
La présidence a bien sûr pris soigneusement en compte la lettre que le député lui a adressée conformément au Règlement ainsi que les observations qu'il a faites aujourd'hui à la Chambre. Dans les circonstances, cependant, je ne puis conclure que la demande est conforme à l'intention de cet article du Règlement ni qu'elle en respecte les exigences, comme on dit, et je dois par conséquent refuser cette demande à ce moment-ci.

INITIATIVES MINISTÉRIELLES
[L'Adresse]
* * *
[Traduction]

Le discours du Trône

Reprise du débat sur l'Adresse en réponse
La Chambre reprend le débat, interrompu le 1er octobre, sur la motion: Qu'une Adresse soit présentée à Son Excellence la Gouverneure générale en réponse au discours qu'elle a fait à l'ouverture de la session, sur l'amendement et sur le sous-amendement.


Le Président:
La dernière fois que la Chambre a examiné cette affaire, le député de Nouveau-Brunswick Sud-Ouest avait la parole; il lui restait six minutes. Le député de Nouveau-Brunswick Sud-Ouest a donc la parole.


M. Greg Thompson (Nouveau-Brunswick-Sud-Ouest)
Monsieur le Président, hier soir j'expliquais pourquoi le discours du Trône était superflu et pourquoi le fait de proroger le Parlement et de convoquer de nouveau les députés pour entendre un discours du Trône constituait essentiellement une perte de temps pour le Parlement. Pourquoi le discours du Trône était-il superflu? Parce que le discours du Trône qui a suivi l'élection de 2000 contenait 39 promesses. Depuis, nous avons eu deux discours du Trône et seulement un budget. Sur les 39 promesses faites, seulement neuf ont été réalisées.
C'est dire l'importance que le gouvernement accorde à ses propres discours du Trône. Les libéraux ne les prennent pas au sérieux et rompent régulièrement leurs promesses. Le dernier discours du Trône ne fait que répéter une longue liste de choses que le gouvernement veut faire, sans avoir déposé de budget. Le gouvernement ne s'est donné aucun cadre financier à l'intérieur duquel réaliser ses nombreuses promesses.
Je ne les ai pas comptées, mais je crois que le discours du Trône de lundi en énonçait une cinquantaine. Combien seront tenues? Pourquoi croire le gouvernement? Nous n'avons aucune raison de lui faire confiance puisqu'il a tenu si peu des engagements qu'il a pris.
C'est le prix que doit payer le pays pour la détermination du premier ministre à laisser un héritage, et j'ajoute un héritage positif car si le premier ministre partait aujourd'hui il ne laisserait pas grand-chose de positif. Il a eu neuf ans pour remplir des promesses, dont il n'a tenu à peu près aucune. J'aimerais passer en revue la liste de certaines de ces promesses.
Il y a de nombreuses années, le premier ministre avait pris des engagements à l'égard des autochtones et il avait également promis de régler le problème de la pauvreté chez les enfants. Or, le nombre d'enfants qui vivent aujourd'hui dans la pauvreté est plus élevé que lorsque le gouvernement actuel est entré en fonctions. Il a eu neuf ans pour agir, mais il n'a rien fait.
En ce qui concerne nos forces armées, on sait qu'elles manquent de matériels, de ressources humaines et de ressources financières et que le personnel est complètement démoralisé. Le gouvernement n'a tenu à peu près aucune des promesses qu'il a faites au fil des années au sujet de nos forces armées.
Le dossier de la réduction des émissions de gaz à effet de serre est un autre exemple de l'inaction du gouvernement. Quant aux soins de santé, ils constituent le sujet le plus urgent au Canada.
Il y a toute une litanie de promesses creuses qui n'ont pas été tenues. Cela me rappelle un type célèbre de ma région, à St. Stephen, au Nouveau-Brunswick. Bad Cheque Charlie, aujourd'hui décédé, avait l'habitude de faire des faux chèques. Un bel après-midi, il se trouvait dans le commerce de mon père, le commerce familial, et il voulait encaisser un chèque de 100 $. Mon père lui a dit: «Charlie, étant donné ta réputation, qu'est-ce que je dois faire? Il est évident que ce chèque-là est sans provision.» Charlie a répondu: «Ne t'inquiète pas, Ralph. Je reviendrai la semaine prochaine, et je t'en ferai un autre.» N'est-ce pas exactement ce que le gouvernement est en train de faire? Inutile de s'inquiéter des promesses rompues, puisque le gouvernement va faire de nouvelles promesses la semaine prochaine ou dans le prochain discours du Trône, sans avoir l'intention d'y donner suite.
Plus important encore, le gouvernement n'a pas de cadre budgétaire qui lui permet d'honorer ses promesses avant le dépôt du prochain budget. Ce sera la prochaine tuile, car il faut payer et planifier les services du gouvernement. C'est ce qui se passe normalement dans le vrai monde, mais pas au gouvernement.
Je profite de la minute qu'il me reste pour citer un article vedette du National Post:
| Jean Chrétien a laissé entendre hier que les contribuables devraient peut-être accepter une augmentation des impôts pour payer de coûteuses réformes dans les services de santé. Pourtant, il promet de ne pas multiplier les dépenses pendant les 16 derniers mois de son mandat de premier ministre pour nous laisser un héritage. Tout en promettant de continuer à équilibrer le budget national, M. Chrétien a évité de s'engager à réduire les impôts ou à les laisser au même niveau. Il a seulement promis que les impôts seraient «justes et concurrentiels». |

(1545)
Le vice-premier ministre devra peut-être sauter du haut de la tour de la Paix, après tout. Il ne fait aucun doute que, pour donner suite au discours du Trône, le gouvernement devra augmenter les impôts. Attendons le prochain budget. Nous verrons comment le gouvernement entend payer la série de promesses à réaliser pour que le premier ministre puisse laisser un héritage valable, ce qu'il n'a pas su faire jusqu'à maintenant.


M. Norman Doyle (St. John's-Est, PC):
Madame la Présidente, les enjeux auxquels les Canadiens des régions rurales doivent faire face étaient absents du discours du Trône. On n'y parlait pas de la protection des industries essentielles, dont celles de la pêche, de l'agriculture et des forêts. On n'y parlait pas d'un plan pour accroître le nombre de travailleurs dans le secteur de la santé. On n'y parlait pas d'un engagement à fournir du matériel aux militaires et à les aider. Un plan pour veiller à ce que notre environnement ne mette pas notre santé en danger est improvisé et non convaincant. Ces questions revêtent une importance cruciale. Comme le député de St. John's-Ouest l'a dit, on n'y parlait pas non plus de la dette des étudiants.
Le député convient-il que quelques-uns des enjeux les plus importants pour les Canadiens des régions rurales n'ont pas été mentionnés dans le discours du Trône?


M. Greg Thompson:
Madame la Présidente, je tiens à remercier le député car, hier soir, nous avons partagé notre temps de parole sur ce débat très important. Il a tout à fait raison. Les questions rurales, dont l'une est l'agriculture et les autres sont les forêts, la pêche, évidemment, et bien d'autres questions que le député a mentionnées sont absentes du discours du Trône.
Cela illustre bien la façon dont le premier ministre a gaspillé son capital politique en neuf ans de gouvernement. C'est incontestable. Même aujourd'hui, le gouvernement jouit d'une certaine popularité auprès de la population. Les libéraux possèdent un capital politique. Le premier ministre a refusé d'utiliser ne serait-ce qu'une partie de ce capital pour prendre les mesures nécessaires pour faire progresser notre pays.
Il y a un exemple que j'emploie souvent. Aujourd'hui, nous sommes 30 p. 100 plus pauvres que nos voisins américains. Le dollar canadien vaut exactement 63¢ américain. À certains égards, c'est peut-être avantageux pour le commerce, mais quel en est le résultat? Il y a un manque d'efficience et la productivité canadienne en souffre. Nous compensons avec un dollar faible. Les Canadiens devront en payer le prix plus tard. Ce sont les générations à venir qui devront payer.
Il s'agit là de certaines des questions que le premier ministre a refusé d'aborder, parce qu'il a toujours choisi la solution facile. La solution facile consiste à refuser de voir le problème. Les futurs gouvernements en feront les frais.
S'il y a un changement de direction de ce côté-ci de la Chambre et qu'il y a un nouveau premier ministre, Dieu garde cette personne de tout ce dont elle écopera en prenant le gouvernail, car ce ne sera pas joli. Le gouvernement a ignoré tellement de questions au cours des neuf dernières années. Et voilà que le premier ministre essaie de rattraper toutes ces années en 18 mois, de manière à laisser un héritage qui fera sa fierté de même que celle de sa famille et du pays. Il est encore très loin du compte.
Je crois qu'il aura très peu d'aide de ce côté-ci de la Chambre et probablement très peu de l'autre côté, si l'on en juge par le nombre de députés présents lors du discours qu'il a prononcé dans cette enceinte, hier. Je n'ai jamais vu une assemblée aussi réduite de députés ministériels ni un tel manque d'enthousiasme pour un débat sur le discours du Trône.
Hier, plus de 100 députés libéraux manquaient à l'appel alors que le premier ministre était présent à la Chambre pour le débat sur le discours du Trône. Où étaient-ils? La vérité est qu'ils avaient regagné leur bureau pour se cacher parce qu'ils ne sont pas d'accord avec le premier ministre. Ils n'ont pas du tout confiance en lui.
Je ne crois pas que le gouvernement survivra pendant une année, encore moins 16 ou 18 mois.

(1550)


M. Jim Karygiannis (Scarborough—Agincourt, Lib.):
Madame la Présidente, est-ce que le député d'en face rêve en couleurs, regarde la télévision en couleurs ou regarde la réalité en face? Qu'est-ce qu'il ne comprend pas dans les neuf années de mandat et les trois solides majorités que les Canadiens nous ont données coup sur coup?
Il dit que les députés libéraux se cachent sous leur pupitre. Il saura que nous prenons la peine de nous entretenir avec les Canadiens.
Dans quel état d'esprit est-il?


M. Greg Thompson:
Madame la Présidente, le député peut-il nous citer une seule véritable réalisation du gouvernement qu'il représente? Non, car celui-ci n'a rien fait au bout du compte.
La seule réalisation sur laquelle le gouvernement se rabat toujours est la réduction du déficit. C'est vrai qu'il a réduit le déficit, mais le fait est que le Canada est plus endetté aujourd'hui que lorsque les libéraux ont pris le pouvoir; de 550 milliards de dollars, en fait.
[Français]


L'hon. Denis Coderre (ministre de la Citoyenneté et de l'Immigration, Lib.):
Madame la Présidente, à mon tour, c'est avec beaucoup d'honneur que je prends la parole ici à titre de ministre de la Citoyenneté et de l'Immigration, et très certainement à titre de député de Bourassa, afin de participer également à cet extraordinaire effort qu'est le discours du Trône.
Ce discours du Trône intitulé Le Canada que l'on veut/The Canada we want que le gouvernement, par l'entremise de Son Excellence la Gouverneure générale, nous a livré il y a deux jours, démontre à quel point nous avons un gouvernement responsable et également des projets ambitieux mais réalisables.
On a évidemment beaucoup parlé du système de santé auquel nous tenons et que nous voulons. Nous avons également parlé de la place des jeunes et surtout comment trouver une façon de combattre la pauvreté, s'assurer que l'on puisse réduire les problèmes qui existent dans diverses communautés et voir comment nous pouvons travailler pour qu'il y ait une représentativité et un impact encore plus grand dans l'ensemble des communautés. Nous avons parlé de stratégie urbaine, comment travailler pour qu'une meilleure relation s'établisse entre le gouvernement et les citoyens et s'assurer que le Canada prenne pleinement sa place.
[Traduction]
Le discours du Trône est très important. Il décrit l'approche incroyable que nous avons à l'esprit. Nous sommes ici depuis neuf ans et nous avons prouvé que nous formons un gouvernement responsable. Nous avons aussi montré que nous sommes très profonds. Il nous reste encore beaucoup de choses à faire.
Grâce au premier ministre, dont c'est probablement le dernier, le discours du Trône est très inspiré. Le gouvernement et le caucus sont manifestement en prise avec la population.
Il nous faut parler d'une autre question, toutefois. Notre pays est fondé sur l'immigration. L'immigration constitue le fondement de notre maison. Il importe de ne pas l'oublier. Je suis ravi que notre gouvernement se concentre aussi sur l'immigration car, non seulement avons-nous toutes ces statistiques, mais le dernier recensement a montré que, plus qu'un net atout et un catalyseur pour les Canadiens, l'immigration est une question de survie.
[Français]
Le dernier recensement a été très clair. D'ici cinq ans, il va manquer un million de travailleurs qualifiés. D'ici 2011, notre force de travail dépendra uniquement de l'immigration. Cependant, d'ici 2025, notre croissance démographique va dépendre uniquement de l'immigration. Qu'est-ce que cela veut dire?
Cela veut dire que si nous voulons conserver notre qualité de vie, si nous voulons effectivement nous assurer de pouvoir conserver nos programmes sociaux, nous devons utiliser l'immigration comme un outil de développement et d'épanouissement. C'est à partir de ces outils que nous retrouvons dans le discours du Trône que nous allons être en mesure de répondre aux solutions de demain.
[Traduction]
Pour le Canada et la société que nous voulons bâtir ensemble, l'immigration est véritablement la solution. Nous ne considérons pas les immigrants ou les réfugiés comme des terroristes en puissance. À notre avis, il ne faut pas leur fermer la porte. Nous devons adopter une approche équilibrée qui allie vigilance et ouverture. Voilà l'approche pragmatique que nous devons adopter.
[Français]
Il y a évidemment une situation à laquelle nous devons faire face. Cela ne veut pas dire que nous ne prenons pas nos responsabilités. Nous avons à faire face à une situation de concentration.
L'année dernière nous avons eu près de 250 000 nouveaux arrivants. Cinquante-quatre pour cent de ces nouveaux arrivants se sont installés à Toronto, 15 p. 100 à Vancouver et 13 p. 100 à Montréal. De ces pourcentages, il y a bien souvent encore une autre concentration. Même si le port d'entrée est Montréal ou Vancouver, beaucoup de ces nouveaux arrivants se dirigent vers la métropole du Canada, vers Toronto.
Nous devons donc établir ensemble un nouveau partenariat. Nous devons nous assurer de trouver des solutions pour disperser l'immigration et très certainement trouver des outils de rétention pour l'immigration.
C'est pour cette raison que je suis extrêmement heureux d'annoncer que le 15 et le 16 octobre prochains, nous allons avoir une première, une conférence fédérale-provinciale-territoriale, où l'ensemble de mes collègues des autres provinces et des territoires vont travailler en partenariat dans le respect des spécificités et des ententes pour trouver les outils nécessaires afin que nous puissions faire profiter à l'ensemble des citoyens et des régions du pays ce trésor national qu'est l'immigration.

(1555)
[Traduction]
C'est clairement une priorité pour nous. Rappelons qu'à la fin du XIXe siècle et au début du XXe siècle, l'honorable Clifford Sifton, un ministre de l'Immigration exceptionnel et un vrai libéral, a proposé d'excellentes idées pour peupler l'ouest du Canada. Il offrait une parcelle de terrain à ceux qui voulaient venir au Canada et participer à l'édification de ce trésor. De nos jours, cette parcelle de terrain, c'est la connaissance et les compétences. Nous devons mettre en place des conditions gagnantes pour tout le monde, de manière à ce que toutes les régions et tous les citoyens de notre pays puissent recevoir tous les services auxquels ils ont droit, tout en expliquant clairement la voie à suivre à ceux qui veulent venir ici avec leur famille et qui souhaitent vraiment bâtir un avenir pour leurs enfants tout en travaillant dans leur domaine.
Comment pouvons-nous y arriver? Le discours du Trône nous offre tous les outils dont nous avons besoin. L'immigration est un cycle. Il y a d'abord l'arrivée, puis l'intégration et enfin la citoyenneté. Nous voulons construire notre pays grâce à l'apport de nouveaux citoyens, c'est l'objectif que nous visons, mais il faut veiller à appliquer une politique d'ouverture. Nous tenons à ce que chacun ait l'occasion de participer. Nous voulons une stratégie en Ontario, une stratégie au Canada atlantique, une stratégie au Québec et une dans l'ouest du pays. Nous avons aussi besoin de quelque chose dans les territoires et en Colombie-Britannique. Nous devons trouver de bonnes solutions afin que chacun puisse participer.
J'étais ravi de signer, il y a quelques semaines, la neuvième entente entre une province et le gouvernement fédéral dans le cadre de ce qu'on appelle le Programme des candidats de la province. Cela correspond à la vision que nous avons pour les prochaines décennies, puisque la question de l'immigration demeure évidemment toujours d'actualité. Il ne suffit pas de prendre certaines décisions pour clore le dossier à jamais. Les décisions que nous prenons aujourd'hui, les mesures annoncées dans le discours du Trône que nous examinons aujourd'hui, tous les résultats des solutions que nous appliquons, des initiatives que nous prenons, auront des répercussions au cours des 25 prochaines années.
Notre intention était de créer un partenariat avec la Nouvelle-Écosse. J'ai signé une entente avec la Nouvelle-Écosse. Les habitants de cette province auront l'occasion, par l'entremise de leur gouvernement, de créer un nouveau partenariat dans le cadre duquel ils accueilleront de nouveaux travailleurs qualifiés. Au début, ils en accueilleront 200 au cours des cinq prochaines années. Nous avons également inséré des dispositions traduisant la réalité du Canada.
[Français]
J'ai été extrêmement fier de démontrer que l'immigration est non seulement un outil et un facteur d'épanouissement, mais qu'il y avait également une incidence sur notre propre identité. Le respect des langues officielles, le Canada bilingue, la dualité linguistique qui nous est chère et qui représente une valeur fondamentale de notre pays se reflètent dans cette entente. Il s'agit de trouver un outil de développement qui pourra donner une place au soleil et un équilibre entre le rôle des femmes et celui des hommes, francophones et anglophones, qui sera un reflet de l'ensemble des communautés.
J'étais très fier d'annoncer qu'avec l'entente avec la Nouvelle-Écosse, il s'agissait d'une première où il y avait une clause sur les langues officielles. Le peuple acadien pourra aussi participer à cet effort collectif, déterminer les besoins de sa région et assurer effectivement qu'il y aura des travailleurs qualifiés francophones en Nouvelle-Écosse.
[Traduction]
Nous ne voulons pas réinventer la roue. Nous voulons que les choses fonctionnent. Une approche pragmatique s'impose, mais elle doit reposer sur des valeurs. C'est pourquoi il est si important que le partenariat que nous mettons en place soit inclusif. Il y a beaucoup à faire. C'est une situation en constante évolution. Nous devons ensemble nous occuper de tous ces dossiers et rassembler toutes les pièces du casse-tête afin de dégager une image d'ensemble. Il y a beaucoup de choses dont nous devons nous occuper.
J'étais bien sûr plutôt ravi d'annoncer en juin dernier qu'en plus de mettre en oeuvre la nouvelle Loi sur l'immigration et la protection des réfugiés, nous avions parallèlement établi une série de nouveaux règlements qui permettront d'accueillir plus de travailleurs qualifiés, de gens de métier et de titulaires de doctorat, des personnes vraiment intéressées à s'installer ici et à nous aider à bâtir notre pays.
D'autres personnes méritent notre attention. Je vois trop de chauffeurs de taxi. Ils accomplissent un travail fantastique. J'ai d'extraordinaires conversations avec eux. Toutefois, lorsque je constate qu'un microbiologiste ou un médecin d'un autre pays est chauffeur de taxi, je me dis que nous devons faire quelque chose à ce sujet. Nous devons une fois pour toutes mettre l'accent sur la reconnaissance des titres de compétence acquis à l'étranger.

(1600)
C'est pourquoi la conférence fédérale-provinciale-territoriale est si importante. C'est un enjeu non partisan. Tous pourront s'exprimer, et chacun pourra participer au processus, car il concerne le Canada. Il a trait au genre de société dans laquelle nous voulons vivre, au genre de société que nous désirons façonner ensemble et au genre d'avenir que nous voulons donner à nos enfants.
Un des enjeux les plus importants sera la reconnaissance des titres de compétence acquis à l'étranger. Lorsque l'on abordera cet aspect et que l'on travaillera avec d'autres provinces et territoires, nous devrons mettre l'accent sur la coopération professionnelle. Si nous avons besoin de médecins, d'infirmières et d'ingénieurs, nous devrons trouver un processus qui permettra de veiller à ce que les personnes qui arrivent de l'Inde, des Philippines ou d'ailleurs avec leur famille pour nous aider à bâtir ce pays n'aient pas à attendre pendant des années avant de pouvoir réaliser leurs aspirations.
[Français]
J'ai été renversé de constater qu'il y a encore évidemment des choses inqualifiables. Dernièrement, j'étais à Saint-Anne-des-Monts, au cours d'une tournée du Québec, et j'ai rencontré un médecin. Il est d'origine haïtienne. Comme on le sait, la diaspora haïtienne est dans mon comté de Bourassa. J'étais donc très fier de parler avec lui au sujet de ce qui se passe dans son pays d'origine.
Il me racontait qu'il est arrivé au Canada en 1977. Imaginez qu'il est devenu médecin et a pu pratiquer la médecine en 1992. C'est inqualifiable, lorsqu'on sait qu'il y a des problèmes criants et qu'il y a des citoyens qui pensent être des citoyens de seconde classe parce qu'ils n'ont pas les services auxquels ils ont droit. Nous devons nous assurer d'avoir ce processus, une fois pour toutes.
Ce partenariat se fera si, et seulement si, tout en respectant les juridictions, tout en respectant le processus, nous pouvons l'établir avec les corporations professionnelles.
[Traduction]
Je suis d'avis que le Canada, ça n'est pas seulement Toronto, Montréal ou Vancouver. C'est également Kelowna, Okanagan, Chicoutimi--maintenant Saguenay. Et c'est tout aussi bien Corner Brook et Cambridge que Mississauga.
Il nous faut trouver une meilleure solution et c'est pourquoi je proposerai un plan d'action à mes collègues provinciaux grâce auquel nous trouverons les travailleurs qualifiés dont nous avons besoin partout au pays.
Comment est-ce possible? Nous devons tout d'abord adopter une approche pratique et efficace. Nous pourrions accorder un permis temporaire de travail d'une durée de trois à cinq ans. Nous réglons la question de la procédure équitable. Il nous faut aussi respecter les normes canadiennes. Il n'est pas question de diminuer le niveau des normes; nous les respecterons et la procédure sera claire. S'il y a une pénurie d'infirmières et d'infirmiers à North Bay, en Ontario, que nous avons pris toutes les mesures possibles et que nous n'arrivons toujours pas à combler les postes libres, sauf en engageant du personnel de l'extérieur du Canada, et bien, soit! Et nous dirons à ces étrangers: «Vous voulez émigrer au Canada, bénéficier de tous les avantages de ce grand pays et découvrir notre merveilleux patrimoine? Alors nous pouvons nous entraider. Venez vous établir à North Bay avec votre famille et vos enfants, habitez-y entre trois et cinq ans. Au bout de cette période, nous vous accorderons automatiquement le statut de résident permanent.»
Je suis conscient qu'il y a probablement en ce moment des avocats à l'écoute qui se disent que nous ne pouvons contraindre des gens à demeurer dans un endroit en raison de la Charte canadienne des droits et libertés, mais ce n'est pas le cas; c'est déjà prévu dans la loi. Pensez un moment à l'exemple des agriculteurs. Nous avions conclu une entente avec le Mexique et les Antilles stipulant que, lorsque leurs habitants viennent nous aider durant l'été, à l'époque des moissons, ils peuvent bénéficier d'un permis de travail temporaire et travailler dans des endroits précis.
Regardons la réalité en face. Le personnel de la GRC et le personnel militaire ont leur voie toute tracée par les autorités dès qu'ils reçoivent leur diplôme. Voilà une approche pratique. Nous invitons les étrangers à venir au Canada et nous ferons bouger les choses.

(1605)
[Français]
Alors, non seulement c'est une approche pragmatique qui permettra de répondre aux besoins de la population, mais cela garantira aussi un avenir à ceux et celles qui veulent partager ce pays.
Il est tout à notre avantage de travailler ensemble—la totalité des collègues et des partis politiques—, pour trouver une solution parce que ce que nous décidons aujourd'hui aura un impact demain.
Il y a évidemment d'autres éléments sur lesquels nous devons nous pencher. En fait, on parle d'immigration, mais on doit parler de citoyenneté. Nous avons très sérieusement besoin de revoir la législation sur la citoyenneté et nous allons le faire.
J'entendais tout à l'heure mon collègue de la Nouvelle-Écosse, lors des déclarations de députés, parler de la question des criminels de guerre. Je veux qu'il soit clair que, concernant les criminels de guerre, c'est la tolérance zéro. Nous devons faire tout ce qui est en notre pouvoir pour nous attaquer à ce problème. Il n'y a pas de prescriptions en droit public. Toutefois, nous devons nous assurer effectivement qu'il y a de l'efficience. Nous devons nous assurer que nous possédons un mécanisme qui saura répondre à nos besoins et qui saura nous permettre, effectivement, de nous attaquer à la racine même du problème.
Nous devrons également nous pencher sur des questions comme la citoyenneté. Nous devons en faire la promotion. Nous devons nous pencher sur les mécanismes de la citoyenneté. Nous devons nous pencher sur la question de l'adoption. Nous devons nous pencher sur toutes sortes de questions qui touchent les valeurs mêmes de notre pays.
C'est pour cela que nous aurons une nouvelle législation en matière de citoyenneté, que j'ai l'intention de déposer incessamment cet automne.
Évidemment, il y a également toute la question de la révocation de la citoyenneté. Je m'attends à ce que nous puissions travailler de concert avec l'ensemble des collègues pour que je puisse avoir des idées à cet égard. La citoyenneté, c'est important.
Quant à la révocation, il existe plusieurs écoles de pensées. Nous devons nous assurer, effectivement, que nous donnons la pleine valeur à cette citoyenneté, et que si nous voulons révoquer la citoyenneté, il reste à savoir si ce que nous faisons présentement est fait de façon adéquate.
Il y a très certainement un dossier qui nous tient à coeur, soit celui des étudiants étrangers. Nous devons focaliser notre attention sur les étudiants étrangers.
[Traduction]
Les étudiants étrangers sont clairement le ciment qui relient les pays, qu'ils entretiennent des relations bilatérales ou multilatérales. J'ai eu la chance cet été de me rendre en Chine avec des collègues. Nous y avons travaillé à l'élaboration de ce que nous appelons notre stratégie pour la Chine. Bien sûr, des membres de la communauté coréenne sont venus me réclamer une stratégie pour la Corée. D'accord, pourquoi pas? Nous allons en élaborer une.
Il était important pour nous d'aller en Chine car, l'an dernier, nous avons reçu non seulement 40 000 immigrants d'origine chinoise, mais également 14 000 étudiants chinois. Il était très important pour nous de mettre l'accent sur cela et de bâtir là-dessus. Comme les députés le savent, nous avons modifié la loi pour que les gens qui viennent au Canada en tant qu'étudiants étrangers puissent faire une demande sur place et devenir Canadiens. Nous voulons faire plus et mieux. Je crois réellement que ça sera très utile, non seulement pour promouvoir les idéaux canadiens, mais aussi, si ces gens après cela veulent venir au Canada, il sera encore plus efficace de procéder de cette façon.
Enfin, et ce n'est pas là le moins important, je pense qu'il nous faut une approche sectorielle. Dans le dossier des travailleurs qualifiés, je ne vois aucun problème à nous asseoir avec les représentants de l'industrie et des provinces pour trouver la meilleure façon de procéder. Si dans un secteur particulier de l'industrie pharmaceutique nous devons relâcher les règles pour faire venir un plus grand nombre de travailleurs qualifiés dans une région donnée, je n'y vois pas d'inconvénient, mais il nous faut un processus et nous devons être équitables, et ne pas oublier que nous devons suivre une approche équilibrée, entre la vigilance et l'ouverture.
Bien sûr, on pourrait parler des heures entières. Le dossier des réfugiés est lui aussi très important à nos yeux. Nous avions avec les Américains un accord de principe sur les tiers pays sûrs. Nous avons débloqué des ressources pour accroître le nombre des agents de contrôle de l'immigration. Ensemble, nous avons réintroduit une politique de prévention qui nous aidera à nous acquitter de notre devoir international. Nous sommes prêts à aller plus loin cet automne et à discuter de ces dossiers.
Tous ces dossiers concernent le Canada et, en terminant, je dirai que je crois fermement que si nous avions le même rêve qu'avait Clifford Sifton au début du XXe siècle, à savoir offrir un lopin de terre, ce rêve serait aujourd'hui d'offrir la possibilité d'améliorer notre pays et de nous assurer que nous avons les gens qui veulent réellement contribuer; nous réglerons le cas de mauvais éléments qui pensent pouvoir faire ce qu'ils veulent ici.

(1610)
[Français]
C'est avec beaucoup d'honneur que je m'associe à ce gouvernement, que je m'associe à ce discours du Trône, que je m'associe à tous ceux et celles qui veulent trouver cet équilibre entre l'ouverture et la vigilance, et faire de ce pays, encore une fois, le plus beau pays du monde.
[Traduction]


M. Paul Forseth (New Westminster—Coquitlam—Burnaby, Alliance canadienne):
Madame la Présidente, je veux poser deux ou trois questions très précises au ministre. Cela faciliterait certainement le débat aujourd'hui si nous pouvions être certains que le gouvernement est un gestionnaire compétent.
Il a mentionné la catégorie des étudiants étrangers et aussi celle des travailleurs temporaires. Une personne qui vient au Canada dans ces conditions jouit d'un statut spécial. Plus tard dans son discours, il a dit que ces gens pourraient obtenir le statut d'immigrant reçu et demander un jour la citoyenneté. Est-ce que le temps que ces gens passent ici en tant qu'étudiants étrangers ou travailleurs temporaires en vertu d'un contrat spécial compterait lors de la demande de citoyenneté ou est-ce qu'il leur faudrait attendre d'obtenir le statut d'immigrant reçu?
Ma deuxième question concerne la mention qu'il a faite du manque de confiance national à l'égard de notre système de détermination du statut de réfugié. Le ministre a parlé de la question du tiers pays sûr avec les États-Unis. N'a-t-il rien de mieux à dire que «nous aurons d'autres discussions à l'automne»? J'ai demandé à maintes reprises à l'ancienne ministre à la Chambre quand on prendrait enfin des arrangements satisfaisants avec les États-Unis en matière de sécurité. Quand cesserons-nous d'accepter des réfugiés en provenance des États-Unis? Je crois savoir que la proportion de demandes est d'environ 40 p. 100. Nous pouvons certainement faire mieux que simplement tenir d'autres discussions.
Ce sont là les deux points que je voulais soulever: les étudiants étrangers et les travailleurs temporaires et les délais prescrits, et aussi une nouvelle annonce disant que nous allons faire quelque chose pour régler le problème des réfugiés. J'aimerais entendre ce qu'il a à dire à ce sujet.
[Français]


L'hon. Denis Coderre:
Madame la Présidente, je remercie le député de cette question, mais il fait un peu erreur.
Dans un premier temps, quelqu'un doit être résidant permanent pour amorcer le processus de citoyenneté. Donc, tant et aussi longtemps que ce n'est pas chose faite, on ne peut pas entamer le processus de citoyenneté. Cependant, il est important de trouver l'outil nécessaire qui nous permettra de régulariser un système, et surtout de répondre aux besoins d'une société qui est en mal de travailleurs qualifiés.
Il faut trouver une solution concrète qui nous permettra effectivement de porter notre attention sur le problème de la concentration. Si nous voulons faire en sorte d'avoir une immigration dispersée, une immigration où il y aura un taux de rétention, il y a de beaux projets.
Au Manitoba, par exemple, on a commencé avec ce programme de nominations provinciales. Vous avez 200 pour commencer et nous sommes rendus à 1 000. Le taux de rétention est de 91 p. 100.
Je suis aussi heureux de dire que nous avons une entente qui fonctionne extrêmement bien avec Québec. Elle est spécifique; elle est dans la loi. Nous ne voulons pas y toucher. J'ai moi-même rencontré le ministre Trudel il y a quelques semaines, et nous nous sommes entendus sur ces outils de convergence.
C'est important pour les régions, c'est important pour les populations. Si nous ne faisons rien, nous avons des régions qui se vident. Si nous voulons nous assurer d'avoir un facteur d'épanouissement pour la communauté francophone, ou qu'elle soit au pays, nous devons nous assurer d'avoir un processus qui fonctionne. Par les étudiants, par les travailleurs qualifiés qui seront des travailleurs temporaires, nous pouvons régler le problème.

(1615)
[Traduction]
En ce qui concerne les tiers pays sûrs, nous pourrions en parler pendant des heures et tenir un débat sur la question. Je ne suis pas d'accord avec mon collègue au sujet des réfugiés. Nous devons évidemment appliquer un processus mais, au cours des trois dernières années, notre système, conçu pour accueillir entre 25 000 et 29 000 réfugiés, en a reçu entre 45 000 et 49 000. Nous devons faire quelque chose à ce sujet, surtout compte tenu que six réfugiés sur dix entrent par un point frontalier, c'est-à-dire en provenance des États-Unis.
C'est la raison pour laquelle nous avons signé cet accord de principe. Il existe évidemment un processus, que nous devons respecter car, comme les députés le savent, nous sommes liés par un traité. Nous avons signé un accord qui non seulement respecte la façon de faire canadienne mais qui nous aidera à gérer le système à l'échelle continentale à l'égard des personnes qui viennent au Canada et demandent le statut de réfugié.
Depuis 1985 et l'affaire Singh, la loi nous oblige, comme mon collègue le sait, à accorder une audition équitable aux demandeurs. Or, la seule façon que nous ayons de leur assurer une audition équitable est de les renvoyer dans un tiers pays sûr. C'est la raison pour laquelle nous avons signé cet accord et c'est aussi la raison pour laquelle le Haut Commissariat des Nations Unies pour les réfugiés a signé cet accord, dans lequel il a reconnu une mesure très positive.
L'efficience constitue évidemment une priorité. Nous devons constamment améliorer le système, mais je crois fermement qu'il constitue un modèle pour le reste du monde.
[Français]


Le président suppléant (Mme Bakopanos):
Il reste cinq minutes; si tout le monde pose ses questions, et que le ministre répond, on peut entendre cinq députés.
[Traduction]


M. Jim Karygiannis (Scarborough—Agincourt, Lib.):
Madame la Présidente, je félicite chaleureusement mon collègue, le ministre de l'Immigration, d'avoir proposé l'égalisation des titres de compétence des personnes provenant de l'étranger. Les communautés attendaient cette mesure depuis longtemps.
Je voudrais cependant ramener le ministre à ce qui se passe ici au Canada. Je me rappelle de l'époque où je suis arrivé dans ce pays. Les touristes qui venaient ici et qui se plaisaient dans notre pays n'avaient qu'à se rendre à l'intersection University et Dundas et, en quelques mois, elles obtenaient leurs documents. C'était en 1966. En 1967, le Canada a accueilli quelque 223 000 immigrants. Aujourd'hui, avec les progrès de l'informatique, l'accroissement du personnel et de l'information...


M. Scott Reid:
Madame la Présidente, j'invoque le Règlement. Les questions et observations ne sont pas des discours préparés. Je constate que le député lit un texte préparé...


Le président suppléant (Mme Bakopanos):
C'est la période des questions et observations. Je suis au service de la Chambre mais, pour permettre aux députés de poser leurs questions au ministre, celui-ci n'étant ici que pendant un certain temps, j'ai aussi demandé aux députés de se contenter de poser leur question afin que nous puissions obtenir une réponse. Par courtoisie à l'endroit de tous les députés ayant des questions à poser, j'aimerais que le député pose sa question.


M. Jim Karygiannis:
Madame la présidente, la difficulté qui se pose à l'heure actuelle, c'est que des nouveaux arrivants qui sont susceptibles de rencontrer une personne ici et de l'épouser doivent attendre jusqu'à concurrence de trois ans avant que les formalités administratives soient terminées. J'ai discuté de cette question avec le ministre et ses prédécesseurs. Je me demande si le ministre peut nous dire ce qu'il entend faire pour éliminer cette période d'attente de trois ans appliquée dans ma circonscription de Scarborough. Ces personnes sont absolument sans statut. Elles ne peuvent travailler. Elles ne peuvent bénéficier des soins de santé. Qu'arriverait-il si l'une d'elles tombait malade? Ou encore, que se passerait-il si une épouse tombait enceinte? Le nouveau-né serait canadien et le père devrait absorber le fardeau que constituent les frais médicaux liés à l'accouchement. Compte tenu de ce qui précède, je me demande si le ministre a de nouvelles propositions.

(1620)


L'hon. Denis Coderre:
Madame la présidente, répondre à cette question prendrait plus de 30 secondes. De fait, nous avons modifié la mesure législative et les règlements pour nous attaquer à ce genre de problèmes. Il est beaucoup question de travailleurs qualifiés, mais on pourrait aussi parler abondamment de réunification familiale. C'est clairement une priorité pour nous.
C'est aussi une question d'efficience. Nous devons mener une analyse plus approfondie. Chaque cas comporte bien sûr ses particularités, de sorte que nous devrions aborder cette question, mais nous avons à coeur de faire fonctionner le système. Le discours du Trône a montré que c'est une priorité du gouvernement dans le cas de l'immigration. Nous voulons créer un cadre permettant aux personnes qui immigrent au Canada d'amener leur famille. C'est ce à quoi nous nous employons.


M. Svend Robinson (Burnaby—Douglas, NPD):
Madame la Présidente, je sais que le temps est limité alors j'essaierai d'être bref. Je félicite le ministre pour deux initiatives précises. La première concerne le contrôle des consultants en immigration. Nous savons qu'il y a eu de graves abus dans ce domaine. La seconde est la reconnaissance des titres de compétence acquis à l’étranger. Cette mesure s'était déjà trop fait attendre et j'en suis fort satisfait. Je voudrais poser deux questions précises.
Premièrement je demanderais au ministre de nous assurer que la détermination du gouvernement ne fléchira pas et qu'il veillera à traduire en justice au Canada, ou à dénaturaliser et à expulser, tous ceux qu'on soupçonne d'être responsables de crimes de guerre ou tous les présumés criminels nazis.
Ma deuxième question précise porte sur le récent refus d'accorder un visa au ministre des Affaires étrangères de Taïwan qui se trouvait à Seattle et voulait se rendre à Vancouver pour rencontrer brièvement un représentant du bureau économique et culturel de Taïwan à Vancouver. On lui a refusé le visa. C'est scandaleux. Taïwan est une démocratie prospère et dynamique et un excellent partenaire commercial. J'aimerais demander au ministre d'assurer à la Chambre qu'une telle erreur ne se reproduira pas.


L'hon. Denis Coderre:
Madame la Présidente, je voudrais d'abord remercier le député et annoncer que, demain matin, nous tiendrons une importance conférence de presse où il sera précisément question de ce que nous avons l'intention de faire au sujet des consultants en immigration. Nous émettrons un avis majeur et sans équivoque à cet égard.
Quant au cas de son collègue de Taïwan, j'ignore ce qui s'est passé. Peut-être qu'il y a une solution. Une foule de mes collègues viennent me voir lorsque des problèmes particuliers se posent. Nous devrions peut-être examiner la question de plus près, mais il faut toujours trouver un équilibre entre la vigilance et l'ouverture. Je n'entrerai pas dans les détails, mais nous devrions discuter du cas.
En ce qui concerne les crimes de guerre, franchement, c'est la tolérance zéro. C'est la tolérance zéro, et nous voulons bien centrer nos efforts. Ce n'est pas une question de temps ou d'argent, mais d'efficacité. Il ne s'agit pas simplement de la Seconde Guerre mondiale. Cela concerne aussi ce qui s'est produit au Rwanda, au Kosovo et dans plusieurs endroits sur la planète. Nous tenons à ce que le Canada réprouve clairement ces criminels de guerre. Plus particulièrement, l'étude de la loi sur la citoyenneté serait peut-être une formidable occasion de renforcer cela.
[Français]


M. Paul Crête (Kamouraska—Rivière-du-Loup—Témiscouata—Les Basques, BQ):
Madame la Présidente, je suis étonné que le ministre qui, lors du caucus qui a eu lieu au Saguenay, a été accusé par plus de 2 000 manifestants d'avoir induit la population en erreur en promettant pendant la dernière campagne électorale qu'il y aurait des changements majeurs à l'assurance-emploi, ne se lève pas aujourd'hui en cette Chambre, au moment où il peut faire des commentaires sur le discours du Trône, pour dénoncer son gouvernement. Lui-même a fait des promesses, a pris des engagements de changements significatifs pendant la campagne électorale. Il se l'est fait dire au mois d'août, au Saguenay, par 2 000 personnes qui ont très bien compris qu'elles avaient été induites en erreur, qu'elles avaient été trahies par le ministre.
Est-ce que ce ministre ne devrait pas démissionner de sa job, ou prendre une position contre son gouvernement pour respecter les engagements qu'il avait pris, plutôt que de mettre la tête dans le sable et de continuer à faire de la politique? Il avait pris des engagements formels qui n'ont pas été respectés et il a ainsi induit en erreur des gens qui ont été volés de 40 milliards de dollars par le gouvernement, depuis 1993.


L'hon. Denis Coderre:
Madame la Présidente, je trouve cela regrettable. Je suis allé à Rivière-du-Loup à plusieurs reprises; je suis allé dans le comté du député à plusieurs reprises. Les gens me disent: «Monsieur Coderre, on veut avoir des solutions pour permettre justement qu'on puisse se sentir comme des citoyens à part entière. Nous aussi on a notre place au soleil.»
Quand on voit le futur ancien député de Rivière-du-Loup, je pense qu'il a plus intérêt à regarder ce qui se passe dans son comté que d'essayer de faire de la petite politique. Nous sommes ici de façon sérieuse.
Quand il était temps de voter sur ce projet de loi, il était contre, encore une fois, parce que le Bloc québécois a changé sa passion pour sa pension, et il pense juste à des effets temporaires pour essayer de faire de la petite politique.
M. Paul Crête: Vous avez trahi la population.
L'hon. Denis Coderre: Nous n'avons trahi personne ici. Madame la Présidente, je demande que ce député retire le mot «trahi». Il n'y a pas de traître de ce côté-ci de la Chambre.

(1625)


Le président suppléant (Mme Bakopanos):
Je demanderai au député de Kamouraska—Rivière-du-Loup—Témiscouata—Les Basques s'il veut retirer le mot «trahir».


M. Paul Crête:
Madame la Présidente, je maintiens que le ministre a trahi la population en ne respectant pas ses engagements. Cela lui a été dit à Chicoutimi par 2 000 personnes qui nous ont permis de prendre la parole pour les appuyer, alors que vous autres n'osiez même pas sortir de l'hôtel dans lequel vous étiez parce que vous aviez trop peur.


Le président suppléant (Mme Bakopanos):
Le député peut continuer le débat, parce que c'est un débat; il a dit «trahir la population» et ce n'est pas une attaque envers un député ou un ministre.
[Traduction]


M. Paul Forseth (New Westminster—Coquitlam—Burnaby, Alliance canadienne):
Madame la Présidente, je partagerai mon temps de parole.
Je suis intervenu au nom des électeurs de ma circonscription dans tous les débats du discours du Trône depuis les élections de 1993. Les libéraux ont pris l'habitude de donner de vains espoirs aux Canadiens en multipliant les messages réconfortants qui expriment des généralités et présentent de vagues orientations politiques. À première vue, plusieurs des discours du Trône précédents ont créé un espoir temporaire de réalisation nationale. L'administration qui s'en est suivie n'a cependant pas comblé cette attente.
Je tiens à féliciter le gouvernement d'avoir parlé des facteurs économiques fondamentaux du Canada car j'ai toujours dit qu'une économie forte est le fondement d'une société forte. Le gouvernement doit également assurer un juste équilibre des programmes s'adressant à la population en général, notamment dans les domaines de la santé et de l'éducation. Je me demande cependant si certains groupes de revendication d'aujourd'hui seront très heureux du discours du Trône.
Par exemple, le discours du Trône de janvier 2001 avait suscité une certaine attente qui, nous le constatons aujourd'hui, n'a pas été comblée. Le scénario se répète. Voici un passage d'un commentaire de janvier 2001 sur le discours du Trône qui venait d'être livré:
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Le discours du Trône permet de croire que le gouvernement entend faire en sorte que tous les Canadiens partagent la prospérité du pays, et notamment ces gens qui en ont déjà été maintes fois exclus. |
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Nous nous sommes réjouis spécialement de l'accent placé sur la promotion d'une saine démocratie dans laquelle le leadership peut venir de tout le monde. De l'avis du Conseil national du bien-être social, pour que tous les Canadiens partagent les richesses du Canada, il faut assurer le degré le plus élevé possible de participation publique. |
Cette citation est vieille de près de deux ans. Où en sommes-nous aujourd'hui? Qu'est-ce qui a changé pour le mieux? Le gouvernement ne peut pas cacher à quel point il a été décevant. Le présent discours du Trône était vraiment trop prévisible. Intitulé «Le Canada que l'on veut», le document ne reflète pas le gouvernement dont nous avons besoin. Il se résume à une longue et plate liste d'intentions qui réitère en grande partie ce qu'il était nécessaire de faire. Il omet cependant certains points très prioritaires. Bon nombre des points mentionnés auraient dû et auraient pu être réalisés il y a plusieurs années. Ce discours ne va certainement pas inspirer les Canadiens. Ils doivent se dire: «C'est tout?»
Les plus grandes dépenses prévues découleront du Protocole de Kyoto. Le Parlement sera forcé de se prononcer sur cet accord sans véritable estimation des coûts. Il n'y aura probablement pas d'analyse coûts-avantages qui sera déposée au Parlement. Le gouvernement se laissera essentiellement guider par ses sentiments et sa bonne volonté en matière environnementale afin de gagner des votes plutôt que de chercher à défendre les intérêts fondamentaux du Canada sur la scène internationale. La situation financière de la famille moyenne s'est-elle améliorée cette année? A-t-on mis davantage l'accent sur la démocratie participative?
Non, je regrette de le dire, mais nous avons beaucoup parlé de testament politique plutôt que de leadership, de promesses plutôt que de mesures. Nous n'avons fait aucun progrès. En fait, nous avons perdu du terrain et nous continuons de glisser sur l'échelle de l'indice des pays des Nations Unies. Sur le marché international, la valeur de notre dollar n'a jamais été aussi basse. La valeur du dollar est une référence que le gouvernement ne peut dissimuler ni expliquer. Elle représente le jugement que le monde porte sur notre économie et nos perspectives d'avenir. La faiblesse de notre dollar illustre l'incapacité flagrante du gouvernement à satisfaire aux besoins de la population.
Fait important à signaler, le discours du Trône ne lance pas d'ultimatum clair incitant le gouvernement à réformer le système de santé, mais prévoit simplement de nouvelles discussions et négociations avec les provinces. J'ai toujours promis à mes électeurs de féliciter le gouvernement et de lui offrir mon aide lorsqu'il semblait progresser dans la bonne direction. Il est de mon devoir parlementaire de tenir le gouvernement responsable de ses actes lorsqu'il s'écarte du droit chemin ou ne livre pas la marchandise. Je reste également fidèle au principe de proposer des solutions constructives visant à améliorer la situation du Canada.
Je m'oppose au discours du Trône et au gouvernement actuel, parce que le Canada peut faire mieux. J'espère être de nouveau élu, à titre de représentant de l'opposition officielle, au poste de vice-président du Comité permanent des opérations gouvernementales et des prévisions budgétaires. Ce comité pense être en mesure d'innover pour obliger le gouvernement à rendre davantage compte de ses plans de dépenses et pour pouvoir examiner l'efficacité d'une bonne partie des dépenses législatives qui ne sont pas soumises chaque année à l'approbation du Parlement. C'est une question de responsabilité et de probité. Voilà ce que devrait prévoir le discours du Trône.
Le Parlement doit mieux surveiller comment est dépensée la majeure partie de l'argent des contribuables. Ce n'est pas ce qui s'est passé depuis 1993, sous la direction de l'ancien ministre des Finances. En fait, il est tellement déconnecté qu'il a même voté, de façon étourdie, en faveur de la taxe Tobin, à l'occasion d'une motion du NPD.

(1630)
C'est une idée socialiste internationale ésotérique que de vouloir taxer les flux monétaires internationaux et redistribuer le revenu mondial. Que le ciel vienne en aide au Canada si ce coquin parvient à faire ce qu'il veut à titre de premier ministre, compte tenu de son bilan antérieur.
La plus grande réalisation dont il peut se vanter était même une politique qu'il nous a empruntée pour équilibrer le budget. Toutefois, il n'avait pas les moyens d'emprunter tout le programme, y compris une mesure législative sur l'équilibre budgétaire et un plan de remboursement de la dette nationale.
Même en ce moment où, en tant que pays, nous épaulons nos alliés, il ne faut pas que nous cessions de chercher à protéger le mode de vie des Canadiens. Nous devons trouver le juste équilibre entre les besoins liés à la sécurité nationale et le programme à long terme de l'Alliance canadienne pour la création d'une société plus prospère, ouverte et démocratique.
Malgré le manque de leadership du gouvernement, le Canada demeure un des meilleurs pays du monde, un pays prospère où la qualité de vie est plus élevée que dans bien d'autres pays. Nous avons évolué, partant du petit peuple agraire que nous étions au moment de la Confédération pour devenir une puissance économique multiculturelle complexe. Cependant, il ne faut pas oublier que la Seconde Guerre mondiale n'a pas fait de ravages ici et que, à la fin de ce conflit, nous nous sommes retrouvés au sommet de l'ordre social et industriel mondial. Malheureusement, nous n'avons pas su maintenir notre position de leader et nous pouvons même nous compter chanceux de faire encore partie du G-8.
Dans l'économie mondiale axée sur les connaissances, notre position dépendra de l'innovation qui résultera de nos investissements dans l'avenir de la science et de la recherche et dans le développement des compétences. Nous devons faire mieux pour ce qui est des investissements dans la nouvelle technologie, mais nous devons aussi aider les jeunes Canadiens à partir du bon pied. Avec un gouvernement plus attaché aux principes, on pourrait imaginer qu'un jour notre peuple trouverait une culture axée sur la liberté et l'inclusion. Nous avons besoin plus que jamais d'une main-d'oeuvre qualifiée et d'une économie novatrice pour tous.
L'innovation est le pont entre aujourd'hui et demain, entre des idées fraîches et de nouvelles possibilités pour tous les Canadiens. Le Canada doit devenir libre de dettes, tenir l'inflation et le chômage à un bas niveau et devenir plus concurrentiel à l'échelle mondiale en ce qui a trait au régime fiscal et à la structure réglementaire. Les barrières qui nous empêchent de devenir un grand pays sont souvent celles que nous dressons nous-mêmes, comme les mauvaises habitudes socialistes, la politique de l'envie et les querelles régionales.
Ce que je veux dire, c'est que si le Canada n'est plus un leader sur le plan international, c'est sa faute. Nos chances ratées et notre statut de pays perdant sont l'héritage des gouvernements libéraux et conservateurs. Ce qu'il nous faut vraiment, c'est plus de liberté. Nous avons besoin de la liberté fondamentale de pouvoir déplacer des biens, des capitaux et des travailleurs. Nous avons besoin de la liberté d'apprendre grâce à des investissements dans l'éducation et le développement des compétences. Nous avons besoin de la liberté de devenir ce que nous voulons être grâce à la démocratie participative et à la défense des droits.
J'aime mon pays. Il est béni et il est le meilleur au monde. En effet, nous avons un pays merveilleux, et nous avons accompli beaucoup, mais pas parce que nous avons eu des gouvernements remarquables. Nos réalisations ne sont pas le fait de grands dirigeants politiques. Nous sommes privilégiés parce que ce sont les Canadiens qui ont bâti une société remarquable. Les Canadiens ont surmonté les obstacles géographiques. Nous avons transformé les différences culturelles et linguistiques en un avantage au lieu d'en faire un problème. Ce sont les Canadiens qui ont payé le prix de la paix et de la justice. Les cimetières du monde entier où reposent des Canadiens courageux en témoignent.
Les nombreuses vagues d'immigrants ont apporté leur contribution. Il y a eu d'abord plusieurs migrations d'autochtones. Puis, un grand nombre d'Européens et d'Asiatiques sont venus chez nous. Le Canada est devenu une destination porteuse d'espoir et de possibilités. Nous avons une riche mosaïque culturelle, ce qui nous confère un avantage sur la scène internationale.
Cependant, le Canada ne donne pas sa pleine mesure. Nous sommes mal dirigés et nous ne sommes pas gouvernés judicieusement. La vieille habitude qui consiste à élire un gouvernement fédéral conservateur ou libéral n'est plus satisfaisante. Les Canadiens peuvent faire mieux. Le Canada peut se hisser au premier rang si nous abandonnons nos vieilles habitudes lorsque nous nous rendons aux urnes.
Nous devons voter en faveur de l'avenir de nos enfants, et non en faveur d'un vieux préjugé. Nous devons voter en faveur d'une plus grande démocratie, et non dans le sens des intérêts spéciaux d'un gouvernement libéral ou conservateur.
Les Canadiens peuvent se libérer en élisant un gouvernement allianciste. Le Canada a tout ce dont il a besoin pour être le meilleur.
Au cours des deux prochaines années, nous avons pour tâche de nous donner un gouvernement digne du bon peuple canadien. Nous devons voter pour bâtir, et non pour simplement éviter les risques. Nous devons voter pour les réalisations, et non pour les vieilles allégeances. Les Canadiens doivent voter pour se donner une démocratie prospère qui fera une place à tous et qui ne laissera aucune région pour compte.
Le meilleur est à venir pour le Canada. À mon avis, il n'est pas exagéré de dire que le Canada peut devenir le leader mondial qui assurera une paix durable dans le monde.

(1635)


M. Rob Merrifield (Yellowhead, Alliance canadienne):
Madame la Présidente, c'est pour moi un honneur et un plaisir de prendre part au débat sur le discours du Trône à titre de député de Yellowhead et de porte-parole de l'opposition en matière de santé.
Au moment où le Parlement reprend ses travaux, les Canadiens s'inquiètent du système de soins de santé, qui est en difficulté. Ce qu'ils voient et ce dont de trop nombreux Canadiens ont fait l'expérience, c'est un système qui se dégrade et est en proie à des tensions terribles. Il suffit de considérer les grèves qui éclatent d'un bout à l'autre du pays en ce moment, ou les graves problèmes du temps d'attente, qui est proprement phénoménal, ou encore la pénurie d'infirmières et les problèmes de ressources humaines.
Pour ce qui est de la pénurie d'infirmières, on prévoit une croissance des besoins telle qu'il nous faudra 113 000 nouvelles infirmières d'ici 2011. Cela entravera gravement les soins aux patients, à un point que nous avons du mal à imaginer pour l'instant.
Si nous nous comparons aux autres pays de l'OCDE, nous constatons que nous sommes au 18e rang pour l'accès aux appareils d'imagerie par résonnance magnétique, au 17e pour les tomodensitomètres et au 8e pour les appareils de radiologie. Pas étonnant que la confiance des Canadiens dans le système de santé se dégrade.
Ainsi, en 1988, une étude a été effectuée et 43 p. 100 des Canadiens ont déclaré qu'ils jugeaient le système fondamentalement imparfait. L'année dernière, la même étude a été effectuée et on est parvenu au chiffre de 77 p. 100. Il est manifeste que le patient est souffrant.
Le sous-financement et la négligence que nous ont légués les libéraux en matière de santé commencent à faire sentir leurs effets. Le premier ministre et l'ancien ministre des Finances ont procédé à d'énormes compressions dans le milieu des années 1990 et les conséquences de ces mesures prises à l'époque se font sentir maintenant dans notre système de soins de santé.
Le premier ministre et l'ancien ministre des Finances ont annoncé la Commission Romanow il y a près de deux ans. C'était une tentative désespérée de la part du gouvernement libéral d'essayer de gagner plus de temps. C'est exactement ce qui s'est produit. Les libéraux ont ensuite attendu confortablement que quelqu'un d'autre se charge de la sale besogne et s'attaque au grave problème que constitue la réforme du système de santé. Nous attendons le rapport pour novembre de cette année.
Ce n'est pas la première fois que le gouvernement libéral agit ainsi. Nous nous rappelons du Forum national sur la santé en 1997. Son rapport est resté sur les fameuses tablettes. Nous pouvons voir que le gouvernement utilise une fois de plus le même stratagème.
Le gouvernement libéral fait certaines choses bien. Il étudie les soins de santé. Nous avons demandé à la Bibliothèque du Parlement combien d'argent avait été dépensé par le gouvernement libéral depuis 1993 simplement pour étudier les soins de santé. On nous a dit que la somme s'élevait à 243 millions de dollars. Le gouvernement libéral a fait preuve d'un grave manque de leadership en matière de santé au cours des 10 dernières années. Tous les problèmes que je viens de mentionner sont la responsabilité du gouvernement libéral et de personne d'autre.
L'élément clé du discours du Trône en matière de santé était l'annonce de la prochaine conférence des premiers ministres au début de l'année prochaine et des fonds fédéraux qui devront être investis dans la sécurité à long terme de notre système de soins de santé. Mieux vaut tard que jamais, mais avions-nous vraiment besoin d'un discours du Trône pour faire cette annonce?
La plupart des autres points concernant la santé dont il était question dans le discours du Trône consistaient en de vagues promesses sur la protection de la santé, la prévention et la santé des autochtones. Ce sont dans bien des cas des idées recyclées. Il en a déjà été question bien des fois dans d'autres discours du Trône. Nous pourrions parcourir les huit ou dix derniers discours du Trône et constater des similarités dans chacun d'eux.
Voici juste un exemple. Je cite: «Le gouvernement prendra des mesures additionnelles pour réduire l'écart entre l'état de santé des autochtones et des non-autochtones.» C'est un objectif louable, mais il en a été question à bien des reprises auparavant. Pas surprenant alors que les autochtones pensent que le gouvernement n'est pas vraiment sincère à cet égard.
Des chiffres alarmants ont été avancés un peu plus tôt cette semaine. Ils démontrent que le nombre de cas de diabète chez les gens des premières nations est deux ou même trois fois plus élevé que dans la population canadienne en général. Le nombre de cas de tuberculose dans les réserves indiennes est de huit à dix fois supérieur à ce que l'on constate dans la population canadienne en général.
Le gouvernement devrait reconnaître que les politiques actuelles relatives aux autochtones sont défaillantes. Il devrait fixer des objectifs fermes afin de tenter d'améliorer la santé et le niveau de vie des autochtones.
L'engagement du gouvernement face à une approbation plus rapide des médicaments m'a particulièrement inquiété. Nous avons un problème concernant les médicaments au pays et c'est un problème très grave. Jusqu'à 10 000 Canadiens meurent chaque année par suite de réactions évitables à la consommation de médicaments d'ordonnance. Jusqu'à 46 p. 100 de nos aînés se voient prescrire un médicament qui ne leur convient pas chaque année.

(1640)
L'enquête menée sur le cas Vanessa Young a soulevé un certain nombre de problèmes dans le système d'assurance de l'innocuité des médicaments de Santé Canada. Même avec son nouveau nom, la Direction des produits de santé commercialisés mise sur pied par la ministre n'arrive toujours pas à retirer des médicaments du marché.
Comprenez-moi bien. Nous ne nous opposons pas à ce que les bureaucrates travaillent plus rapidement ou plus efficacement en vue d'accélérer le processus d'approbation des médicaments. Il y a du bon là-dedans. Toutefois, il est évident que l'on met la charrue devant les boeufs lorsqu'on fait la promotion d'un processus d'approbation plus rapide avant de se pencher de façon adéquate sur les problèmes de sécurité des médicaments qui existent au pays.
L'une des omissions les plus flagrantes du discours du Trône porte sur le plan gouvernemental en matière de possible attaque bioterroriste. L'an dernier, le gouvernement a promis de mettre un vaccin contre la variole à la disposition de chacun des Canadiens. Le gouvernement ne s'est toujours pas procuré ce vaccin. Où est ce plan à long terme que le gouvernement a promis aux Canadiens? On pourrait aussi se demander où est ce projet de loi sur les techniques de reproduction que le gouvernement a promis également. Ce n'est pas la première fois qu'un tel projet de loi meurt au Feuilleton.
Les Canadiens avaient peut-être des raisons de s'attendre à un certain leadership de la part du gouvernement dans le domaine des soins de santé cette semaine, mais de façon générale, ils ont été cruellement déçus.
Le gouvernement étudiera bientôt les recommandations contenues dans le rapport Romanow. L'opposition officielle devrait lui rappeler certains principes et lui faire certaines suggestions pouvant lui servir de guide pour cet exercice.
L'Alliance canadienne a fait clairement connaître sa position en matière de soins de santé. Nous avons affirmé dans notre énoncé de politiques notre volonté d'«assurer la prestation de soins de santé de qualité, offerts en temps opportun par un système durable, à tous les Canadiens, peu importe leur capacité de payer».
L'Alliance canadienne préconise un financement adéquat, stable et transparent des soins de santé. Il faudra injecter des fonds supplémentaires pour soutenir notre système de santé vacillant et consolider ses assises pour les années et les décennies à venir. Je suis heureux de voir que l'on a reconnu ce besoin dans le discours du Trône. Cependant, les transferts du fédéral aux provinces en matière de santé viennent à peine de dépasser les niveaux de 1993 et 1994. Or, depuis ce temps, la population s'est accrue de 8 p. 100 et les coûts, de 15 p. 100, sans compter que la population a vieilli. La contribution du gouvernement fédéral s'établit donc maintenant à 14 cents pour chaque dollar investi dans les soins de santé. On est bien loin de la formule de financement à parts égales dont profitait la génération précédente.
En injectant plus d'argent dans les soins de santé, le gouvernement devra résister à son inclination naturelle. Je parle évidemment de sa tendance à augmenter les impôts. Les Canadiens ne veulent pas payer plus d'impôts. Croyez-le ou non, nous ne voudrions pas voir le ministre des Finances se jeter du haut de la tour de la Paix. Le gouvernement a réduit le TCSPS de 25 milliards de dollars, tout en réservant une somme de 16 milliards de dollars par année pour des subventions et des contributions douteuses. C'est une question de priorités, ou d'absence de priorités.
On doit cependant noter que l'attribution de sommes supplémentaires, sans apporter d'autres réformes, ne constitue pas une solution viable ou à long terme. C'est ce qu'ont constaté bon nombre des personnes qui se sont penchées sur notre système de santé au cours des quelques dernières années, dont Fyke, Mazankowski, Clair, Kirby et Romanow.
Toute injection de fonds supplémentaires devrait sous-tendre une meilleure reddition de comptes sur l'utilisation de ces fonds. Le gouvernement devrait profiter de l'occasion pour encourager les provinces à réformer leur système de santé et à le rendre plus efficace.
Nous réitérons également notre demande de financement stable pour la santé. Afin d'éviter les compressions unilatérales sans précédent du genre de celles qu'ont infligées le premier ministre et l'ancien ministre des Finances au milieu des années 1990, nous devons inscrire cet engagement dans la Loi canadienne sur la santé.
Il faut moderniser la Loi canadienne sur la santé. Les cinq principes de la loi sont régulièrement compromis. En outre, on reconnaît de plus en plus souvent que la loi ne tient pas compte d'éléments aussi importants que la qualité, la célérité, la viabilité et l'obligation de rendre des comptes. Il faut ajouter de nouvelles dispositions à la loi.
La prestation des soins de santé a changé de manière spectaculaire depuis l'adoption de la loi, en 1984. Du fait de la mise au point de nouvelles technologies, de nouvelles pharmacothérapies et de nouvelles options en matière de traitement, il faut redéfinir ce qui est médicalement nécessaire. Un survol de l'envergure des services couverts par le régime public devrait être entrepris et pourrait faire partie des consultations avec les premiers ministres après le dépôt du rapport Romanow.
Je veux maintenant parler d'un sujet très controversé: la place du secteur privé dans notre système de santé public. Les provinces devraient disposer d'une très grande marge de manoeuvre pour assurer la prestation des soins de santé dans le cadre d'un régime universel de santé, et je dis bien universel.

(1645)
La Loi canadienne sur la santé décourage le paiement par des particuliers de services de santé médicalement nécessaires, mais elle n'interdit ni ne décourage la prestation privée de ces services. Ce n'est pas qui fournit un service qui est important, mais bien que le service soit effectivement fourni et qu'il le soit en temps opportun et dans le respect des normes de qualité, indépendamment des moyens financiers des malades.
Comme notre chef le disait hier, un monopole gouvernemental n'est pas la seule façon de fournir des soins de santé au Canada. La ministre fédérale de la santé ne peut pas empêcher les provinces d'agir dans leur sphère de compétence, et elle ne devrait pas le faire non plus. Que ce soit clair. Aucune province, aucun parti fédéral, y compris l'Alliance canadienne, ne demande la création d'un système privé parallèle.
Enfin, le gouvernement doit aux Canadiens d'agir rapidement et de manière responsable dès que la commission Romanow aura déposé son rapport. La réforme des soins de santé est trop importante pour la mettre une fois de plus en attente. Le gouvernement devrait agir dans les 90 jours suivant la réception du rapport Romanow.
La santé est la priorité numéro un des Canadiens. Il est clair que notre système a besoin d'être régénéré. Il faudra des idées et des approches novatrices pour répondre aux défis pressants que posent l'augmentation des attentes, la hausse des coûts et le vieillissement de la population.
L'Alliance canadienne continuera à débattre vigoureusement de la réforme de notre système de santé avec le gouvernement. Nous nous emploierons à...


Le président suppléant (Mme Bakopanos):
Je suis désolée, mais le temps de parole du député est écoulé.
* * *

Les travaux de la Chambre
[Travaux de la Chambre]


L'hon. Don Boudria (ministre d'État et leader du gouvernement à la Chambre des communes, Lib.):
Madame la Présidente, il y a eu des consultations entre tous les partis à la Chambre. Je suis heureux de dire qu'on s'est entendu sur la motion suivante, et je vais en expliquer le but. Ce soir, nous devions avoir un très long débat sur un sujet de la plus haute importance, l'Irak. La motion nous permet d'avoir un débat plus court ce soir et de poursuivre ce débat demain soir, pour permettre aux députés de prendre la parole à une heure plus raisonnable. En échange, il n'y aura pas d'appels de quorum ni ce soir, ni demain soir. Je propose:
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Que le dernier paragraphe de l'ordre du 30 septembre 2002 concernant le débat exploratoire sur l'Irak soit remplacé par ce qui suit: |
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Que, à l'heure ordinaire de l'ajournement le 2 octobre 2002 et le 3 octobre 2002, la Chambre continue de siéger pour reprendre ledit débat, sous réserve que, durant ledit débat, la Présidence n'accepte ni appel de quorum, ni motion dilatoire, ni demande de consentement unanime pour proposer une motion; que, à minuit le 2 octobre 2002, le débat soit ajourné et la Chambre s'ajourne; et que, à minuit le 3 octobre 2002 ou lorsqu'aucun député ne désirera prendre la parole, selon le cas, la motion soit retirée d'office et la Chambre s'ajourne. |

(1650)


Le président suppléant (Mme Bakopanos):
La Chambre a entendu les termes de la motion. Plaît-il à la Chambre de l'adopter?
Des voix: D'accord.
(La motion est adoptée.)
* * *

Le discours du Trône
Reprise du débat sur l'Adresse en réponse
[L'Adresse]
La Chambre reprend l'étude de la motion: Qu'une Adresse soit présentée à Son Excellence la Gouverneure générale en réponse au discours qu'elle a prononcé à l'ouverture de la session, ainsi que de l'amendement et du sous-amendement.


Mme Lynne Yelich (Blackstrap, Alliance canadienne):
Madame la Présidente, le député pourrait-il me dire s'il croit qu'il existe, comme on le mentionne dans le discours du Trône, un processus tout prêt et rapide de réglementation des drogues, aussi bien les drogues illicites que les médicaments d'ordonnance? Pourrait-il nous dire ce qu'il a pensé de ce passage du discours du Trône?


M. Rob Merrifield (Yellowhead, Alliance canadienne):
Madame la Présidente, il est difficile de savoir exactement ce qu'il y a dans le discours du Trône étant donné qu'il est tellement vague.
On y trouve quelques allusions aux drogues illicites. Nous connaissons tous le problème des drogues illicites dans notre pays. Il est aigu, quoi qu'en disent nos amis du Sénat. Ils voudraient peut-être qu'on légalise la marijuana. Je crois que nous avons un sérieux problème avec les drogues illicites, mais ce n'est pas l'objet de la question.
La question a trait à l'accélération du processus d'approbation des médicaments d'ordonnance. Nous devrions examiner sérieusement le sujet, car cela présente des côtés positifs en ce sens que des médicaments tous récents à effet plus rapide ainsi que des technologies toutes nouvelles présentent certains avantages.
À mesure qu'on avancera dans le XXIe siècle, on recourra beaucoup plus souvent aux pharmacothérapies qu'on ne le faisait auparavant. Cependant, si nous en approuvons davantage avant de nous attaquer aux abus qui existent actuellement dans le système, nous commettrons une terrible erreur. Nous devons remédier au problème de l'abus des médicaments d'ordonnance. Cela prend les proportions d'une épidémie. C'est une chose dont nous avons très peu parlé à la Chambre et il est grand temps que nous commencions à le faire.


M. Jerry Pickard (Chatham—Kent Essex):
Madame la Présidente, je partage mon temps de parole avec le député de Scarborough—Agincourt.
Le 30 septembre a marqué une date importante pour le gouvernement, car ce dernier a énoncé un plan d'action ambitieux pour l'avenir du Canada. Le discours du Trône de 2002 fait un survol des mesures qu'entend prendre le gouvernement libéral pour assurer des possibilités toujours meilleures à tous les Canadiens.
Depuis son élection en 1993, le gouvernement libéral a travaillé étroitement avec les Canadiens pour créer un environnement économique et social bénéfique pour tous nos concitoyens. Personne ne niera que l'ancien gouvernement avait laissé le Canada dans un état de grand délabrement en 1993. Outre un déficit immense et l'absence de direction, notre pays avait subi une baisse de sa cote de crédit, les taux d'intérêt atteignaient des niveaux intolérables et les conditions générales ne satisfaisaient personne.
Les Canadiens ont évalué la performance de l'ancien gouvernement et l'ont à toutes fins pratiques rayé de la carte. À juste titre d'ailleurs, car il n'avait aucun programme et était déconnecté de la réalité que vivaient les Canadiens. Ces derniers lui ont retiré leur appui.
Je constate aujourd'hui que la réalité canadienne demeure aujourd'hui encore étrangère à de nombreux députés de l'opposition. Les Canadiens me disent que depuis 1993, le gouvernement a fait un travail fabuleux sur le plan économique. Il a considérablement réduit le déficit et nos échanges commerciaux avec les autres pays se sont accrus de façon spectaculaire.
Aujourd'hui, nos échanges commerciaux avec les États-Unis atteignent quelque 2 milliards de dollars par jour. Nous avons fait des progrès remarquables.
L'opposition soutient que le gouvernement n'a rien fait pour les soins de santé; je lui rappelle que le gouvernement a signé, en septembre 2000, une entente en vertu de laquelle il s'engageait à injecter 21 milliards de dollars dans l'amélioration des soins de santé.
Voyons certaines mesures annoncées dans le discours du Trône. Comme tous les députés le savent bien, le discours du Trône n'énonce pas en détails toutes les mesures que le gouvernement entend prendre. Il établit plutôt une orientation et trace les grandes lignes de ce que le gouvernement entend réaliser dans des domaines importants. En fait, le discours du Trône fixe les priorités pour les Canadiens, et les soins de santé constituent dans le dernier discours une priorité de premier plan.
L'une des mesures ambitieuses prises durant la dernière législature était indubitablement la nomination de M. Roy Romanow, qui a été chargé d'examiner les soins de santé au Canada, de consulter tous les spécialistes du domaine, les députés et les provinces. C'était une tâche énorme.
Je me souviens qu'il venait au Parlement pour écouter les députés exposer leurs idées et le point de vue de leurs électeurs concernant ce qu'il fallait donner au système de santé pour qu'il s'améliore.
Il faut du temps pour cela et il est certain qu'en prenant connaissance du discours du Trône, nous constatons que le rapport Romanow sera déposé cet automne. Il a été clairement indiqué dans le discours du Trône qu'au printemps prochain, le gouvernement établira un plan complet pour tenir compte des recommandations mises de l'avant par M. Romanow. Il faut être déconnecté de la réalité pour laisser entendre, comme certains le font, que le gouvernement ne prend pas la question au sérieux, ne consacre pas beaucoup d'efforts au dossier du système de santé et n'est pas intéressé. Je souligne que si nous envisageons l'établissement d'un plan exhaustif en 2003, cela ne veut pas dire que tous les problèmes du système de soins de santé sont résolus pour autant.

(1655)
Cela signifie simplement que nous allons élaborer un plan. Nous allons prévoir des mesures sur lesquelles il sera possible de travailler. Nous examinerons la question de la pénurie de médecins. Nous jetterons un coup d'oeil aux installations où il pourrait y avoir des restrictions de médicaments et une population vieillissante. Tous ces éléments sont importants dans un plan exhaustif et il est impossible de les traiter en une minute ou deux, comme l'opposition le laisse entendre.
Le premier ministre a clairement fait savoir que la priorité va aux enfants et aux familles à faible revenu. Dans le discours du Trône, il a été question des familles et du soutien aux familles, de l'énergie consentie pour aider ces enfants qui ont besoin de soins et de prestations additionnelles. Nous savons que l'éducation est un élément essentiel pour donner le plus de chance possible aux jeunes Canadiens.
Le gouvernement a déclaré que la qualité de vie, le partage de la prospérité économique, l'amélioration des avantages consentis aux familles à faible revenu et l'accès à une éducation juste et appropriée pour tous les jeunes sont des priorités de premier plan. C'est extrêmement important quand nous songeons que, dans l'avenir, ce sont nos jeunes qui dirigeront la nation et seront responsables de tous les progrès qui seront réalisés. Pour moi, c'est clair.
J'entends l'opposition évoquer les coûts énormes de l'accord de Kyoto, mais je n'ai pas entendu un mot au sujet des retombées positives ou des engagements partout dans le monde. J'étais au Japon, la semaine dernière. La première chose que les Japonais ont recommandée à la délégation canadienne, c'est de veiller à ce que l'accord de Kyoto soit approuvé. Pourquoi? Parce que c'est important pour la collectivité mondiale.
Il est important qu'un pays comme le Canada exerce un rôle de chef de file à l'échelle mondiale en matière d'assainissement de l'environnement. Il est important que nous mettions en place des mesures et des activités qui amélioreront nettement l'avenir des jeunes et des générations futures. Je suis convaincu que, si nous analysons l'accord de Kyoto, nous constaterons qu'il peut comporter de grands avantages.
Il y a, dans ma circonscription, une usine d'éthanol qui ressemble à toutes les usines du genre que l'on trouve partout aux États-Unis et dans certains autres pays. Cette usine d'éthanol est de calibre mondial. Elle produit d'énormes quantités de combustibles verts qui, comme on le sait, si l'on s'y arrête, profitent énormément à la société. Elle élimine beaucoup de problèmes graves de pollution dans nos grandes villes. Elle contribue à l'emploi dans les exploitations agricoles et les collectivités rurales du pays. C'est une installation dont nous pouvons nous servir pour améliorer notre environnement, la qualité de l'air que nous respirons et, parallèlement, pour fournir de l'emploi à des Canadiens et bâtir une nation plus solide.
Il ne fait aucun doute que le Protocole de Kyoto permettra l'exécution de nombreux projets utiles en matière d'environnement afin de rendre notre pays plus fort et d'améliorer la santé de nos générations futures et l'environnement. J'ai hâte de participer au débat sur le Protocole de Kyoto.
Je suis convaincu que nous devons faire preuve de discernement dans le choix de nos orientations pour l'avenir et que nous devons être disposés à discuter de tous les problèmes. Ce n'est pas vraiment le gouvernement qui fixe toutes les étapes et qui détermine combien coûtera chacune d'entre elles. Il est important que nous prêtions l'oreille à l'industrie et que nous discutions des obstacles et des débouchés que l'industrie peut voir dans un document comme l'accord de Kyoto.
Il est important que nous nous arrêtions au programme d'infrastructures que nous avons proposé. À la frontière, Windsor est le goulot d'étranglement des échanges commerciaux du Canada. Nous devons envisager une infrastructure qui permettra de corriger cette situation et d'apporter des changements énormes pour nous.

(1700)
Selon moi, le discours du Trône établit une orientation qui permettra de donner suite aux remarquables mesures de développement mises de l'avant par les libéraux au cours des dernières années. Je suis absolument convaincu que le Canada se trouve dans une bien meilleure situation que ce n'était le cas sous un gouvernement conservateur, alors qu'il y avait une dette énorme et que le déficit augmentait de 42 milliards de dollars par année.


Le président suppléant (Mme Bakopanos):
Avant de passer aux questions et observations, parce que nous avons des lecteurs avides du hansard, je veux m'assurer que tout le monde a bien compris la motion qui a été présentée plus tôt, parce qu'une question a été soulevée au sujet de la date. Je veux lire à la Chambre la motion exacte que nous avons tous adoptée:
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Que, à l'heure ordinaire de l'ajournement le 2 octobre 2002 et le 3 octobre 2002, la Chambre continue de siéger pour reprendre ledit débat, sous réserve que, durant ledit débat, la Présidence n'accepte ni appel de quorum, ni motion dilatoire, ni demande de consentement unanime pour proposer une motion; que, à minuit le 2 octobre 2002, le débat soit ajourné et la Chambre s'ajourne; et que, à minuit le 3 octobre 2002... |
Et non octobre 2003, comme on l'a dit plus tôt:
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[...] ou lorsqu'aucun député ne désirera prendre la parole, selon le cas, la motion soit retirée d'office et la Chambre s'ajourne. |
Nous passons aux questions et observations.

(1705)


M. David Chatters (Athabasca, Alliance canadienne):
Madame la Présidente, je n'ai pu m'empêcher de remarquer dans l'intervention du député les nombreuses allusions à l'accord de Kyoto. Je suis toujours effaré lorsque j'écoute des députés libéraux qui ne semblent rien comprendre à cet accord et l'appuient tout de même.
Le député parle de l'amélioration de la qualité de l'air et de la diminution de la pollution atmosphérique. Or, l'accord de Kyoto porte sur la réduction des émissions de CO2, un gaz essentiel à la vie sur notre planète. Dans beaucoup de serres, on pompe du CO2 pour mieux faire croître les plantes. Le député m'expliquerait-il comment la réduction des émissions de CO2 va assainir l'air et comment, si le Canada verse des milliards de dollars à la Russie pour acheter des crédits à ce pays qui produit six fois plus de CO2 que nous, cela aidera à assainir l'environnement chez nous?


M. Jerry Pickard:
Madame la Présidente, le député pêche par naïveté s'il pense que les députés libéraux ne savent pas ce qui se passe.
Je crois que c'est plutôt l'Alliance qui est déphasée, comme le montre le nombre de ses députés. Je ne crois pas qu'il soit jamais arrivé au gouvernement de perdre des sièges ou des appuis. En réalité, si nous ratifions l'accord de Kyoto et si nous commençons à nous intéresser aux combustibles verts, nous améliorerons la qualité de l'air dans tous les pays du monde. C'est l'oxygène qui est indispensable à tous les animaux qui respirent. Le CO2 favorise de son côté la croissance des plantes.
Le député a raison sur un point, mais seulement à moitié, comme toujours. Il ne comprend pas ce qui se passe lorsque les émissions de CO2 sont trop abondantes. Il y a toutes sortes de problèmes dans les villes, le climat de toute la planète se réchauffe, l'équilibre naturel est rompu dans notre pays et nous avons des problèmes de smog et d'émissions de gaz. Ils sont causés par toutes sortes d'autres problèmes. Dans les serres, nous ne provoquons pas de déséquilibres. Nous nous préoccupons de l'environnement des gens et nous cherchons les meilleures possibilités qui s'offrent à nous pour avoir un air sain et une bonne teneur en oxygène.


M. Loyola Hearn (St. John's-Ouest, PC):
Madame la Présidente, j'ai écouté avec intérêt les commentaires de mon collègue de l'autre côté. Peut-il nous dire, parce que personne ne l'a fait jusqu'ici, en quoi consiste le plan du gouvernement à l'égard des exigences de l'entente de Kyoto et combien il en coûtera aux contribuables canadiens?


M. Jerry Pickard:
Madame la Présidente, lorsque les gens s'informent sur la nature de l'accord de Kyoto, ils demandent clairement au gouvernement de préciser le caractère des restrictions. Ils se moquent bien des déclarations de l'industrie. Ils ne s'intéressent pas aux consultations tenues avec ce secteur. Ils ne se soucient aucunement des sentiments des gouvernements provinciaux à l'égard de certaines questions. Ils ne souhaitent pas ce type de consultation. Ils se désintéressent totalement du point de vue des députés de la Chambre. Les contribuables veulent simplement que le gouvernement établisse des règles en relation avec ces opinions. Ils veulent avant tout que le gouvernement adopte une législation et qu'il ne soit pas aussi flexible.
Depuis mon entrée à la Chambre des communes, on demande au gouvernement d'être plus ouvert et plus réceptif aux idées et d'accepter l'apport des autres intéressés lorsqu'il le peut. L'entente de Kyoto revêt une très grande importance. Des projets de lois seront déposés à la Chambre. Le discours du Trône n'est pas le moment de déposer de tels projets. En même temps, il faut prévoir une foule de consultations, un travail extensif avec le secteur de l'industrie et une collaboration soutenue avec les autres gouvernements pour s'assurer que le résultat sera entièrement satisfaisant. Ces gens-là n'ont vraiment rien compris.


M. Werner Schmidt (Kelowna, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, le discours du Trône n'a même pas fait allusion à une répartition plus juste et équitable des fonds réservés aux infrastructures, plus particulièrement en ce qui a trait à la taxe d'accise sur l'essence. Quand le gouvernement adoptera-t-il une attitude plus juste face à une répartition équitable de ces fonds? Il a recueilli 572 millions au titre de la taxe d'accise sur l'essence.

(1710)


M. Jerry Pickard:
Monsieur le Président, je crois que le projet du gouvernement s'est avéré équitable pour ce qui est de l'essence et de toutes les formes d'énergie au pays. Nous travaillons à développer de nouvelles stratégies et nous nous penchons actuellement sur l'énergie éolienne et sur d'autres formes d'énergie. Notre gouvernement est progressiste et nous faisons la promotion des combustibles verts. Nous voulons assainir l'environnement. En conséquence, nous étudions de près les politiques qui pourraient nous permettre d'y arriver.


M. Jim Karygiannis (Scarborough—Agincourt, Lib.):
Monsieur le Président, le discours du Trône, si éloquemment résumé par bon nombre de députés au cours des derniers jours, présente le cadre dans lequel nous gouvernerons le pays au cours de l'année à venir.
Notre plan d'action assurera un meilleur avenir à tous les Canadiens et établira un bon équilibre entre les dépenses dans le secteur social et la responsabilité fiscale. Il prévoit entre autres des engagements à l'égard de l'équilibre budgétaire, du remboursement de la dette nationale, des investissements dans le secteur des soins de santé, de la famille et des enfants et de la protection de l'environnement. Ces initiatives n'ont rien de nouveau pour les Canadiens puisqu'elles ont déjà fait l'objet de promesses au cours de la dernière campagne électorale.
Santé Canada a longtemps constitué l'une des principales préoccupations de la plupart des Canadiens. C'est de loin le dossier qui préoccupe le plus les électeurs de ma circonscription, Scarborough—Agincourt. Le gouvernement fédéral doit faire plus pour assurer à tous les Canadiens l'accès à des soins de santé en temps opportun. Les principes énoncés dans la Loi canadienne sur la santé doivent être appliqués partout au pays. Les provinces et les territoires doivent disposer des ressources nécessaires pour les faire appliquer. Je suis heureux que le gouvernement se soit engagé à se pencher sur les préoccupations relatives aux soins de santé en convoquant une conférence sur la santé réunissant tous les premiers ministres au début de l'année prochaine.
Afin de concrétiser notre promesse électorale de réduire la pauvreté chez les enfants, nous majorerons les montants alloués à des programmes tels que les garderies subventionnées, les suppléments de revenus pour les familles pauvres et le logement social subventionné.
Nous maintenons par ailleurs notre engagement à l'égard de l'amélioration des infrastructures de nos villes, de manière à assurer que des systèmes de transport respectueux de l'environnement aideront à réduire la congestion dans nos villes et les embouteillages dans nos axes commerciaux. Je salue ces initiatives et j'attends avec impatience l'adoption rapide de mesures législatives dans ce sens.
Le discours du Trône énonce aussi notre engagement à l'égard de l'accord de Kyoto. Le chef de l'opposition officielle nous a dit, hier, que son parti ferait tout en son pouvoir pour empêcher la ratification du Protocole de Kyoto. Si par miracle son parti formait un jour le gouvernement, il résilierait l'entente.
Les faits sont clairs. Depuis quelques années, les Nations Unies ont consulté quelque 2 500 experts scientifiques de haut niveau. Ceux-ci ont conclu que les humains avaient un impact très important sur le changement climatique mondial. Ils nous ont pressés d'agir sans tarder pour changer notre mode de fonctionnement et notre mode de vie.
Nous pourrions les passer tous en revue, les accords internationaux ne sont jamais parfaits. L'accord de Kyoto est loin d'être parfait. Pourtant, celui-ci constitue la résolution d'un certain nombre de pays, particulièrement des pays riches et industrialisés, de changer de mode de fonctionnement et de mode de production de biens de consommation afin de sauver notre planète. Alors que les pays les plus riches et privilégiés ont causé pratiquement tous les dommages, ils ont aussi bénéficié le plus du développement incontrôlé des dernières décennies. Parallèlement, des pays innocents, notamment des pays en voie de développement, ont subi les dommages causés par les pays riches et développés.
Une question qui préoccupe beaucoup nombre de mes électeurs est celle de l'immigration. Le gouvernement s'est engagé à s'assurer que les immigrants qui viennent de toutes les régions du globe puissent s'intégrer plus rapidement à la société canadienne et profiter des possibilités qui leur sont offertes.
Le gouvernement dit qu'il travaillera avec ses partenaires pour éliminer les obstacles à la reconnaissance des titres de compétence acquis à l’étranger et qu'il accélérera l’entrée des travailleurs qualifiés déjà assurés d’un emploi au pays. Il fera également du Canada une destination de choix pour les étudiants étrangers talentueux et les travailleurs qualifiés, grâce à une sélection et à un recrutement plus soutenus dans les universités et par l’entremise de nos ambassades clés à l’étranger. Je félicite le gouvernement de prendre cet engagement. Je sais qu'il lui faudra, pour tenir cet engagement, collaborer avec les provinces, les territoires et les organismes de réglementation, mais ces mesures auraient dû être prises depuis longtemps déjà.
Une autre question dont ne fait pas état le discours du Trône est celle du manque de personnel dans les bureaux de l'Immigration situés dans nos ambassades à l'étranger, pénurie qui impose des attentes excessivement longues aux personnes qui veulent immigrer au Canada. Il s'agit pour la plupart des épouses, maris, frères, soeurs ou parents de citoyens canadiens qui les parrainent et qui, sans l'avoir mérité, doivent attendre jusqu'à deux ans pour voir leur famille enfin réunie.

(1715)
Les statistiques démographiques montrent clairement que le Canada a et aura besoin d'immigrants pour assurer la prospérité économique de sa population vieillissante. Cette question ne figure pas dans le discours du Trône, mais je puis assurer à la Chambre et aux électeurs de Scarborough--Agincourt que je la soulèverai tant qu'on n'y aura pas trouvé une véritable solution.
Il y a une chose qui m'inquiète depuis longtemps. Des jeunes viennent au Canada dans l'espoir de recommencer à neuf et ils se trouvent ici un mari ou une femme. Une fois qu'ils sont mariés ici, au Canada, celui des deux qui a la citoyenneté canadienne peut parrainer son conjoint. L'affaire rebondit à Vegreville. Le bureau de Vegreville doute-t-il de leur mariage ou soupçonne-t-il un cas de bigamie ou croit-il que le conjoint vient d'un pays d'où nous arrivent beaucoup de réfugiés? Toujours est-il que le bureau de Vegreville transfère alors cette décision au bureau local.
Si quelqu'un a le malheur de vivre dans une région comme celle de Toronto, Montréal ou Vancouver, et notamment dans ma circonscription, celle de Scarborough—Agincourt, il se peut qu'il attende jusqu'à trois ans avant d'avoir une audience avec un agent d'immigration; il n'attendra pas un, deux ou 12 mois, mais bien de 30 à 36 mois. Ces délais ont augmenté lentement. Pourtant, quand on a saisi de la question les différents ministres de l'Immigration qui se sont succédé, ils ne nous ont malheureusement pas écoutés.
Une chose que nous pourrions faire, c'est traiter plus rapidement les cas des conjoints et leur accorder la priorité. S'ils doivent attendre de 30 à 36 mois, nous pourrions alors facilement leur dispenser des soins de santé et leur octroyer un permis de travail.
Si une jeune femme vient au Canada, qu'elle épouse un de nos fils et qu'elle tombe enceinte, elle sera finalement hospitalisée et, malheureusement, son mari, immigrant reçu ou citoyen canadien, devra payer entre 10 000 $ et 15 000 $ pour la naissance de son enfant. Il s'agit ici de la naissance d'un enfant canadien, d'un enfant qui vient au monde et qui sera un contribuable jusqu'à la fin de ses jours. Pourtant, nous imposons un fardeau financier à ses parents pour qu'il vienne au monde ici. C'est une grave injustice. Nous devons intervenir fermement et rapidement.
Si une de mes filles rencontrait un jeune homme, qu'ils voulaient tous deux se marier et que le jeune homme souhaitait subvenir aux besoins de sa famille, il serait embêté. Il ne pourrait le faire.
J'implore le gouvernement de trouver des solutions afin que les dossiers de ces jeunes couples soient traités rapidement. Nous devons travailler avec eux au lieu de leur nuire. Nous devons les aider à commencer une nouvelle vie. Travaillons avec eux afin qu'ils deviennent des citoyens productifs de notre pays. Nous faisons venir de gens d'outre-mer. Pourquoi n'aidons-nous pas aussi ceux qui sont ici?


M. David Chatters (Athabasca, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, le député a évoqué l'influence catastrophique de l'homme sur notre climat. Encore une fois, cette référence me tracasse. La science révèle que 3 p. 100 des émissions mondiales de CO2 sont le fait de l'activité humaine et que 97 p. 100 des émissions de CO2 proviennent de causes naturelles. Comment ces 3 p. 100 peuvent-elles avoir un effet aussi catastrophique sur notre environnement?
Son collègue qui l'a précédé a décidé de ne pas répondre à ma question au sujet de l'envoi de milliards de dollars à la Russie. Ce pays produit six fois plus d'émissions de CO2 que le Canada. Comment cela peut-il aider notre environnement?

(1720)


M. Jim Karygiannis:
Monsieur le Président, je vais revenir à mon allocution et réitérer ce qui suit. Ce sont les pays innocents, dont les petits pays en développement, qui souffrent des effets causés par les pays riches et industrialisés.
Nous vivons dans un pays où les gens prennent leur voiture pour se rendre au dépanneur. Ailleurs dans le monde, les gens n'ont pas ce luxe. J'ai visité des pays où les enfants doivent transporter de l'eau sur une distance d'un mille pour avoir de quoi à boire. Ici, au Canada, les gens ne réfléchissent pas avant de monter dans leur voiture pour aller acheter du lait ou du pain au dépanneur.
Nous devons modifier nos habitudes. Nous devons changer notre façon de penser. Nous devons ratifier l'accord de Kyoto, pas demain, ni dans 10 ans, mais le plus rapidement possible.


M. Loyola Hearn (St. John's-Ouest, PC):
Monsieur le Président, je voudrais poser deux petites questions au député.
Il a parlé d'augmenter le revenu des familles démunies. J'imagine que ce sera fait au moyen du crédit d'impôt pour enfants et je me demande si, d'après le député, on pourra donner aux familles défavorisées une somme suffisante pour les sortir du cycle de la pauvreté, comme il le dit.
En second lieu, le député n'est-il pas consterné, comme d'autres devraient l'être d'ailleurs, devant le fait que nulle mention n'a été faite de l'aide à apporter aux personnes désireuses de poursuivre des études postsecondaires? Nous avons deux catégories de jeunes. Les jeunes de la première catégorie font des études postsecondaires au terme desquelles ils se retrouvent très lourdement endettés, ce qui, généralement parlant, les incite à partir travailler à l'étranger. Les jeunes de la seconde catégorie sont effarés par la cherté de ces études et, comme ils sont issus de familles démunies ou de régions éloignées des établissements d'enseignement, ils décident qu'ils n'ont de toutes façons pas les moyens de les faire.
Qu'a prévu le gouvernement dans le discours du Trône pour aider ces gens? Je n'y ai rien trouvé.


M. Jim Karygiannis:
Monsieur le Président, je remercie le député d'avoir posé une question si importante. Je crois qu'on met en pratique ce que l'on prêche. Je vis dans la circonscription que je représente. Je travaille dans ma circonscription pour les électeurs qui s'y trouvent. De plus, j'encourage mes enfants et mon épouse à faire leurs achats dans cette circonscription.
J'ai quatre filles qui fréquentent présentement l'université. Je leur ai dit il y a longtemps que j'ai payé moi-même mes études universitaires. Je travaillais durant l'été et je payais mes frais de scolarité à l'automne. Cela n'est peut-être pas possible aujourd'hui parce qu'il n'est pas facile de trouver du travail. Toutefois, je suis fier de dire que mes quatre filles poursuivent des études universitaires et qu'elles ont travaillé pendant l'été pour payer leurs frais de scolarité. Ce n'est pas facile et les jeunes n'ont pas tous la même chance. Voilà pourquoi le Programme canadien de prêts aux étudiants existe et pourquoi ces prêts sont offerts lorsque les prêts provinciaux ne suffisent pas.
Nous devrions peut-être revoir la question et nous pencher sur l'époque où nous offrions un peu de subventions. Il y a de la place pour une discussion. Je remercie le député d'avoir soulevé la question. C'est une question que je compte aborder avec mes collègues afin que nous fassions preuve de détermination pour obtenir ce que nous voulons.


M. Werner Schmidt (Kelowna, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, je partagerai mon temps de parole avec ma collègue, la députée de Calgary—Nose Hill.
Je voudrais étayer mes commentaires en réponse au discours du Trône en utilisant deux citoyens canadiens moyens pour illustrer mes propos.
Le discours du Trône a bien démontré que le gouvernement a totalement perdu le contact avec les Canadiens ordinaires à qui l'on demande de plus en plus de porter les fardeaux du Canada. Ils constatent que leur niveau de vie baisse. Le niveau de vie des Canadiens était comparable à celui des Américains, mais il a baissé considérablement et se trouve maintenant bien en dessous.
Hier était la Journée internationale des personnes âgées. Je me demande combien de personnes âgées ont vraiment fêté. Je ne peux m'empêcher de penser à Joe Shephard. Le printemps dernier, il a écrit une lettre à tous les députés. Je tiens à citer sa lettre aujourd'hui. Voici ce qu'il écrivait en avril dernier:
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Je suis un citoyen canadien âgé qui doit, comme vous l'avez décrété, vivre avec 13 000 $ par année; avec cette somme, j'essaie de me nourrir et me maintenir en santé, de chauffer et d'entretenir ma maison rurale, et d'assurer le bon fonctionnement du véhicule qui me permet de voir à mes besoins. |
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En 2000, je n'arrivais pas à joindre les deux bouts et à assurer l'entretien de mon véhicule de 1987. Alors, j'ai travaillé pendant six mois dans un chantier naval; j'ai gagné 7 400 $ moins les retenues d'impôt, du RPC et de l'AE, dont je n'ai d'ailleurs pas bénéficié ayant travaillé pendant trop peu d'heures. |
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On m'a demandé un impôt supplémentaire de 1 400 $ et on a utilisé mes remboursements de TVH en guise de paiement d'impôt. |
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Revenu Canada a réduit de 3 600 $ mon revenu annuel de 13 000 $, me laissant 800 $ par mois pour vivre et payer l'hypothèque, l'assurance, les taxes foncières, les réparations, l'assurance automobile, l'essence, l'électricité, le téléphone, l'eau, l'huile, le bois, l'habillement et l'alimentation. |
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Je n'ai ni ordinateur, ni courriel, ni télécopieur, ni téléphone et le ruban de ma machine à écrire vient de briser. |
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Je suis un expert en la matière et je sais qu'il est impossible de vivre avec un tel revenu. |
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Indiquez-moi quelle est la solution. |
Le discours du Trône ne propose aucune solution à M. Shephard. Joe devra travailler d'arrache-pied juste pour boucler le budget. Il n'a pas obtenu de réponse car le discours du Trône est tout simplement dissocié de la vie quotidienne des Canadiens.
Mardi dernier, après le discours du Trône de lundi, j'ai reçu un appel d'un aîné d'Edmonton, Ernie Psikla. Certains de mes collègues d'Edmonton le connaissent. Ernie m'a appelé pour me dire qu'il n'avait plus les moyens d'acheter les médicaments dont sa femme a besoin. À 12 $ le comprimé, cela lui coûte une fortune, d'autant plus que son régime d'assurance médicale ne couvre pas le coût de médicaments nouveaux et améliorés. Ernie se demande si les gens comme lui, qui ont un revenu fixe, pourraient profiter d'une aide telle qu'une déduction d'impôt plus juste pour le coût des médicaments. Ernie a également mentionné qu'il allait quitter l'appartement qu'il habite depuis 12 ans parce qu'il n'en a plus les moyens, le loyer ayant été majoré de 50 p. 100.
Il a dit avoir été déçu par le discours du Trône parce que le gouvernement ne reconnaît pas les vraies difficultés qu'éprouvent des gens comme sa femme et lui. Il ne se plaignait pas et ne demandait pas l'aumône. Ernie n'abandonne même pas la partie. Cela m'a surpris. Il demandait simplement au gouvernement de reconnaître les difficultés croissantes avec lesquelles des gens comme sa femme et lui sont aux prises. Le gouvernement l'a-t-il fait? Non.
Est-il juste que des gens comme Joe, Ernie et sa femme doivent faire les frais des dépenses excessives du gouvernement? Est-il juste que le premier ministre et son gouvernement ne disent rien au sujet de la réduction du fardeau fiscal de ces familles? Comment se sentent ces gens-là quand la seule solution concrète que trouve le gouvernement à tout problème, comme celui d'améliorer le système de santé, consiste à hausser les impôts?
Je ne puis m'empêcher de citer la phrase suivante, qui est tirée du discours du Trône: «Nous allons établir une relation plus juste entre le fardeau fiscal et le PIB.» C'est bien beau, mais cela ne vient pas du tout en aide aux gens parce que si le PIB augmente, le taux d'imposition augment aussi. Il y aura toujours un lien semblable. Ces gens-là ont un revenu fixe, et c'est un vrai problème.

(1725)
Où le gouvernement libéral croit-il donc que les Canadiens trouveront l'argent pour payer? Comment le gouvernement peut-il accepter que, chaque année, le niveau de vie de personnes comme Joe et Ernie diminue?
La situation de Joe et d'Ernie n'est cependant pas désespérée. Ils ont de quoi garder espoir lorsqu'ils entendent le discours que tient l'opposition officielle. Les Canadiens ont été soulagés, hier, d'entendre le chef de l'opposition officielle déclarer que les soins de santé nécessaires devraient être accessibles à tous les citoyens, indépendamment de leur capacité de payer, que les traitements urgents ne devraient souffrir aucun retard et que les Canadiens ne devraient pas avoir à payer des factures énormes pour des problèmes de santé très graves.
Les Canadiens âgés comme Joe et Ernie ont été heureux de m'entendre dire, hier à la Chambre, que l'Alliance canadienne s'engageait à assurer et préserver un bon niveau de vie pour tous les Canadiens âgés, et qu'aucune personne âgée ne devrait avoir à souffrir en raison du manque de services ou de soutien.
Nous savons, comme eux, que la seule façon d'attenidre et de maintenir un bon niveau de vie au Canada est d'avoir une économie qui repose sur des fondements solides et une économie où les travailleurs, les petites entreprises et les industries de chez nous ont toutes les possibilités de progresser. Pour cela, il faut faire deux choses: premièrement, réduire les impôts et, deuxièmement, réduire et simplifier la réglementation.
Le chef de l'opposition rappelait hier, à la Chambre, qu'au début des années 60, il y a 42 ans, les Canadiens avaient un niveau de vie égal à celui des Américains. Aujourd'hui, il lui est inférieur du tiers et continue de régresser.
Le discours du Trône ne prévoit rien pour remédier à cette situation. Il montre seulement que nous sommes dirigés par un gouvernement qui s'obstine à refuser de reconnaître ce qui arrive aux Canadiens et qui persiste à soutenir que l'orientation adoptée en 1993 est encore valable en 2002, alors que la qualité de vie des Canadiens ne s'améliore visiblement pas. Le gouvernement est tellement paralysé par son ampleur, son absence de solutions et ses querelles intestines qu'il n'entend pas les appels de l'opposition en faveur d'un programme d'action qui permettrait de renforcer notre économie depuis la base, c'est-à-dire par l'activié de nos familles, des petites entreprises et des industries de chez nous. Les députés d'en face ne semblent rien entendre de tout cela, car ils ne sont pas en contact avec les Canadiens ordinaires.
Je ne peux pas m'empêcher de penser à ce qu'a dit le député, il y a un moment, au sujet des gens qui prennent leur voiture pour aller au magasin du coin. Cela peut paraître terrible de faire cela, mais j'aimerais savoir comment le député se rendrait au magasin du coin si celui-ci se trouvait à 30 milles de son domicile. Je demanderais au député d'Athabaska où se trouve magasin du coin le plus proche de chez lui. Il y a certainement une différence entre parcourir en voiture un pâté de maisons et parcourir 30 milles. Or, le député n'a pas fait cette distinction.
C'est le problème du discours du Trône. Il se concentre sur des choses qui ne disent rien aux Canadiens ordinaires. Voilà le problème. Il y a un meilleur moyen de protéger l'environnement sans sacrifier l'économie. J'ai été vraiment secoué d'entendre le premier ministre annoncer en Afrique du Sud qu'il allait ratifier l'accord de Kyoto. Jamais l'industrie ni les provinces n'ont été consultées à ce sujet, et nous n'avons eu droit à aucune indication de ce que cette mesure allait coûter ni même de la façon dont on allait appliquer les dispositions de cet accord.
Pourtant, en sa qualité de dirigeant d'un pays reconnu pour être une démocratie, il s'est permis d'engager le Canada à respecter cet accord. Je suis convaincu qu'un grand nombre de députés qui occupent les banquettes arrière de l'autre côté de la Chambre souhaiteraient que le premier ministre ne puisse jouir d'autant de pouvoirs.
Les Canadiens ne sont plus disposés à tolérer ce genre de comportement tyrannique. Il est temps de reconnaître que nous formons une démocratie et que notre premier ministre et tous les députés ont des comptes à rendre aux Canadiens, d'abord et avant tout, et non au premier ministre lui-même. Il est temps de limiter les pouvoirs de cette charge.

(1730)


M. Larry Bagnell (Yukon, Lib.):
Monsieur le Président, j'ai écouté avec plaisir l'intervention bien réfléchie de mon collègue et j'ai été heureux de voir qu'il était se préoccupait des personnes âgées de sa circonscription. Il a fait une excellente observation sur laquelle nous sommes tous fondamentalement d'accord, à savoir que le niveau de productivité au Canada est inférieur à ce qu'il est aux États-Unis. Là où nous divergeons d'opinion, cependant, c'est quand il dit que le gouvernement ne fait rien à ce sujet. Je tiens à le mettre au courant de la situation, au cas où il ne le serait pas.
Cette année, le gouvernement a mis en oeuvre deux grandes initiatives, l'une à DRHC et l'autre à Industrie Canada: la stratégie en matière de compétences à DRHC et la stratégie d'innovation. Sauf erreur, il s'est tenu 34 conférences d'un bout à l'autre du pays. Une conférence rurale s'est tenue à ce sujet et il y aura une conférence nationale sur l'innovation. Comme le député le sait, c'est grâce à l'innovation que nous comblerons cet écart dans la productivité.
Je sais que mes électeurs du Yukon sont tellement au courant à ce sujet qu'on y met actuellement au point une stratégie pour le Yukon qui s'ajoutera à la stratégie nationale. Mon honorable collègue en conviendra sûrement, cette initiative importante et très détaillée visant à accroître la productivité est ce que nous souhaitons tous deux. Sait-il si cette initiative s'est manifestée dans sa circonscription? Dans l'affirmative, ses électeurs ont-ils eu suffisamment de temps pour donner leur opinion? S'il n'est pas au courant, voudrait-il que nous lui faisions parvenir de la documentation?

(1735)


M. Werner Schmidt:
Monsieur le Président, je suis non seulement conscient, mais extrêmement conscient qu'il n'y a pas eu beaucoup d'innovation à la suite d'une conférence ou même au cours d'une conférence.
On parle, on discute. On réalise d'innombrables études. Le temps est venu de donner aux Canadiens les outils nécessaires pour leur permettre d'innover. Parmi ces outils, notons la baisse des impôts et la diminution de l'ingérence du gouvernement au moyen de la réglementation, qui doivent se concrétiser. Si l'on permet aux gens de prendre des initiatives et de créer un environnement dans lequel ils peuvent réaliser une foule de projets, à ce moment-là, on en verra, de l'innovation. On n'arrivera à rien en tenant toutes sortes de conférences dans tout le pays.
Je dois faire une observation au sujet des personnes âgées. Ces gens reçoivent un revenu fixe. Ils ne s'intéressent pas aux stratégies novatrices. Ils ne se lancent pas en affaires. Ils ont bâti ce pays, ont contribué pendant des années et se retrouvent maintenant lésés. Leur niveau de vie a baissé.
J'aimerais que le député se penche sur un point en particulier. Le comprimé de 12 $ que l'épouse d'Ernie doit prendre est justement une question importante. Par exemple, le gouvernement se doit, aujourd'hui, de réexaminer avec soin le lien qui existe entre le prix des médicaments génériques et celui des médicaments brevetés. À une certaine époque, le prix moyen d'un médicament générique s'élevait à approximativement 50 p. 100 de celui des médicaments brevetés. Ce n'est malheureusement plus le cas. Les prix ont connu une hausse phénoménale. Il n'est plus aussi avantageux d'acheter des médicaments génériques que ça l'était autrefois.
Il n'est fait aucune mention dans le discours du Trône des moyens auxquels pourraient avoir recours les personnes âgées pour obtenir un traitement plus juste et équitable par rapport à leur position actuelle. C'est là ce que je voulais faire valoir.


M. David Chatters (Athabasca, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, je n'ai pas non plus entendu parler dans le discours du Trône d'une aide qu'on apporterait aux personnes à revenu fixe, surtout quand les effets de la ratification et de la mise en oeuvre du Protocole de Kyoto feront grimper en flèche le coût de l'énergie. Comment ces personnes dont le revenu est fixe feront-elles?
Je voudrais que le député de Kelowna me dise ce que ces personnes à qui il a parlé ou qui lui ont exprimé leurs préoccupations pensent de l'engagement pris dans le discours du Trône de doubler l'aide à l'Afrique sans que les pays africains n'aient pris le moindre engagement en retour de procéder à une réforme démocratique pour que les impôts des Canadiens ne finissent pas dans des comptes secrets d'individus comme Robert Mugabe. Qu'en pensent les personnes âgées qui sont confrontées à ces difficultés?


M. Werner Schmidt:
Monsieur le Président, je suis en mesure de répondre très directement à cette question, car j'ai reçu beaucoup plus d'appels au sujet de ce problème que de l'autre. Ces personnes à revenu fixe m'ont demandé comment elles devront faire pour joindre les deux bouts si leur note d'électricité ou d'autres services publics venait à augmenter de 25 p. 100 et que le prix de l'essence augmentait de 30 ou de 50 p. 100.
Cette année, par exemple, leur prestation de sécurité de la vieillesse a augmenté de 1,2 p. 100 au premier trimestre; pourtant, ces personnes devront faire face à de telles hausses de coût. Elles s'interrogent: «Où veut en venir le gouvernement? Ne se soucie-t-il pas du sort des personnes âgées? Après tout, nous avons bâti le pays. Nous croyions vivre en démocratie. Nous a-t-il seulement consultés? Pas le moindrement. Le gouvernement nous rend notre survie de plus en plus difficile.»
On ira, semble-t-il, de l'avant avec l'accord de Kyoto sans nous donner la moindre indication de ce qu'il nous en coûtera. Nous ne savons seulement que les coûts augmenteront, que le nombre des personnes ayant un emploi diminuera, et que cet accord va nous coûter des emplois. Comment feront ces gens pour joindre les deux bouts? Ils sont inquiets, mais ils gardent espoir. Ils comptent sur l'opposition officielle, entre autres, pour faire quelque chose. Ils veulent que nous demandions des comptes aux ministériels et que nous veillions à ce que la situation change.


Mme Diane Ablonczy (Calgary—Nose Hill, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, le discours du Trône des libéraux porte un titre quelque peu rêveur: «Le Canada que l'on veut». C'est parce que le discours du Trône de lundi est une admission de la part des libéraux qu'ils n'ont pas livré la marchandise. Ils n'ont pas su moderniser le système de santé. Ils n'ont pas fait de progrès pour soustraire les enfants du Canada à l'aide sociale. En fait, selon Statistique Canada, sous les libéraux, la pauvreté chez les enfants a progressé.
Ils n'ont pas donné aux autochtones un espoir raisonnable d'une vie meilleure. Ils n'ont pas proposé de plan pour s'attaquer aux défis que pose le changement climatique. Ils n'ont pas appuyé ce qui ferait du Canada un chef de file mondial dans le domaine de l'innovation et de l'apprentissage. Ils n'ont pas fait de nos villes des centres urbains de classe mondiale ni vu à la santé de nos collectivités.
Ils n'ont pas établi de partenariat entre le gouvernement et les citoyens. Le fossé entre les Canadiens et leur gouvernement est plus large que jamais auparavant. Les libéraux ne se sont pas assurés que le Canada ait sa place en Amérique du Nord et dans le reste du monde en tant que pays avancé.
Nous avons cette terrible admission d'échec; elle vient de la bouche même des libéraux; elle se trouve dans le discours du Trône de lundi; cette liste est tirée du discours du Trône; les libéraux disent que ce sont là les choses qu'ils veulent pour le Canada parce qu'ils n'ont toujours pas réussi à livrer la marchandises dans ces secteurs essentiels. Il n'y a absolument aucune excuse pour un tel échec. Ils ont eu neuf ans de pouvoir absolu.
Ils ont dépensé en moyenne 115 milliards de dollars par an pendant neuf ans. Cela fait plus d'un billion. En fait, depuis les dernières élections, les libéraux ont augmenté leurs dépenses de 10 p. 100 par an. Combien de Canadiens aimeraient disposer de 10 p. 100 de plus chaque année? C'est ce dont disposait le gouvernement, or il dit toujours vouloir ces choses importantes pour le Canada.
En dépit du pouvoir absolu dont disposaient les libéraux pour faire tout ce qu'ils voulaient, en dépit de la somme d'un billion de dollars qu'ils pouvaient dépenser comme ils l'entendaient et en dépit de sommes supplémentaires chaque année, les libéraux n'ont eu ni la volonté ni la jugeote nécessaires pour respecter les priorités annoncées publiquement.
Neuf ans plus tard, un billion de dollars plus tard, en dépit du pouvoir qu'ils avaient qui leur permettait de faire ce qu'ils voulaient, en dépit de la multitude d'occasions et de ressources à leur disposition, ces choses sont toujours sur la liste des desiderata du gouvernement.
Les Libéraux l'ont coiffé du titre « Le Canada que l'on veut ». Ils auraient aussi pu parler des possibilités perdues. Le discours du Trône de lundi était un constat, triste et choquant, de l'échec et de l'hypocrisie des Libéraux. Ils se disent en faveur des mesures suivantes: offrir des soins de santé, de généreuses dispositions à l'égard de nos enfants et un avenir brillant aux Autochtones; régler le problème du changement climatique; faire en sorte que le Canada soit réputé sur les plans de l'innovation et de l'apprentissage; avoir des villes de premier ordre et des collectivités en santé; favoriser des liens étroits entre le gouvernement et les citoyens; et veiller à ce que le Canada soit respecté sur la scène mondiale. Toutes les paroles creuses que nous servent les Libéraux au sujet de ces enjeux importants représentent fort probablement la cause véritable et camouflée du réchauffement de la planète.
Si c'était des objectifs que les Libéraux désirent vraiment atteindre, ceux-ci ne figureraient pas sur une liste de souhaits après neuf longues années de pouvoir libéral débridé. C'est une liste de ce que le premier ministre aurait souhaité laisser en héritage. Le discours du Trône est plutôt un triste exposé d'un héritage libéral constitué de maladresses et d'échecs, un héritage qui n'est pas à la hauteur des attentes du Canada et des Canadiens.
L'échec des Libéraux est évident dans tous les ministères. Je suis le porte-parole de mon parti dans le domaine de l'immigration. Je pourrais littéralement parler toute la journée des carences des Libéraux dans l'important domaine de l'immigration. En raison d'un manque de temps, je ne peux que souligner une ou deux de ces carences, mais elles sont une indication éloquente de l'incompétence et de la faiblesse du gouvernement libéral quand il s'agit de défendre les intérêts du pays.
Grâce à une demande d'accès à l'information, j'ai découvert que, en 2001, plus de 6 000 criminels étrangers ne faisant pas l'objet d'une mesure permanente de renvoi demeuraient en circulation au Canada. Parmi les criminels dont on a ordonné le renvoi, 34 p. 100 demeurent toujours au Canada.

(1740)
J'ai aussi découvert que, parmi les quelque 300 000 revendicateurs du statut de réfugié dont on a ordonné le renvoi depuis 1985, il n'y en avait en 2001 que 20 000 environ dont on avait confirmé et effectué le renvoi. On peut confirmer le départ de seulement 11 p. 100 des personnes dont on a constaté qu'elles ne sont pas des réfugiés légitimes et dont on a ordonné le renvoi. Essentiellement, nous sommes ici en présence d'un taux d'échec de 90 p. 100 dans le cas de ces renvois. C'est là le bilan des libéraux dans l'administration de secteurs importants de notre système d'immigration.
Dans le discours du Trône, les libéraux ont dit qu'ils voulaient éliminer les obstacles à la reconnaissance des titres de compétences acquis à l’étranger, accélérer l’entrée des travailleurs qualifiés déjà assurés d’un emploi au pays, faire du Canada une destination de choix pour les étudiants étrangers talentueux, réduire les obstacles auxquels doivent faire face les nouveaux immigrants lorsqu’ils tentent de s’intégrer et aider les enfants de nouveaux immigrants à apprendre le français et l’anglais.
Ce ne sont là que des voeux pieux de la part des libéraux. Je le répète, ils ont eu neuf longues années pour s'occuper sérieusement des besoins de ceux qui choisissent de venir s'établir chez nous pour commencer une nouvelle vie et contribuer à bâtir le Canada de demain.
En vérité, les libéraux savent depuis qu'ils ont pris le pouvoir que les immigrants venant s'établir au Canada avaient grandement besoin que le gouvernement agisse dans ces domaines. Les libéraux ont eu neuf ans pour prendre des mesures concrètes, en fait n'importe quelle mesure, pour faire reconnaître les titres de compétences acquis à l’étranger, accélérer l’entrée des travailleurs qualifiés déjà assurés d’un emploi au pays, faire du Canada une destination de choix pour les étudiants étrangers talentueux et aider les enfants à apprendre le français et l’anglais. Malgré toutes les belles occasions d'agir qu'ont eues les libéraux, les besoins importants des immigrants figurent encore sur la liste des voeux pieux des libéraux.
Les Canadiens ont une expression pour exprimer leur scepticisme et leur irrévérence lorsque des gens au bilan guère inspirant leur décrivent les mesures qu'ils entendre prendre. Nous disons tout simplement: «Des promesses, encore des promesses.»
Cela résume assez bien le discours du Trône que nous ont livré ces grands parleurs et petits faiseurs de libéraux qui gouvernent le Canada. Des promesses, rien que des promesses. Dans ces domaines, leur bilan est déficitaire. Dans les domaines importants aux yeux des Canadiens, ils n'ont pas réussi à livrer la marchandise.
Les Canadiens méritent mieux que cela. Les immigrants qui s'établissent au Canada méritent mieux que cela. L'Alliance canadienne est résolue à offrir la solution de rechange que veut et que mérite le Canada.

(1745)


M. James Moore (Port Moody—Coquitlam—Port Coquitlam, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, ma collègue de Calgary—Nose Hill est une distinguée parlementaire qui sert le Canada depuis 1993 et qui a passé beaucoup de temps à visiter le Canada, d'un océan à l'autre. Tout récemment, elle a consacré un temps considérable à la course à la direction de l'Alliance canadienne, qui repose vraiment sur un fondement solide. Une bonne partie de sa campagne était consacrée au déficit démocratique que nous constatons au Canada. Apparemment, le ministre des Finances s'est approprié cette idée, en théorie uniquement, il va sans dire.
Je me demande si la députée pourrait parler de certaines choses qu'elle a vues à la Chambre et expliquer pourquoi les libéraux n'ont pas réussi à s'attaquer au véritable déficit démocratique. Ils en font mention dans leurs campagnes, mais ils ne passent pas aux actes. Les libéraux occupent 177 sièges à la Chambre des communes et peuvent faire tout ce qu'ils veulent. Toutefois, au cours des dix dernières années, ils n'ont pas réussi à s'attaquer au problème. Je me demande si la députée pourrait les inspirer et leur dire comment procéder pour y arriver.


Mme Diane Ablonczy:
Monsieur le Président, mon collègue devait savoir que c'était le sujet de mon autre intervention que j'aurais voulu pouvoir faire.
En fait, ce sont les scandales, la mise au jour de la corruption, du copinage et de l'utilisation du beurre et de l'argent du beurre, dont nous sommes témoins tous les mois depuis quelques années de la part du gouvernement libéral, qui indiquent le plus clairement le déficit démocratique au Canada. En fait, le gouvernement n'a pas mis en oeuvre les mesures appropriées en matière de reddition de compte et de transparence. Si de telles mesures existaient, elles auraient forcé les libéraux à respecter les normes auxquelles les Canadiens s'attendent. Que se passe-t-il? Les Canadiens abandonnent. Comme ils ont le sentiment que le gouvernement ne les représente pas, qu'il n'est à l'écoute ni de leurs désirs, ni leurs valeurs, les Canadiens se désintéressent de la chose politique. Voilà un véritable problème. Nous le constatons tous en tant que parlementaires. Les libéraux le voient. Nous le voyons aussi. Tout le monde en est conscient.
Depuis que nous siégeons à la Chambre, l'Alliance canadienne propose des mesures très claires qui permettraient de combler le déficit démocratique. Le lien serait rétabli entre ce qui se passe ici, d'une part, et, d'autre part, ce que les Canadiens souhaitent et ce qui servirait vraiment leurs intérêts.
Ce sont des choses fort simples, comme un conseiller en éthique qui ferait enquête sur ces cas atroces de corruption et de copinage et ferait rapport au Parlement. Au lieu de cela, nous avons un conseiller en éthique qui a été engagé et est complètement contrôlé par le gouvernement qui devrait lui rendre des comptes. Personne au Canada ne pense que cela tient debout. En réalité, même les libéraux partagent cet avis, car, dans leur livre rouge de 1993, ils ont promis un conseiller en éthique qui serait complètement indépendant et relèverait directement du Parlement.
Nous avons donné aux libéraux la chance de tenir cette promesse du livre rouge. L'an dernier, nous avons proposé une motion portant que la Chambre crée un poste de conseiller en éthique qui ferait rapport aux parlementaires, au lieu d'être contrôlé par le gouvernement. Que s'est-il passé? Les libéraux ont voté contre cette motion. Pas étonnant que les Canadiens se disent incapables de faire confiance au gouvernement, qu'ils estiment que le gouvernement ne rend de comptes à personne. Les libéraux refusent toute solution. C'est pourquoi nous devons leur trouver des remplaçants qui sauront mettre en oeuvre les mesures que nous préconisons depuis neuf ans à la Chambre, de façon à rétablir une vraie démocratie.

(1750)


M. Loyola Hearn (St. John's-Ouest, PC):
Monsieur le Président, en formulant ses observations sur ce ton, la députée de Calgary—Nose Hill est-elle en train de nous dire de ne pas nous attendre à ce que le gouvernement donne suite à sa promesse d'augmenter le financement des programmes visant les pauvres et le système de santé, alors qu'il estime lui-même ces enjeux tellement importants qu'il a fait des promesses à leur sujet trois fois de suite?


Mme Diane Ablonczy:
Monsieur le Président, examinons un peu le bilan du gouvernement libéral. Pour connaître les gens, il n'y a qu'à observer ce qu'ils font, où ils vont, ce qu'ils disent et s'ils respectent leurs engagements. Le gouvernement libéral a réduit les dépenses de santé. Les problèmes que nous avons remontent à 1995, lorsqu'il a réduit son engagement financier dans le système de santé. Voilà qu'il commence à en payer le prix. Qu'est-ce que les libéraux ont fait? Ils ont dit dans le discours du Trône: «Ensemble, nous pouvons mettre en place le système de soins de santé du XXIe siècle.»
Ces paroles viennent de ceux-là mêmes qui ont sabré notre système de santé. Les Canadiens vont-ils vraiment croire que les libéraux joindront le geste à la parole et concrétiseront cette vision merveilleuse du système de santé de l'avenir? Je ne crois pas. Selon Statistique Canada, c'est sous la gouverne libérale que la pauvreté chez les enfants s'est aggravée. La situation est pire sous la gouverne libérale.
Peu importe leurs promesses, voilà ce qu'ils ont donné aux Canadiens. Pour évaluer la fiabilité du gouvernement libéral, les Canadiens doivent d'abord examiner son bilan.


M. Wayne Easter (Malpeque, Lib.):
Monsieur le Président, je partagerai mon temps avec le secrétaire d'État au Développement rural.
Premièrement, je ne peux m'empêcher de parler un peu du grand discours de droite qu'a fait la députée de Calgary—Nose Hill en parlant des neuf longues dernières années.
Le discours du Trône est réellement un discours libéral, fondé sur les priorités des libéraux. Nous avons fini d'écouter les idées de droite du parti d'en face, ce qui s'est trop fait dans le passé. Aujourd'hui, alors que nous nous apprêtons à mettre en oeuvre les mesures prévues dans le discours du Trône, les Canadiens bénéficient d'une indépendance financière et ils sont unis. Notre pays est uni, et nous avons confiance en l'avenir. Nous pouvons aller de l'avant avec le genre de priorités économiques et sociales dont nous pouvons être fiers à titre de libéraux, priorités qui sont conformes aux valeurs libérales.
Je me réjouis du discours du Trône. Il définit une orientation importante. C'est un guide pour l'avenir et il trace la voie que suivra le gouvernement dans les années à venir.
Il s'agit d'un discours du Trône parfaitement libéral, et je suis fier de participer au débat à ce sujet. Dans le discours du Trône, il est fait mention de promesses que nous avons faites en campagne électorale et qui remontent à 1993, j'en conviens. Lorsque nous avons été portés au pouvoir, nous nous sommes retrouvés avec un déficit budgétaire issu de l'époque Mulroney. Il nous a fallu mettre de l'ordre dans les finances publiques, et nous l'avons fait. Nous avons dû prendre des décisions difficiles. Comme on l'a mentionné, certaines ont été prises en 1995. Nous avons fait les compressions nécessaires et, aujourd'hui, nous nous appuyons sur des assises qui nous permettent d'aller de l'avant.
Le discours du Trône rompt avec certaines valeurs de droite du passé et il nous permet de progresser. Il repose non seulement sur une base économique solide, mais il mise aussi sur une politique sociale visant de meilleurs soins de santé. Il propose d'aider les familles et les enfants. Il prévoit une amélioration de la situation dans le domaine de l'agriculture. Il traite des changements climatiques. Il propose d'offrir de meilleures possibilités à d'autres êtres humains dans le monde. Il s'inspire de valeurs libérales.
Je suis ravi que le premier ministre ait donné aux membres du caucus l'occasion de contribuer à la rédaction du discours du Trône. Je me réjouis de voir que beaucoup des idées qui ont surgi des discussions que nous avons eues en tant que parti figurent dans le discours du Trône.
Je tiens à citer la lettre que j'ai adressée au premier ministre. En effet, il nous faut être sans cesse vigilants à l'égard de nos industries d'exploitation des ressources naturelles, y compris le secteur des pêches, à propos duquel les députés d'en face poussent des cris de temps à autre.
Nous nous emballons tellement parfois pour de nouvelles technologies que nous en oublions que la force durable de l'économie canadienne réside dans nos richesses naturelles: l'agriculture, les pêches, les forêts et les mines, et la valeur ajoutée que nous procurent ces ressources. Ce sont sur ces industries d'exploitation des ressources naturelles que repose notre pays depuis toujours. Nous devons nous assurer qu'elles seront bien financées à l'avenir, et cela, au moyen des mesures budgétaires.
La plupart de ces secteurs figurent dans le discours du Trône. Celui-ci mentionne plusieurs de ces points et nous devons faire preuve de vigilance et nous assurer d'y consacrer les fonds nécessaires à l'avenir.
Compte tenu de mon expérience en agriculture, je tiens à parler de ce secteur. L'initiative énoncée dans le cadre stratégique pour l'agriculture vise à ce que le gouvernement s'engage «à faire passer l'agriculture au-delà de la gestion de crise afin que le secteur devienne plus rentable et plus prospère au XXIe siècle.» Cela marque un nouveau militantisme du gouvernement fédéral dans le secteur agricole.

(1755)
En juin dernier, le gouvernement fédéral a accompagné l'annonce de ce cadre stratégique pour l'agriculture d'une injection de fonds à hauteur de 5,2 milliards de dollars. Une fois la participation provinciale ajoutée à cette somme, le financement de l'agriculture atteindra 8,18 milliards de dollars. La communauté agricole appuie cette initiative qu'il faudra éventuellement bonifier.
Les avantages de cette initiative dépendent non seulement des efforts consentis au pays, mais aussi de ce que nos agriculteurs doivent affronter à l'échelle internationale. Je n'ai pas le temps d'énumérer les chiffres et d'expliquer l'ampleur des subventions aux États-Unis et en Europe, mais elles sont terribles. Nous devons appuyer nos agriculteurs entre-temps.
Le nouveau Farm Bill, aux États-Unis, et les mesures commerciales répétées des Américains visant la Commission canadienne du blé démontrent bien que les efforts du gouvernement fédéral afin de tenir les engagements pris en vertu du cadre stratégique pour l'agriculture devront comporter des mesures répondant aux politiques agricoles et aux contestations non fondées des États-Unis.
Le Farm Bill injectera environ 190 milliards de dollars dans l'industrie agricole de ce pays au cours des dix prochaines années. Ce nouveau degré de protectionnisme fera baisser encore les prix des produits de base aux États-Unis et ailleurs sur la planète et aura un effet négatif direct sur les agriculteurs canadiens. Pour réagir à ces subventions et pratiques commerciales injustes, le gouvernement devra être déterminé à employer une réponse directe, comme on le décrit dans le discours du Trône où l'on dit que le gouvernement «continuera d’œuvrer dans des cadres bilatéraux et multilatéraux à la résolution des différends».
Un dossier que le gouvernement défendra plus activement encore est celui de la protection des infrastructures de notre secteur agricole. Il faut contester férocement et avec ardeur les efforts des États-Unis en vue de détruire la Commission canadienne du blé. De même, nous devons résister à l'Alliance canadienne qui essaie aussi de faire disparaître la Commission du blé. La plus récente contestation des États-Unis était leur dixième tentative et tous leurs efforts précédents à l'encontre de la Commission canadienne du blé ont échoué.
Le gouvernement fédéral doit affirmer sans équivoque qu'il appuie fermement le secteur des produits soumis à la gestion des approvisionnements, l'une des plus grandes réussites du Canada en matière de gestion et production agricoles, fort avantageuse pour les agriculteurs par ailleurs. Il doit aussi veiller à ce que cette importante institution ne soit pas menacée lors des négociations de l'Organisation mondiale du commerce ou des autres négociations commerciales.
Finalement, en ce qui a trait au règlement des différends commerciaux, les règles doivent s'appliquer uniformément à tout le monde. En ce qui a trait plus précisément au problème de la galle verruqueuse et du virus de la pomme de terre, les États-Unis ont tenté de négocier pour les agriculteurs de l'Île-du-Prince-Édouard un programme de mise en quarantaine plus rigoureux que celui qu'ils seraient prêts à accepter pour leurs agriculteurs. C'est inacceptable et nous devons avoir des programme de restrictions similaires pour les deux pays.
Je souligne qu'en ce qui concerne la santé, le discours du Trône va dans la bonne direction. En ce qui concerne la protection de l'environnement et le changement climatique, nous allons aussi dans la bonne direction.
Le développement régional est un domaine sur lequel l'Alliance canadienne fait toujours porter ses attaques, surtout en ce qui concerne la région de l'Atlantique. Je voudrais parler un instant de ce que le développement régional a fait pour la région de l'Atlantique: il l'a placée au premier plan dans ses efforts d'avancement.
Voyons les coûts pour les entreprises. C'est dans la région de l'Atlantique que l'on trouve l'environnement le plus favorable parmi les pays du G-7 pour faire des affaires. Le coût de la vie y est de 25 p. 100 à 65 p. 100 moins élevé que dans les autres régions. On y obtient des permis de construire beaucoup plus rapidement et on y effectue aussi les évaluations environnementales beaucoup plus rapidement: c'est l'affaire de quelques semaines ou de quelques mois. Les prix des terrains rangent la région dans la proportion de 5 p. 100 des endroits en Amérique du Nord où les terrains sont les moins chers. Nous jouissons de prix de l'énergie stables et concurrentiels. Nous avons une population active de 1,2 million de travailleurs instruits. Nous avons une infrastructure solide comprenant 16 ports de mer et 15 aéroports commerciaux.
Le Canada vient au second rang parmi les pays de l'OCDE quant à la pénétration des systèmes de transmission à large bande. Nous avons plus de 40 collèges et universités. Nous avons une population active fiable et très solide. Les députés de l'Alliance devraient noter cette caractéristique en matière fiscale: la région de l'Atlantique se place au deuxième rang parmi les pays du G-7 pour ce qui est des faibles impôts moyens sur les sociétés.

(1800)
De même, les impôts fonciers y sont 30 p. 100 moins élevés, et la région compte parmi les principaux regroupements d'organismes d'enseignement en ligne. Nous avons plus de 1 400 entreprises de formation. La région de l'Atlantique est l'endroit où faire des affaires. Nous avons réussi à faire tout cela et à maintenir notre programme d'action sociale, et c'est en partie grâce à nos agences de développement régional comme l'APECA.


M. John Cummins (Delta—South Richmond, Alliance canadienne):
Monsieur le Président, j'ai été ravi d'écouter les commentaires élogieux du député de Malpeque sur le discours du Trône. Or, le député d'en face a été président du Comité des pêches de la Chambre des communes et il n'y a pas la moindre mention des pêches dans ce discours du Trône.
J'ai été absolument estomaqué d'entendre le président du Comité des pêches féliciter le gouvernement pour son discours du Trône alors qu'il n'a été question dans ce dernier d'aucun secteur en crise comme les pêches. Le député connaît tout aussi bien que moi les graves problèmes qui assaillent l'industrie des pêches. Il sait tout aussi bien que moi que la Garde côtière souffre d'un sous-financement et d'un manque de ressources. Or, il n'y a pas un traître mot là-dessus dans le discours du Trône.
En fait, le député n'avait pas l'intention de soulever la question des pêches jusqu'à ce que je lui donne l'occasion de faire quelques observations bien placées. Je lui laisse donc la parole pour quelques minutes afin qu'il remédie à certains de ses oublis.


M. Wayne Easter:
Monsieur le Président, si on revient au discours de la députée de Calgary—Nose Hill, on verra comment cette députée de l'Alliance canadienne, dont est membre le député de Delta—South Richmond, bien qu'il déteste sans doute l'avouer parfois, a traité de toutes les parties du discours dont nous avons parlé comme si nous n'en avions pas fait assez alors que nous avons progressé dans ces domaines.
Dans le secteur des pêches, le ministre des Pêches et des Océans fait de l'excellent travail. Certes, il y a du travail à faire. Nous avons déposé en outre des rapports du Comité des pêches. Nous ne nous attendions pas à ce que cela figure dans le discours du Trône, mais plutôt dans le prochain budget. Ainsi, en tant qu'ex-président du Comité des pêches, à l'instar du député d'en face, je vais certainement faire savoir au ministre des Pêches et des Océans que nous nous attendons à ce que le prochain budget s'attaque de front aux problèmes des pêches.

(1805)


M. Svend Robinson (Burnaby—Douglas, NPD):
Monsieur le Président, je remercie le député de Malpeque, le président sortant du Comité des pêches, de ses observations. Je m'associe certes à une préoccupation qui a été exprimée au sujet de l'absence de toute allusion aux pêches dans le discours du Trône et je vais adresser deux questions très précises au député, surtout en sa qualité de président sortant du Comité des pêches.
Tout d'abord, en tant que député de la Colombie-Britannique, je tiens à dire au député qu'en Colombie-Britannique, nous nous inquiétons vivement des coupes sombres pratiquées dans le budget du ministère des Pêches et des Océans, sur la côte ouest. Les programmes de mise en valeur des salmonidés, entre autres, subissent des coupes radicales alors que le budget de l'administration centrale ici, à Ottawa, est gonflé. Le député est-il prêt à examiner cette question sérieusement?
L'autre question a été soulevée par le député de Delta—South Richmond, par votre serviteur et par d'autres députés de la Colombie-Britannique. Il s'agit de la situation très préoccupante causée par la perte tragique de cinq